एसडीएम को अदालत में हाजिर होने के लिए समन जारी करने पर 13 अक्टूबर को होगा निर्णय

गुड़गांव, 21 अगस्त 2026। गुड़गांव कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री अमित अहलावत की अदालत के 11 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार, गुड़गांव के एसडीएम हितेंद्र शर्मा एक आपराधिक मुकदमे में आरोपी हैं। आदेश के मुताबिक, एसडीएम हितेंद्र शर्मा को अदालत में हाजिर होने के लिए समन जारी करने पर महत्वपूर्ण निर्णय 13 अक्टूबर 2026 को सुनाया जाएगा।
कोई आग तो जरूर लगी है, जो धुआं उठा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो एसडीएम स्वयं आपराधिक मुकदमे में आरोपी हैं, वे समाधान शिविर में जनता के साथ किस प्रकार न्याय करते होंगे।
11 अगस्त को एसडीएम हितेंद्र शर्मा के कार्यालय की ओर से एक गवाह अदालत में हाजिर हुआ और उसकी गवाही दर्ज की गई।
पुराने वाहनों पर प्रतिबंध से जुड़ा है मामला
गुड़गांव एसडीएम हितेंद्र शर्मा के खिलाफ 15 वर्ष पुराने वाहनों पर कथित रूप से अवैध प्रतिबंध लगाने के संबंध में गुरुग्राम मजिस्ट्रेट न्यायालय में बीएनएस/बीएनएसएस के तहत आपराधिक मुकदमा संख्या COMI-469/2026 दर्ज किया गया था।
शिकायत में एसडीएम पर कानून के उल्लंघन, पद एवं अधिकारों के दुरुपयोग, धोखाधड़ीपूर्ण आचरण, आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) तथा आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं।
वर्तमान एसडीएम हितेंद्र शर्मा से पहले पूर्व एसडीएम परमजीत चहल एवं रविंदर कुमार को भी सेशन कोर्ट से समन जारी हो चुके हैं। दोनों अधिकारी अदालत में अनुपस्थित रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों और वकील का विवाद कानूनी मोड़ पर
गुरुग्राम में प्रशासनिक अधिकारियों और एक वकील के बीच विवाद अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। पूर्व एसडीएम परमजीत चहल और पूर्व एसडीएम रविंदर कुमार को सेशन कोर्ट द्वारा पेश होने के लिए तलब किया जा चुका है।
मजिस्ट्रेट कोर्ट में 11 जून 2026 को दर्ज शिकायत संख्या COMI-469/2026—मुकेश कुल्थिया बनाम एसडीएम गुरुग्राम हितेंद्र शर्मा—में अदालत ने 11 अगस्त को अतिरिक्त सबूत एवं गवाह पेश करने के आदेश दिए थे।
तीनों एसडीएम को जेल भेजने की मांग
शिकायतकर्ता एडवोकेट मुकेश कुल्थिया ने गुड़गांव के एसडीएम हितेंद्र शर्मा पर कानून के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग, हत्या के प्रयास और आपराधिक विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि गुड़गांव के तीनों एसडीएम कथित रूप से कुछ साजिशकर्ताओं और निहित स्वार्थों के दबाव में जनता की पुरानी गाड़ियों पर गैरकानूनी पाबंदी लगा रहे हैं, ताकि नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ाई जा सके। इससे आम नागरिकों का उत्पीड़न होने के साथ उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
एडवोकेट कुल्थिया ने इसे प्रशासनिक पद के खुले दुरुपयोग का मामला बताते हुए तीनों एसडीएम को जेल भेजने की मांग की है।
इस मामले में अदालत द्वारा गवाही के लिए समन जारी किया जाना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। अब यह प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही लिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोपों के समर्थन में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलते हैं तो प्रशासनिक जवाबदेही और अधिकारों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा यह प्रकरण बड़ा कानूनी विवाद बन सकता है।







