71 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को बिना आय सीमा मिले पेंशन : विद्रोही

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71 से 80 वर्ष तक 7500 और 81 वर्ष से अधिक आयु वालों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग

रेवाड़ी, 21 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर सभी बुजुर्गों को बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से वरिष्ठ नागरिकों को विकसित एवं लोकतांत्रिक देशों की तर्ज पर पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा सरकार अन्य राज्यों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों को 3200 रुपये मासिक पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में बेहतर स्थिति में है, लेकिन बुजुर्गों की आवश्यकताओं को देखते हुए सामाजिक सुरक्षा का दायरा और बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक किसी एक धर्म, जाति, वर्ग अथवा समुदाय के नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर हैं। संयुक्त परिवारों के टूटने और एकल परिवारों का चलन बढ़ने से घरों में बुजुर्गों की उपेक्षा भी बढ़ रही है। यह समस्या लगभग सभी धर्मों, जातियों और वर्गों में समान रूप से दिखाई दे रही है।

विद्रोही ने कहा कि सेना, केंद्र अथवा राज्य सरकार की नौकरी से सेवानिवृत्त बुजुर्ग नियमित पेंशन के सहारे सम्मानजनक जीवन जी लेते हैं, लेकिन सरकारी पेंशन से वंचित वरिष्ठ नागरिक या तो पूरी तरह परिवार पर निर्भर रहते हैं अथवा प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सहारा लेते हैं।

उन्होंने हरियाणा में वृद्धावस्था पेंशन की दो श्रेणियां बनाने का सुझाव दिया। पहली श्रेणी में 60 से 70 वर्ष तक के बुजुर्गों को रखा जाए, जिनके लिए आय सहित अन्य निर्धारित शर्तें लागू हों। दूसरी श्रेणी 71 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की हो, जिसमें आय की कोई सीमा न रखी जाए।

विद्रोही ने मांग की कि 71 वर्ष से अधिक आयु का प्रत्येक ऐसा बुजुर्ग, जो आयकरदाता नहीं है, सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं अन्य सुविधाओं का पात्र माना जाए। उन्होंने 71 से 80 वर्ष तक के वरिष्ठ नागरिकों को 7500 रुपये और 81 वर्ष से अधिक आयु वालों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की, ताकि बुजुर्ग किसी पर निर्भर हुए बिना अपना शेष जीवन सम्मानपूर्वक व्यतीत कर सकें।

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Author: Bharat Sarathi

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