जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर लिया सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प

गुरुग्राम, 20 अगस्त। भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती पर स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अपने कार्यालय में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने राजीव गांधी को आधुनिक भारत का स्वप्नदृष्टा बताते हुए कहा कि देश को कम्प्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी के युग में ले जाने में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा है।
विद्रोही ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के बलिदान के बाद 31 अक्टूबर 1984 को मात्र 40 वर्ष की आयु में राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला था। उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह युवा नेतृत्व देश में ऐसी तकनीकी क्रांति की नींव रखेगा, जिससे भारत का महत्व पूरी दुनिया में बढ़ेगा।
सूचना क्रांति के दूरदर्शी नायक थे राजीव गांधी
उन्होंने कहा कि आज भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। कम्प्यूटर, मोबाइल और आधुनिक संचार माध्यमों ने आम आदमी को पूरी दुनिया से जोड़ दिया है। इस परिवर्तन की बुनियाद रखने का श्रेय राजीव गांधी की दूरदर्शी नीतियों को जाता है।
विद्रोही ने कहा कि जिन लोगों ने उस समय देश को कम्प्यूटर युग में ले जाने के अभियान का मजाक उड़ाया था, वे आज उसी तकनीकी क्रांति की उपलब्धियों का श्रेय लेने की होड़ में हैं। राजीव गांधी ने अपने पांच वर्ष के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत को आधुनिक बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में असाधारण कार्य किए।
युवाओं को नेतृत्व में दी विशेष भागीदारी
विद्रोही ने कहा कि राजीव गांधी ने न केवल राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाई, बल्कि उन्हें आधुनिक भारत का नेतृत्व करने के योग्य बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कम समय के राजनीतिक जीवन में उन्होंने अपनी प्रतिभा, आधुनिक सोच और दूरदर्शी विचारों की अमिट छाप छोड़ी।
उन्होंने कहा कि जब राजीव गांधी राजनीतिक रूप से परिपक्व होकर भारत को विश्व शक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे, तभी 21 मई 1991 को आतंकवाद ने उन्हें देश से छीन लिया। उनका बलिदान भारतीय राजनीति और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति था।
सद्भावना दिवस पर लें देश की एकता बचाने का संकल्प
विद्रोही ने कहा कि राजीव गांधी देश की एकता और अखंडता के लिए जिए तथा इन्हीं मूल्यों की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए। उनकी जयंती को देशभर में सद्भावना दिवस के रूप में मनाना तभी सार्थक होगा, जब नागरिक आतंकवाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प लें।
उन्होंने कहा, “राजीव गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे को मजबूत करने के लिए जीवनभर कार्य करने की शपथ लें।”








