मानसून से पहले तालाबों की डी-वाटरिंग, गहरीकरण और जलभराव संभावित क्षेत्रों से कनेक्टिविटी का मिला लाभ, निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने पोंड रिवाइवल कार्यों की समीक्षा की
गुरुग्राम, 19 अगस्त। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा मानसून से पूर्व शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित तालाबों के गहरीकरण, डी-वाटरिंग तथा उन्हें जलभराव संभावित क्षेत्रों से जोड़ने के लिए किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बारिश के दौरान इन तालाबों में 5.76 करोड़ लीटर अतिरिक्त बरसाती पानी का संग्रह हुआ, जिससे वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ जलभराव की स्थिति को नियंत्रित करने में भी मदद मिली।
उक्त जानकारी बुधवार को निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में आयोजित पोंड रिवाइवल कमेटी की समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक में तालाबों की वर्तमान स्थिति, मानसून से पहले किए गए कार्यों के परिणाम तथा भविष्य में तालाबों की जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त निगमायुक्त रविन्द्र यादव, कमेटी सदस्य तिलकराज मल्होत्रा, निगम पार्षद विकास यादव एवं कुलदीप यादव, मुकेश जेलदार, अनिल यादव, अशोक पहलवान एवं गगनदीप सहित अधीक्षक अभियंता सचिन यादव, तहसीलदार हरकेश गुप्ता तथा निगम की बागवानी शाखा के सहायक अभियंता एवं कनिष्ठ अभियंता उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि मानसून से पहले तालाबों की डी-सिल्टिंग, डी-वाटरिंग और गहरीकरण का कार्य किया गया, जिससे उनकी जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई। साथ ही पाइपलाइन एवं चैनलाइजेशन के माध्यम से वर्षा जल को तालाबों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में रनऑफ को तालाबों में संग्रहित किया जा सका।
5.76 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल हुआ संग्रहित
बैठक में प्रस्तुत सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बारिश से पहले तालाबों में 9.75 करोड़ लीटर पानी संग्रहित था। बारिश के बाद यह मात्रा बढ़कर 15.51 करोड़ लीटर हो गई। यानी बारिश के दौरान 5.76 करोड़ लीटर यानी 57,626 किलोलीटर अतिरिक्त वर्षा जल तालाबों में संग्रहित किया गया। यह उपलब्धि गुरुग्राम में वर्षा जल संरक्षण और बेहतर मानसून प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में सामने आई है।
जलभराव कम करने में भी मददगार साबित हो रही पोंड रिवाइवल व्यवस्था
तालाबों को जलभराव संभावित क्षेत्रों से जोड़ने से बारिश के पानी को सीधे तालाबों की ओर डायवर्ट करने में मदद मिली। इससे एक ओर जहां वर्षा जल का संरक्षण हुआ, वहीं दूसरी ओर सड़कों एवं निचले क्षेत्रों में जमा होने वाले पानी को नियंत्रित करने में भी सहायता मिली।
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि तालाबों का पुनर्जीवन गुरुग्राम के बेहतर वर्षा जल प्रबंधन और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मानसून से पहले किए गए गहरीकरण, डी-वाटरिंग और जलभराव संभावित क्षेत्रों से कनेक्टिविटी के कार्यों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आगे भी तालाबों की क्षमता बढ़ाने और वर्षा जल को अधिक से अधिक तालाबों में संग्रहित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को तालाबों की स्थिति की नियमित निगरानी करने तथा जहां आवश्यक हो वहां गहरीकरण, डी-सिल्टिंग, जल निकासी कनेक्टिविटी और अन्य सुधारात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
तालाबों के संरक्षण पर लगातार बढ़ रहा फोकस
एमसीजी द्वारा तालाबों की पहचान, विकास, सीमांकन, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई तथा जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। उपलब्ध इन्वेंटरी के अनुसार निगम क्षेत्र में कुल 140 तालाब चिन्हित हैं, जबकि एमसीजी, ग्राम पंचायत और एमसीजी/एचएसवीपी से संबंधित 112 तालाबों में से 30 विकसित, 21 विकासाधीन और 61 अविकसित हैं। पोंड रिवाइवल के माध्यम से वर्षा जल संरक्षण, जलभराव नियंत्रण और गुरुग्राम की जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एमसीजी के प्रयास लगातार जारी हैं।








