राव इंद्रजीत और विरोधी खेमे के बीच खिंची तलवारें अब म्यान में लौटने वाली नहीं
कांग्रेस की गतिविधियां मीडिया और फोटो आयोजनों तक सीमित, जनसमस्याओं पर जमीनी संघर्ष का अभाव
रेवाडी, 18 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने दावा किया है कि अहीरवाल क्षेत्र में भाजपा का आंतरिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बावल में मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री के कार्यक्रम से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह तथा उनके समर्थकों की दूरी के बाद शुरू हुआ राजनीतिक घमासान 14 अगस्त को गुरुग्राम में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में चरम पर पहुंच गया।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में राव इंद्रजीत सिंह द्वारा बिना नाम लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर पर किए गए राजनीतिक प्रहार से पार्टी की गुटबाजी और बढ़ेगी। इसका सबसे अधिक प्रभाव अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति पर पड़ना तय है।
उन्होंने कहा कि राव इंद्रजीत सिंह के समर्थकों, उनके विरोधी खेमे और मनोहर लाल खट्टर के बीच खिंची राजनीतिक तलवारें अब आसानी से म्यान में लौटने वाली नहीं हैं। इस संघर्ष में कौन विजेता बनेगा, इसका फैसला वर्ष 2029 में जनता करेगी, लेकिन यह तय है कि अहीरवाल में भाजपा का आंतरिक संघर्ष अगले चुनाव तक जारी रहेगा।
भाजपा के संघर्ष का लाभ नहीं उठा पा रही कांग्रेस
विद्रोही ने कहा कि भाजपा का आंतरिक संघर्ष अहीरवाल में कांग्रेस के लिए राजनीतिक अवसर बन सकता था, लेकिन क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति इतनी लचर है कि वह इस अवसर का लाभ उठाकर अपना जनाधार और स्वीकार्यता बढ़ाने में असमर्थ दिखाई दे रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अहीरवाल में कांग्रेस अपने संगठन, परिश्रम और जनसंघर्ष के बल पर आगे बढ़ने के बजाय भाजपा की असफलताओं के सहारे किसी राजनीतिक चमत्कार की प्रतीक्षा कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और संगठन सृजन अभियान के तहत जिला एवं ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों के बाद मीडिया तथा फोटो आयोजनों की हलचल तो बढ़ी है, लेकिन जमीनी स्थिति में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन दिखाई नहीं देता।
जनसमस्याओं पर सड़क का संघर्ष नदारद
विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस नेता अभी तक मीडिया बयानों और फोटो आयोजनों तक सीमित हैं। गांवों, शहरों और कस्बों में आम लोगों से सीधा संवाद करने तथा उनकी समस्याओं को लेकर संघर्ष करने की इच्छाशक्ति दिखाई नहीं दे रही।
उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दो वर्ष बाद भी कांग्रेस ने अहीरवाल की किसी बड़ी जनसमस्या को लेकर न तो प्रभावी आंदोलन किया और न ही मजबूती से आवाज उठाई। कांग्रेस की कमजोर रणनीति और सड़क पर संघर्ष करने में विफलता के कारण ही अहीरवाल में भाजपा आंतरिक विवादों के बावजूद राजनीतिक रूप से कमजोर नहीं हो पा रही है।








