गुरुग्राम की अदालत ने एक शिकायत पर पुलिस से मांगी स्थिति रिपोर्ट, दूसरी रिवीजन याचिका में प्रतिवादियों को नोटिस
अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया ने अधिकारियों पर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या कर वाहन मालिकों को नुकसान पहुंचाने का लगाया आरोप

गुरुग्राम, 16 अगस्त। दिल्ली-एनसीआर में 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों पर लागू प्रतिबंध को लेकर कानूनी विवाद तेज हो गया है। अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया द्वारा दायर दो अलग-अलग मामलों में गुरुग्राम की मजिस्ट्रेट और सत्र अदालत ने प्रारंभिक आदेश जारी किए हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जसमीत सिंह की अदालत ने आपराधिक शिकायत संख्या कोमी-607/2026 में संबंधित थाना प्रभारी अथवा जांच अधिकारी से शिकायत में लगाए गए आरोपों पर कार्रवाई रिपोर्ट/स्थिति रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी।
अदालत के 4 अगस्त 2026 के आदेश के अनुसार इस शिकायत का शीर्षक “मुकेश कुल्थिया बनाम नवदीप सिंह विर्क आईपीएस आदि” है। आदेश में अदालत ने अभी आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी अधिकारी को आरोपी मानते हुए तलब किया है।
रिवीजन याचिका में 13 अक्टूबर की तारीख

एक अन्य मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने आपराधिक रिवीजन याचिका संख्या सीआरआर-453/2026, शीर्षक “मुकेश कुल्थिया बनाम अंकित कुमार एवं अन्य”, को जांच एवं पंजीकरण के लिए स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही निचली अदालत का रिकॉर्ड भी तलब किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
यहां स्पष्ट करना आवश्यक है कि अदालत द्वारा रिवीजन याचिका का नोटिस जारी करना किसी अधिकारी को अपराध का दोषी ठहराना अथवा आपराधिक मुकदमे में आरोपी के रूप में समन करना नहीं है। प्रतिवादियों का पक्ष सुने जाने के बाद अदालत आगे का निर्णय करेगी।
अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
भारत सारथी से बातचीत में अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया ने दावा किया कि दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लागू करने के दौरान विभिन्न केंद्रीय और हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने कानून तथा न्यायिक आदेशों की गलत व्याख्या की।
कुल्थिया के अनुसार उनकी शिकायतों में विभिन्न समय पर परिवहन विभाग तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में पदस्थ रहे अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। इनमें नवदीप सिंह विर्क आईपीएस, अंकित कुमार चौकसे आईएएस, वरिंदर शर्मा, यशेंदर सिंह आईएएस, अरामने गिरधर आईएएस, अलका उपाध्याय आईएएस और अनुराग जैन आईएएस सहित अन्य अधिकारियों के नाम बताए गए हैं।
हालांकि, संलग्न संक्षिप्त आदेशों में सभी अधिकारियों के नाम दर्ज नहीं हैं। उनकी सही स्थिति का निर्धारण मूल शिकायत, रिवीजन याचिका और पक्षकारों की पूर्ण सूची देखने के बाद ही किया जा सकता है।
अधिवक्ता ने बताया ‘कारबंदी स्कैम’
अधिवक्ता कुल्थिया ने इस व्यवस्था को कथित “कारबंदी स्कैम” बताते हुए आरोप लगाया कि वाहन मालिकों को समय से पहले अपने वाहन कबाड़ में देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि देश के सामान्य मोटर वाहन नियमों में निजी वाहन का प्रारंभिक पंजीकरण 15 वर्ष के लिए होता है और इसके बाद निर्धारित जांच एवं शर्तों के अधीन पांच-पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण का प्रावधान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि फिटनेस और वास्तविक प्रदूषण स्तर की जांच के स्थान पर केवल वाहन की आयु को आधार बनाकर कार्रवाई करने से आम नागरिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने इसके पीछे इलेक्ट्रिक वाहन और वाहन स्क्रैप उद्योग को लाभ पहुंचाने की आशंका भी जताई है।
ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। संबंधित अधिकारियों अथवा सरकार का पक्ष उपलब्ध नहीं हो पाया है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अदालत ने अभी आरोप प्रमाणित नहीं किए हैं। एक मामले में केवल पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि दूसरे में रिवीजन याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस दिया गया है।








