विभाजन विभीषिका दिवस के बहाने आजादी के जश्न को धूमिल कर रही भाजपा : विद्रोही

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प्रधानमंत्री से पूछा—आरएसएस का पंजीकरण कब और कहां हुआ, वर्षों तक मुख्यालय पर तिरंगा क्यों नहीं फहराया गया

रेवाडी, 16 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाकर भाजपा ने आजादी के उत्सव को शोक और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदलने का प्रयास किया।

विद्रोही ने सवाल किया कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शोक दिवस मनाने वाले क्या वास्तव में आजादी के मूल्यों का सम्मान कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी के नाम पर स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका पर सवाल उठाना उनके योगदान के प्रति कृतघ्नता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा देश के विभाजन के लिए कांग्रेस और विशेष रूप से प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराना इतिहास को एकतरफा ढंग से प्रस्तुत करना है। विभाजन जैसी जटिल ऐतिहासिक घटना के लिए केवल कांग्रेस नेतृत्व को दोषी ठहराना तथ्यों के साथ खिलवाड़ है।

सावरकर के 1937 के वक्तव्य का दिया हवाला

विद्रोही ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर ने वर्ष 1937 में अहमदाबाद में आयोजित हिंदू महासभा के अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए हिंदुओं और मुसलमानों को दो अलग-अलग राष्ट्र बताया था। बाद में मुस्लिम लीग ने वर्ष 1940 में लाहौर प्रस्ताव पारित किया। इसलिए विभाजन के लिए केवल कांग्रेस और नेहरू को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

उन्होंने हिंदू महासभा तथा तत्कालीन बंगाल की गठबंधन राजनीति में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ऐतिहासिक घटनाओं के चुनिंदा हिस्सों को सामने रखकर राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर रही है।

आरएसएस की प्रशंसा पर प्रधानमंत्री से सवाल

विद्रोही ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रशंसा करना और उसे विश्व का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बताना कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि यदि आरएसएस गैर-सरकारी संगठन है तो उसका पंजीकरण कब, कहां और किस कानून के तहत हुआ? आरएसएस के नागपुर मुख्यालय पर कई दशकों तक नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज क्यों नहीं फहराया गया? स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान संघ की भूमिका क्या रही और उसके तत्कालीन नेतृत्व ने तिरंगे एवं संविधान को लेकर क्या विचार व्यक्त किए थे?

विद्रोही ने कहा कि प्रधानमंत्री को इन सवालों का तथ्यात्मक एवं सार्वजनिक उत्तर देना चाहिए। स्वतंत्रता आंदोलन, विभाजन और संविधान से जुड़े विषयों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने के बजाय देश के सामने संपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य रखे जाने चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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