सरकार वर्तमान महंगाई दर के हिसाब से MPLADS राशि की न्यायसंगत समीक्षा करे, इसे बढ़ाकर कम से कम दोगुना करे – दीपेन्द्र हुड्डा

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दीपेन्द्र हुड्डा ने लोकसभा में पूछा — जब महंगाई और विकास कार्यों की लागत बढ़ी, तो सांसदों की MPLADS राशि क्यों नहीं?

कांग्रेस सरकार के दौरान MPLADS राशि बढ़ाई गई थी लेकिन बीजेपी सरकार ने एक पैसा नहीं बढ़ाया – दीपेन्द्र हुड्डा

15 साल में निर्माण लागत कई गुना बढ़ी, लेकिन सांसदों को विकास के लिए मिलने वाली राशि ₹5 करोड़ पर ही अटकी – दीपेन्द्र हुड्डा

संसद में सरकार ने 2030-31 तक सांसद निधि बढ़ाने से किया इनकार

चंडीगढ़, 23 जुलाई। लोकसभा में सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब ने केंद्र सरकार के विकास विरोधी रवैये को उजागर कर दिया है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने सवाल उठाया कि 2011-12 के बाद से महंगाई और निर्माण कार्यों की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद सरकार सांसदों के सालाना ₹5 करोड़ के स्थानीय विकास फंड में बढ़ोतरी क्यों नहीं कर रही है? कांग्रेस सरकार के दौरान MPLADS राशि बढ़ाई गई थी लेकिन बीजेपी सरकार ने एक पैसा नहीं बढ़ाया। 2011-12 में जितने पैसों में तीन गालियां बन जाती थी, उतने पैसों में आज एक गली बन पाना भी मुश्किल है। MPLADS ग्रांट में निर्माण लागत को देखकर उसी अनुपात में बढ़ाया जाए। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि केंद्र सरकार तुरंत वर्तमान महंगाई दर के हिसाब से एमपीलैड्स (MPLADS) राशि की न्यायसंगत समीक्षा करे और इसे बढ़ाकर कम से कम दोगुना करे, ताकि देश के हर संसदीय क्षेत्र की जनता को सही मायने में स्थानीय विकास का लाभ मिल सके।

उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या जनता की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस राशि की समीक्षा की गई है और क्या भविष्य में इसे बढ़ाने की कोई समयबद्ध कार्ययोजना है? जिसके जवाब में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक सांसदों की वार्षिक निधि ₹5 करोड़ ही रहेगी। इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी कहा कि इस आवंटन को बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि 2011 से लेकर अब तक सीमेंट, सरिया, ईंट और मजदूरी कई गुना बढ़ चुके हैं। 2011 में 5 करोड़ रुपये में जितने स्कूल, अस्पताल, सड़कें या पेयजल परियोजनाएं बनती थीं, आज उसकी आधी भी नहीं बन पातीं। इसके बावजूद विकास निधि को 2030-31 तक के लिए फ्रीज करना जनता के साथ छलावा है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सरकार बढ़ती महंगाई और जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ रही है। सांसद निधि जनता से सीधे जुड़े मुद्दों—जैसे स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल आदि कार्यों से जुड़ी होती है। 15 साल पुराने बजट को आज के महंगाई के दौर में जारी रखना आम लोगों के विकास अधिकारों पर अंकुश लगाने जैसा है।  

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Author: Bharat Sarathi

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