चंडीगढ़, 17 सितंबर । पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि यूपीआई भुगतान पर लगने वाली फीस आदमी पर महंगाई की नई चोट है। बीजेपी सरकार जनता को गुमराह करने के लिए कह रही है कि इससे ग्राहक पर बोझ नहीं आएगा। जबकि सच्चाई ये है कि जब-जब मर्चेंट फीस लगती है तो उसका बोझ हमेशा ग्राहक पर ही पड़ता है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उदाहरण दिया कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स और तमाम फीस का भुगतान कभी तेल कंपनियां नहीं करती, उनका भुगतान आखिरकार ग्राहकों को ही करना पड़ता है। इसलिए आम जनता को तेल पर 40-50 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। इसी तरह पंप वाले कार्ड से भुगतान पर खुद शुल्क नहीं देते, उसे ‘फ्यूल सरचार्ज’ के नाम से ग्राहक से वसूल लेते हैं।
ज्वेलर्स बैंकों को दिए जाने वाले डेढ़-दो प्रतिशत एमडीआर की भरपाई के लिए बिल में ‘कार्ड सरचार्ज’ जोड़ देते हैं। आईआरसीटीसी, सिनेमा हॉल और ट्रेवल ऐप पेमेंट गेटवे का चार्ज ‘कन्वीनिएंस फीस’ कहकर यात्री से ले लेते हैं। कई दुकानदार छोटे बिल पर कार्ड लेने से मना कर देते हैं ताकि प्रोसेसिंग खर्च बच जाए और ग्राहक को ज्यादा खरीदारी करने पर मजबूर होना पड़ता है। रेस्तरां और बड़े स्टोर एमडीआर सीधे बिल में जोड़ना गैर-कानूनी होने के बावजूद 5 प्रतिशत ‘सर्विस चार्ज’ लगाकर वही पैसा ग्राहक से निकाल लेते हैं।
यही हाल यूपीआई फीस का भी होगा। व्यापारी और बड़े मर्चेंट यह 0.4 प्रतिशत या अधिकतम 300 रुपये बिल में जोड़ देंगे। स्कूल-कॉलेज फीस, राशन, दवा, कपड़ा और रोजमर्रा की खरीद महंगी हो जाएगी। छोटे व्यापारियों को एक लाख रुपये तक की छूट का दावा कागजी है। क्योंकि उनके पास जो सामान पीछे से आएगा, उसके रेट में पहले से ही यूपीआई भुगतान की फीस जुड़ चुकी होगी। यानी वो सामान ग्राहकों को भी महंगा मिलेगा।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि डिजिटल इंडिया का नारा देने वाली सरकार अब उसी व्यवस्था पर टैक्स लगा रही है, जिसे आम आदमी ने इसलिए अपनाया था कि वह मुफ्त है। लेकिन अब उस व्यवस्था पर फीस थोपना जनता के साथ सीधा धोखा है। कांग्रेस मांग करती है कि यह फीस तुरंत वापस ली जाए। सरकार को आम आदमी पर महंगाई की मार मारने के नए-नए तरीके इजाद करने की बजाए, उसे राहत देने के रास्ते तलाशने चाहिए।








