प्रदूषण फैलाने वाले डेवलपरों पर सख्ती की तैयारी; 41 परिसरों को नोटिस, 14 करोड़ का जुर्माना
गुरुग्राम, 17 सितंबर। गुरुग्राम में ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, लाइसेंस्ड कॉलोनियों और कॉमर्शियल परिसरों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन को लेकर गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने सख्त रुख अपनाया है। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री पीसी मीणा ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों के तहत एसटीपी चालू नहीं करने वाले परिसरों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई के साथ-साथ जीएमडीए भी सीवरेज कनेक्शन काटने की कार्रवाई करेगा।
ये आदेश श्री मीणा ने वीरवार को एनएचएआई, जीएमआरएल, एचएसआईआईडीसी, नगर निगम गुरुग्राम व मानेसर, जिला प्रशासन, एचएसवीपी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बिजली निगम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। बैठक में एसटीपी की स्थिति, शोधित पानी की गुणवत्ता और मानसून के दौरान कुछ परिसरों द्वारा सीवरेज का पानी खुले में सड़कों पर छोड़ने के मामलों पर चर्चा हुई।
सीईओ ने कहा कि जीएमडीए जल्द ही आरडब्ल्यूए और डेवलपरों के साथ बैठक करेगा। इसमें उन्हें एसटीपी लगाने और संचालित करने से संबंधित नियमों की जानकारी देने के साथ स्पष्ट रूप से सचेत किया जाएगा कि निर्धारित समय में एसटीपी चालू नहीं किया गया तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जुर्माना लगाएगा और जीएमडीए सीवरेज कनेक्शन काट देगा।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान कुछ सोसायटियों द्वारा सीवरेज का पानी सड़कों पर खुले में छोड़े जाने से आम लोगों को परेशानी हुई और पर्यावरण भी प्रभावित हुआ। सोसायटियों और डेवलपरों की भी जिम्मेदारी है कि वे शहर के इकोसिस्टम को बेहतर बनाए रखने में सहयोग करें।
41 परिसरों में एसटीपी बंद मिले , 14 करोड़ का जुर्माना
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि गुरुग्राम नार्थ में 175 और गुरुग्राम साउथ में 179 परिसरों में एसटीपी होना अनिवार्य है। इनमें नार्थ के 33 और साउथ के 8 परिसरों में एसटीपी चालू नहीं पाए गए। इन सभी को नोटिस जारी कर जुर्माना लगाया गया है। नार्थ गुरुग्राम में करीब 14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 4 करोड़ रुपये की राशि रिकवर भी की जा चुकी है।
श्री मीणा ने निर्देश दिए कि जिन डेवलपरों पर जुर्माना बकाया है, उन्हें जुर्माना राशि जमा होने तक उनके अन्य प्रोजेक्टों के लिए कंसेंट या अनुमति नहीं दी जाए।
15 परिसरों में एसटीपी की होगी अचानक जांच
सीईओ ने जीएमडीए के कार्यकारी अभियंताओं श्री ईशान, श्री विभोर और श्री विक्रम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ मिलकर एसटीपी संचालित होने का दावा करने वाले परिसरों में से 15 परिसरों की आकस्मिक जांच करने के निर्देश दिए। इन परिसरों में शोधित पानी के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट सीधे सीईओ को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि एसटीपी की गुणवत्ता की बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड ) के आधार पर रैंकिंग भी की जाएगी, ताकि अच्छे और खराब प्रदर्शन करने वाले एसटीपी की पहचान हो सके।
एक भी सैंपल फेल हुआ तो एजेंसी होगी ब्लैकलिस्ट
जीएमडीए के अपने एसटीपी के शोधित पानी की भी नियमित जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। श्री मीणा ने कहा कि जिस एजेंसी के पास किसी एसटीपी के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी है, उसके शोधित पानी का एक भी सैंपल निर्धारित मानकों पर फेल पाया गया तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि जीएमडीए के एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड पानी की महीने में दो बार जांच की जाती है। श्री मीणा ने निर्देश दिए कि भविष्य में इन जांचों की रिपोर्ट सीधे उनके पास भेजी जाए।
बैठक में गुरुग्राम के उपायुक्त श्री उत्तम सिंह, अधीक्षण अभियंता आर एस जांगड़ा, बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता श्री मनोज यादव व श्री श्यामबीर सैनी, एचएसवीपी के संपदा अधिकारी श्री राकेश सैनी भी उपस्थित रहे जबकि एचएसआई आई डी सी के प्रबंध निदेशक श्री विनय प्रताप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े ।








