नायब सैनी सरकार में कागज़ों पर है MSP, मंडियों में किसानों की फसल का नहीं मिल रहा भाव : रणदीप सिंह सुरजेवाला

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हरियाणा के किसानों को भाजपा दे रही है लगातार “धोखे के घाव”,नायाब सरकार की “जानबूझकर ओढ़ी चुप्पी” ने किसानों को बर्बाद किया।

धान और बाजरा उत्पादक भुगत रहे हैं प्रति एकड़ ₹12,000 तक का भारी नुकसान।

धान की MSP ₹2,441 घोषित, मगर मंडियों में ₹2,100 में पिट रही फसल; सरकार की खरीद नीति पूरी तरह फेल।

बाजरे की ₹2,900 की MSP के मुकाबले किसान ₹2,000 में बेचने को मजबूर, प्रति क्विंटल ₹900 की लूट जारी; भावांतर मिलेगा या नहीं, सरकार मौन।

चंडीगढ़, 17 सितंबर 2026 – कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज एक कड़ा बयान जारी करते हुए हरियाणा की नायाब सिंह सैनी सरकार पर अन्नदाताओं के साथ क्रूर मजाक करने और उन्हें निजी व्यापारियों के हाथों लुटवाने का सीधा आरोप लगाया है। सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार हरियाणा के किसानों को लगातार “धोखे के घाव” दे रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) केवल कागज़ों और विज्ञापनों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अनाज मंडियों में किसानों की गाढ़े पसीने की फसल का कोई कद्रदान नहीं है।

सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,441 प्रति क्विंटल और ए-ग्रेड धान के लिए ₹2,461 प्रति क्विंटल तय किया गया है। लेकिन इंद्री, तरावड़ी, नीलोखेड़ी और असंध जैसी बड़ी अनाज मंडियों में मोटा धान ₹2,100 प्रति क्विंटल के भाव पर पिट रहा है। किसान सरकारी खरीद न होने के कारण निजी एजेंसियों के रहमों-करम पर हैं, जो मनमर्जी के रेट लगा रहे हैं।उन्होंने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि पूसा 1509 और पूसा 1692 जैसी अगेती किस्मों का भाव, जो इस महीने की शुरुआत में ₹4,200 प्रति क्विंटल तक था, वह आवक बढ़ने के साथ अब गिरकर ₹3,500 प्रति क्विंटल पर आ गया है। इस भारी गिरावट और सरकारी खरीद की सुस्ती की वजह से किसानों को प्रति एकड़ करीब ₹12,000 का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। धान के किसान 15 सितंबर से ही सरकारी खरीद शुरू करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन नायाब सरकार “धोखे की मंडी” सजाकर मूकदर्शक बनी बैठी है। सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से प्रस्तावित बताकर किसान को निजी हाथों में लुटने को छोड़ दिया है।

बाजरे की फसल का जिक्र करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने इस बार बाजरे की MSP ₹2,900 प्रति क्विंटल तय की है, लेकिन मंडियों में आवक शुरू होते ही अफरा-तफरी का माहौल है। बाजार में बाजरा ₹2,000 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। यानी किसानों को सीधे तौर पर ₹900 प्रति क्विंटल का घाटा दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री नायाब सैनी की “जानबूझकर ओढ़ी चुप्पी” पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ मिलेगा या फिर सरकारी खरीद की जाएगी। इस असमंजस के कारण आढ़ती भी बाजरे की खरीद से हाथ पीछे खींच रहे हैं और किसान अपनी तैयार फसल को लेकर मंडियों में दर-दर भटक रहा है।

सुरजेवाला ने सरकार की प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करते हुए कहा कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल किसानों के लिए जी का जंजाल बन चुका है। प्रदेश में करीब 24 लाख एकड़ धान का रजिस्ट्रेशन तो हुआ है, लेकिन 4.63 लाख एकड़ का मिलान (वेरिफिकेशन) ही नहीं हो पाया है। जिन किसानों का मिलान नहीं हुआ, उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जा रहा है।इसके साथ ही, राइस मिलर्स के साथ भी सरकार का तालमेल पूरी तरह ध्वस्त है। मिलिंग चार्ज बढ़ाने की मांग को लेकर 81% मिलर्स ने एग्रीमेंट ही नहीं किया है। कुल 1,458 मिलर्स में से केवल 280 मिलर्स ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। इस गतिरोध के कारण आने वाले दिनों में धान की खरीद और उठान में भारी संकट खड़ा होना तय है, जिसके लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार जिम्मेदार है।

हरियाणा के किसान मजदूर की ओर से हमारी कांग्रेस पार्टी की मांगें:-

1. बाजरे की खरीद का सरकारी आदेश आज जारी हो – ₹2900 MSP पर तुरंत खरीद शुरू हो या ₹900 प्रति क्विंटल भावांतर भरपाई 72 घंटे में खाते में डाले जाएं।

2. पीआर धान की सरकारी खरीद तुरंत शुरू की जाए, 1 अक्टूबर का तुगलकी फरमान वापस लो।

3. मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल का 4.63 लाख एकड़ का मिलान तुरंत ठीक किया जाए।

4. भाजपा सरकार अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राइस मिलर्स के साथ तालमेल सुदृढ़ करें ताकि मंडियों में खरीद व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

सुरजेवाला ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि हरियाणा के किसान मुसीबत और कर्ज के दलदल में धंसते जा रहे हैं, खेती-किसानी बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है, लेकिन “जुमलों का खलिहान” खड़ा करने वाले मुख्यमंत्री श्रीमान नायाब सैनी अपने प्रदेश की जिम्मेदारी से भागकर, पड़ोसी राज्य पंजाब में “झूठे और खोखले वादों की खेती” करने में व्यस्त हैं। उन्हें अपने राज्य के किसानों के आंसू दिखाई नहीं दे रहे हैं। सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार अन्नदाता के सब्र का इम्तिहान न ले और तुरंत प्रभाव से सभी मंडियों में MSP पर पुख्ता खरीद व उठान की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

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Author: Bharat Sarathi

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