— आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ‘महेश’, पानीपत

पानीपत, 19 जुलाई। आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ‘महेश’ ने कहा है कि इस वर्ष 22 जुलाई को पड़ने वाली भडली नवमी पर सामान्यतः माने जाने वाले स्वयं सिद्ध मुहूर्त के बावजूद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन एवं अन्य मांगलिक संस्कारों के शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं हैं। इसका प्रमुख कारण देवगुरु बृहस्पति का अस्त होना है।
उन्होंने बताया कि जब तक पंचांग के नियमन और वैदिक सिद्धांतों को सही रूप में नहीं समझा जाएगा, तब तक यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का अपेक्षित शुभ फल प्राप्त नहीं हो सकता।
आचार्य शर्मा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल नवमी, जिसे भडली नवमी कहा जाता है, की अधिष्ठात्री देवी सिद्धिदात्री हैं और इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यदि अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हों तो इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विजयादशमी के विजय मुहूर्त तथा दीपावली के प्रदोष काल को भी विशेष अवसर माना जाता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष देवगुरु बृहस्पति 15 जुलाई से 9 अगस्त तक अस्त हैं। हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से उनका वृद्धत्व काल 12 जुलाई से प्रारंभ हो चुका था, जिसके कारण 11 जुलाई के बाद कई दिनों तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं रहा। इसी प्रकार 9 अगस्त को उदय होने के बाद भी 12 अगस्त तक बृहस्पति का बालत्व काल रहेगा।
आचार्य शर्मा ने कहा कि 13 अगस्त 2026 को बालत्व काल समाप्त होने के बाद ही वैदिक परंपरा के अनुसार विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन तथा अन्य सभी मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त पुनः प्रारंभ होंगे। इसलिए 22 जुलाई की भडली नवमी पर स्वयं सिद्ध मुहूर्त लागू नहीं माना जाएगा और उस दिन इन कार्यों का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस विषय की पुष्टि संवत् 2083 (2026-27) के किसी भी प्रमाणिक पंचांग के अवलोकन से की जा सकती है।









