संत कबीर मानव मात्र के मार्गदर्शक, सामाजिक चेतना के अग्रदूत – मुख्यमंत्री

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कबीर का ज्ञान किताबी नहीं, जीवन की भट्टी में तपा हुआ अनुभव 

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कबीर के अंतिम यात्रा स्थल मगर को एक हजार करोड़ रुपए की लागत से किया विकसित- केंद्रीय मंत्री

चण्डीगढ, 28 जून – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि संत कबीर मानव मात्र के सबसे बड़े मार्गदर्शक, सामाजिक चेतना के अग्रदूत और अद्भुत संत हुए हैं, उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करें।

मुख्यमंत्री निज निवास संत कबीर कुटीर पर आयोजित संत कबीर जयंती के पावन अवसर पर आयोजित संध्या कार्यक्रम में नागरिकों को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने संत शिरोमणि कबीर दास के चरणों में नमन करते हुए प्रदेशवासियों को संत कबीर जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष संत कबीर जयंती राज्य स्तर पर भिवानी में मनाई जायेगी।

 इस अवसर पर पद्मश्री  प्रहलाद सिंह टिपनिया ने कबीर वाणी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि सदियों पहले संत कबीर के समय के भारत की कल्पना करते हैं, तो हमें एक  रूढ़ियों, अंधविश्वासों, जात-पात की दीवारों और बाहरी आडंबरों में जकड़ा हुआ समाज दिखाई देता था। ऐसे समय में, जब समाज वैचारिक अंधकार में डूबा हुआ था, तब काशी की  धरती पर ऐसी महान ज्योति प्रकट हुई, जिसने अपनी वाणी और कर्म के माध्यम से पूरे समाज को राह दिखाई।

कबीर भारतीय संस्कृति की सर्वधर्म समभाव, वसुधैव कुटुम्बकम परम्परा के संवाहक

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर भारतीय संस्कृति की सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुम्बकम परम्परा के संवाहक और इतिहास के अनमोल रत्न थे। उन्होंने किसी भी धर्म, सम्प्रदाय और जाति की परवाह किए बिना खरी खरी बात कहीे। 

संत शिरोमणि कबीर दास का जीवन सत्य की खोज और असत्य के निर्भीक खंडन में बीता। वे बाहरी दिखावे से दूर, भीतर के प्रकाश के साधक थे। संत कबीर दास का व्यक्तित्व साधारण नहीं था। वे फक्कड़, बेबाक और सत्य के पक्षधर थे। उन्होंने जन्म से नहीं, अपने कर्म से वंदनीय स्थान प्राप्त किया। वे अपने समय के सबसे साहसी समाज-सुधारक थे। उन्होंने सभी धर्मों की कुरीतियों और रूढ़ियों पर कड़ी चोट की।

संत कबीर ने जाति के बंधनों को तोड़ा और सामान्य ग्रामीण भारतीय की भाषा बोली। संत कबीर दास ने सर्वधर्म समभाव का संदेश देते हुए   सबको समान माना। उनके इसी संदेश के अनुरूप प्रधानमंत्री ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास का मूल मंत्र दिया है। इसी मूल मंत्र पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा एक-हरियाणवी एक की भावना से लागू की गई सरकार की हर योजना, हर नीति, हर निर्णय में संत कबीर दास   की भावना और उनका स्वाभिमान बसता है।

संत कबीर दास जैसे संत-महात्माओं, ऋषि-मुनियों, पीर-पैगम्बरों और गुरुओं ने भूली-भटकी मानवता को जीवन का सच्चा रास्ता दिखाया है। ऐसी महान विभूतियों की शिक्षाएं पूरे मानव समाज की धरोहर हैं। उनकी विरासत को संभालने व सहेजने की जिम्मेदारी हम सबकी है। इसी के अनुरूप हम संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के तहत संतों व महापुरुषों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

संत कबीर के प्रति श्रद्धा निज निवास का नाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए निज निवास का नाम भी संत कबीर कुटीर रखा है। यह संत परंपरा, लोक मंगल और जनसेवा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। संत कबीर कुटीर उन्हें शासन का प्रत्येक निर्णय जनहित, जनसेवा और पारदर्शिता की भावना से लेने के लिए निरंतर प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस 21वीं सदी में जहां तकनीक और आधुनिकता तेजी से बढ़ रही है, वहीं कहीं न कहीं मानवीय मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं। आज के इस दौर में हमारे युवाओं को संत कबीर के विचारों से जोड़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि संत कबीर दास की बात का कोई भी बुरा नहीं मानता था। वे सबके हृदय में समाए हुए थे और सब उन पर अपना अधिकार मानते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर अपने महान विचारों के कारण युगों-युगों तक हमारे मन में जीवित रहेंगे। भेदभाव मुक्त समाज की रचना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल  ने कहा कि संत कबीर ने किसी विश्वविद्यालय में जाकर डिग्री नहीं ली थी। उन्होंने कहा था- मसि कागद छूयो नहीं, कलम गही नहिं हाथ। लेकिन उनके पास किताबी ज्ञान नहीं था। जीवन की भट्टी में तपा हुआ अनुभवी ज्ञान था। उन्होंने किताबी ज्ञान पर चोट करते हुए सीधे शब्दों में कहा था-पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

उन्होंने कहा कि संत कबीर कमल के फूल में प्रकट हुए। 15वीं सदी में पाखण्ड को तोड़ा और सात्विक प्रकृति से जुड़े। उन्होंने जन्म का  मां के गर्भ से लेकर मृत्यु तक की यात्रा का वर्णन किया है। उनके शब्दों में संवेदना मानवीय मूल्यों की बरसात होती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कबीर की अंतिम यात्रा स्थल मगहर उत्तर प्रदेश को एक हजार करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। इसमें सेमिनार आदि आयोजित किए जा रहे हैं।

कबीर संध्या कार्यक्रम में पंचायत मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार , शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा, सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा, कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण  बेदी सहित अन्य विधायकगण व गणमान्य उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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