वानप्रस्थ में सजा यादगार तीज मेला, तीन पीढ़ियों ने लिया भरपूर आनंद

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परंपरागत वस्तुओं की प्रदर्शनी ने ताजा कीं बुजुर्गों की यादें, बच्चों ने उत्सुकता से ली जानकारी

हिसार, 15 अगस्त। वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब में तीज के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य मेले में परंपरा, संस्कृति, मनोरंजन और सामाजिक मेल-जोल का अनूठा संगम देखने को मिला। डॉ. जे.के. डांग, डॉ. सुनीता श्योकंद एवं उनकी टीम द्वारा आयोजित चार घंटे के इस मेले में 200 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मेले में झूले, मेहंदी, चूड़ियों, आकर्षक एसेसरीज, कला, खेल और खान-पान की स्टॉल लगाई गईं। किसी ने झूलों का आनंद लिया तो किसी ने मेहंदी लगवाई और चूड़ियां खरीदीं। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने जीवनसाथी, परिजनों और मित्रों के साथ सेल्फी लेकर यादगार पलों को कैमरे में कैद किया।

खेलों में बुजुर्गों ने भी दिखाया उत्साह

सुनीता मेहतानी एवं उनकी टीम ने डार्ट गेम, कमला सैनी एवं टीम ने ‘रिंग द गिफ्ट’, पुष्पा खरब व स्नेह गोयल की टीम ने जेंगा तथा पूनम कुंडू और संतोष ढिल्लों की टीम ने हैंड कोऑर्डिनेशन गेम आयोजित किया। इन खेलों में बच्चों के साथ वरिष्ठ सदस्यों ने भी उत्साह से भाग लिया।

खान-पान की स्टॉल पर इंदु गेहलावत की स्वादिष्ट खीर और आशा कटारिया का घर में तैयार अचार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लोगों ने दोनों व्यंजनों की खूब सराहना की। रेनू की मंडला कलाकृतियों तथा ज्योति बैग हाउस की बैग और बेडशीट की स्टॉल पर भी अच्छी-खासी भीड़ रही।

पुरानी वस्तुओं ने ताजा कीं यादें

मेले की सबसे अनूठी प्रस्तुति पुरानी वस्तुओं की प्रदर्शनी रही। युवा पीढ़ी को पारंपरिक जीवनशैली और संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से लगाई गई प्रदर्शनी में चरखा, हुक्का, चक्की, बाजरा कूटने वाला मूसल-मूसली, पीढ़ी, परांत, टौकनी और पीतल की कढ़ाई सहित अनेक वस्तुएं प्रदर्शित की गईं।

इन वस्तुओं को देखकर वरिष्ठ नागरिकों की पुरानी यादें ताजा हो गईं, जबकि बच्चों और युवाओं ने उत्सुकता से इनके उपयोग की जानकारी प्राप्त की।

लोकगीतों और नृत्य ने बांधा समां

सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिला सदस्यों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। क्लब सदस्यों ने तीज और लोक संस्कृति पर आधारित गीत सुनाकर वातावरण को संगीतमय बना दिया। भूतपूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रत्ना भारत की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

डॉ. जे.के. डांग ने बताया कि मेले की सबसे बड़ी विशेषता तीनों पीढ़ियों—बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों—की सहभागिता रही। यह आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति, आत्मीयता और सक्रिय वरिष्ठ जीवन का उत्सव बन गया। चार घंटे तक चले मेले से सभी प्रतिभागी तीज की खूबसूरत यादें लेकर लौटे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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