कांग्रेस विधायकों को खरीदने और एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप, कहा—भाजपा धनतंत्र और फासिज्म में विश्वास करती है

चंडीगढ़/रेवाडी, 6 मार्च। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भाजपा ने हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में अपने एक धन्नासेठ नेता सतीश नांदल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारकर फिर साबित कर दिया है कि उसे लोकतंत्र, लोकतांत्रिक परंपराओं, शुचिता और ईमानदारी में पैसे भर भी आस्था नहीं है।
विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में भाजपा के 48 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 37 विधायक हैं। ऐसे में दो राज्यसभा सीटों के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के एक-एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय है। उन्होंने कहा कि यह जानते हुए भी यदि कोई दल अपनी संख्या से बाहर जाकर तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारता है तो उसका उद्देश्य दूसरे दल के विधायकों को धनबल से खरीदना, सत्ता का प्रलोभन देना या फिर ईडी-सीबीआई जैसी एजेंसियों के भय का उपयोग करना ही होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने हरियाणा में अपने एक धन्नासेठ को राज्यसभा चुनाव में उतारकर यही संकेत दिया है कि वह चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस विधायकों को खरीदने तथा सत्ता के दुरुपयोग के जरिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल करने की कोशिश करेगी।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा चाहे जितने प्रयास कर ले, वह किसी भी स्थिति में कांग्रेस उम्मीदवार को हराने की हालत में नहीं है। इसके बावजूद इस प्रकार का गैर-लोकतांत्रिक प्रयास लोकतंत्र, शुचिता और ईमानदारी की राजनीति के लिए बड़ा खतरा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा अपने आचरण से स्वयं साबित कर रही है कि उसकी आस्था लोकतंत्र की बजाय धनतंत्र और फासिज्म में है। सत्ता के अहंकार में किए जा रहे ऐसे प्रयासों के बाद भी यदि हरियाणा की जनता भाजपा-संघ के चाल-चरित्र को नहीं समझती और उन्हें राजनीति से बाहर नहीं करती, तो यह प्रदेश के लोकतंत्र के लिए घातक होगा।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा ने अपना फासिस्ट और लोकतंत्र विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। अब हरियाणा की जनता को तय करना है कि वह प्रदेश में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है या फिर लोकतंत्र के नाम पर धनतंत्र और पूंजीपतियों के प्रभाव वाली राजनीति को बढ़ावा देना चाहती है।







