जनमुद्दों पर सरकार का विरोध करना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, लोकतांत्रिक दायित्व भी
रेवाडी, 15 जून 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के मोदी-भाजपा-संघ सरकार की नीतियों के विरोध तथा जनहित के मुद्दे उठाने को विपक्ष की हताशा या देश-विरोध बताना इस बात का संकेत है कि भाजपा की लोकतंत्र और संविधान में वास्तविक आस्था नहीं रही है।
विद्रोही ने कहा कि जिस प्रकार भाजपा को कांग्रेस और विपक्ष की नीतियों की आलोचना करने तथा उनका विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है, उसी प्रकार कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को भी सत्तारूढ़ भाजपा सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और कार्यशैली का विरोध करने का समान अधिकार और दायित्व प्राप्त है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कर्तव्य है कि वह जनहित के मुद्दों को उठाए, आंदोलनों के माध्यम से जनता की आवाज बुलंद करे तथा सरकार को जनविरोधी नीतियों को वापस लेने और जनता की मांगों को स्वीकार करने के लिए बाध्य करे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यह एक सामान्य और स्वस्थ प्रक्रिया है। चाहे भाजपा सत्ता में हो या कांग्रेस, जो भी दल विपक्ष में होगा, उसे सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का विरोध करने का संवैधानिक अधिकार और जनता द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक जनादेश प्राप्त होता है। ऐसे लोकतांत्रिक विरोध को हताशा या गैरसंवैधानिक करार देना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास भी है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के बजाय पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के कुछ निर्णय भी सत्तारूढ़ दल की सुविधा के अनुरूप दिखाई देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में विपक्ष द्वारा सवाल उठाना, विरोध दर्ज कराना और जनमत तैयार करना उसका संवैधानिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सरकार और संवैधानिक संस्थाएं संविधान की भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं लोकतांत्रिक ढंग से कार्य करें। इसके लिए विपक्ष को लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण विरोध, जनजागरण और संसदीय संघर्ष के सभी वैध माध्यमों का उपयोग करना चाहिए।








