‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली’ के मंचन के साथ पंचजन्य नाट्य समारोह सम्पन्न

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देहरादून के कलाकारों ने जीवंत किया पेशावर कांड का गौरवशाली इतिहास, भावुक हुए दर्शक

शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएं युवाओं में भरती हैं राष्ट्रभक्ति की भावना : प्रो. रामपाल सैनी

थानेसर, 22 अगस्त (संजीव कुमारी)। हरियाणा कला परिषद और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र के कला कीर्ति भवन स्थित भरतमुनि रंगशाला में आयोजित पांच दिवसीय ‘पंचजन्य नाट्य समारोह’ का शुक्रवार शाम ऐतिहासिक नाटक ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली’ के मंचन के साथ भव्य समापन हो गया।

समारोह के अंतिम दिन पंचम वेद क्रिएशंस चैरिटेबल ट्रस्ट, देहरादून के कलाकारों ने अपने सधे हुए अभिनय से वर्ष 1930 के ऐतिहासिक पेशावर कांड और उसके महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के साहस, संघर्ष एवं राष्ट्रप्रेम को मंच पर जीवंत कर दिया। नाटक का लेखन प्रसिद्ध नाटककार ललित सिंह पोखरिया और निर्देशन अनुराग वर्मा ने किया।

कार्यक्रम में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलपति प्रो. रामपाल सैनी मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता हरियाणा राज्य भंडारण निगम के अध्यक्ष एडवोकेट रामकिशन शर्मा ने की। हरियाणा कला परिषद के संयुक्त सचिव एवं सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के परियोजना निदेशक डॉ. पवन आर्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।

विभिन्न राज्यों की रंगमंच परम्पराओं से रूबरू हुए दर्शक

कार्यक्रम के प्रारम्भ में हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया और अंगवस्त्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कुरुक्षेत्र के दर्शकों को विभिन्न राज्यों की समृद्ध रंगमंच परम्पराओं से रूबरू करवाने के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा का आभार जताया। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया।

अंग्रेजी हुकूमत के आदेश से बड़ा साबित हुआ देशप्रेम

नाटक में दिखाया गया कि ब्रिटिश सेना में हवलदार मेजर के पद पर तैनात चंद्र सिंह गढ़वाली ने देशप्रेम के आगे अपनी नौकरी और जीवन की भी परवाह नहीं की। अंग्रेजी हुकूमत ने जब खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में अहिंसक आंदोलन कर रहे निहत्थे पठानों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया, तब चंद्र सिंह गढ़वाली ने अपने सैनिक साथियों को गोली नहीं चलाने का निर्देश देकर इतिहास की धारा बदल दी।

नाटक में इस ऐतिहासिक अवज्ञा के बाद चंद्र सिंह गढ़वाली पर चलाए गए कोर्ट मार्शल, कठोर कारावास, जेल की यातनाओं और उनके अटूट देशप्रेम को अत्यंत मार्मिक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया और रंगशाला तालियों से गूंज उठी।

‘रंगमंच समाज और इतिहास का दर्पण’

कुलपति प्रो. रामपाल सैनी ने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और इतिहास का सशक्त दर्पण है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएं युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, नैतिकता और देशसेवा की भावना पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक नाटकों का मंचन शिक्षण संस्थानों में भी किया जाना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी देश के स्वतंत्रता संग्राम और उसके नायकों के त्याग एवं बलिदान से परिचित हो सके।

समारोह के समापन पर हरियाणा कला परिषद की ओर से अतिथियों और कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रतिनिधि मंथन ठाकुर, पूर्व जिला जनसम्पर्क अधिकारी देवराज सिरोहीवाल, विनोद शर्मा, रजनीश गुप्ता, सुरेखा और शिवकुमार किरमिच सहित बड़ी संख्या में रंगप्रेमी उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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