अमीरों को आरक्षण देना गरीबों के साथ अन्याय है : जयहिंद

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आरक्षण पे चर्चा के नाम पे सभी पार्टियां बापू के बंदरों की तरह बनी हुई है : जयहिंद

रोहतक, 22 अगस्त – नवीन जयहिंद ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरक्षण सुधार, आंदोलन पर हुई कार्रवाई, भारी पुलिस बल की मौजूदगी और राजनीतिक दलों की चुप्पी को लेकर सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए।

जयहिंद ने कहा कि आरक्षण सुधार का मुद्दा किसी एक जाति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गरीब और कमजोर व्यक्ति के हक का सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर किसी आरक्षित वर्ग में भी कोई परिवार लगातार पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ ले रहा है और दूसरी तरफ उसी वर्ग के गरीब परिवार के बच्चों को नौकरी तक नहीं मिल रही, तो इस पर चर्चा जरूर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आरक्षण का मतलब ये नहीं कि जो पहले से मजबूत है, वही बार-बार फायदा लेता रहे। जो गरीब है, जिसकी घर में रोटी की दिक्कत है, जिसकी जमीन-जायदाद नहीं है, उसको पहले फायदा मिलना चाहिए।

आरक्षण सुधार पर चर्चा से डर क्यों ? : जयहिंद

जयहिंद ने कहा कि सरकार कोई भी नीति लेकर आती है तो उस पर चर्चा होनी चाहिए। जिन लोगों पर नीति का असर पड़ना है, उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में नेता हर मुद्दे पर बोलते हैं, लेकिन आरक्षण में सुधार की बात आते ही **“सबने जैसे मुंह पर ताला लगा रखा है।

उन्होंने सवाल किया कि अगर शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों से चर्चा तक नहीं की जा सकती और उन्हें रात में उठाकर जेल भेज दिया जाता है, तो फिर लोकतंत्र में चर्चा और विरोध का मतलब क्या रह गया?

क्रिकेट टीम में भी रिजर्वेशन कर दो : जयहिंद

नवीन जयहिंद ने अपने हरियाणवी अंदाज में आरक्षण व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर जाति के आधार पर हर जगह हिस्सेदारी तय करनी है तो फिर क्रिकेट टीम से लेकर हर खेल में भी उसी हिसाब से आरक्षण लागू कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा फिर क्रिकेट टीम में भी रिजर्व कैटेगरी के हिसाब से खिलाड़ी लो, कुश्ती में भी लो, कबड्डी में भी लो, हर जगह कर दो भाई—फिर किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

इसी अंदाज में उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पद को भी जातिगत हिस्सेदारी के हिसाब से बांटने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर यही फार्मूला है तो प्रधानमंत्री का पांच साल का कार्यकाल भी अलग-अलग वर्गों में बांट देना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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