छोटेआइडिया से बड़े उद्यम तक का सफर, युवा उद्यमियों ने सांझा किए सफलता के अनुभव

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*संघर्ष, असफलता, दोबारा शुरुआत और कारोबार के विस्तार की बताई कहानी*

*युवाओं को जोखिम उठाने, लगातार सीखने और नई सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश*

चंडीगढ़, 21 अगस्त- गुरुग्राम में शुक्रवार को आयोजित जेन-एच युवा उद्यमी चौपाल में देश के सफल युवा उद्यमियों और उद्यम संस्थापकों ने अपने सफर के अनुभव युवाओं के साथ सांझा किए। विभिन्न परिचर्चाओं में उद्यमियों ने बताया कि किसी भी बड़े उद्यम की शुरुआत एक छोटे आइडिया से होती है, लेकिन उस आइडिया को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए निरंतर मेहनत, धैर्य, सही दिशा, मजबूत टीम और बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता जरूरी है। उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष से लेकर कारोबार को बड़े स्तर तक पहुंचाने, असफलताओं से सीखने और नए अवसर तलाशने तक की पूरी विकास यात्रा युवाओं के सामने रखी।

युवा उद्यमी चौपाल संवाद के सारथी मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने परिश्रम, नवाचार और उद्यमशील सोच के बल पर सफलता की नई पहचान बनाने वाले इन युवा उद्यमियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इन युवा उद्यमियों की सफलता और संघर्ष की यात्रा प्रदेश के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। हरियाणा के युवा भी इनसे प्रेरणा लेते हुए नई सोच, दृढ़ संकल्प और परिश्रम के साथ अपनी विकास यात्रा में आगे बढ़ें तथा स्वयं के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार और प्रगति के नए अवसर सृजित करें।

*शून्य से 100 करोड़ की यात्राउद्यमियों ने बताए सफलता के सूत्र*

‘शून्य से 100 करोड़’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में विरहान के नलिन सलूजा, ग्रिपइन्वेस्ट के आशीष जिंदल और बिली हब के भरत सिंघल ने अपने अनुभव सांझा किए। परिचर्चा का संचालन 1 बाई डोट एआई के नितिन जैन ने किया। उद्यमियों ने बताया कि किसी विचार को बड़े व्यवसाय में बदलने के लिए केवल पूंजी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि ग्राहकों की जरूरत को समझना, सही उत्पाद तैयार करना, मजबूत टीम बनाना, लगातार नवाचार करना और समय पर सही निर्णय लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे छोटे स्तर से शुरुआत करने में संकोच न करें और प्रत्येक चरण से सीख लेकर अपने उद्यम को धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं।

*दस वर्षों की यात्रा में मिली सीखअसफलताओं से दोबारा खड़े होने की कहानी*

‘दस वर्षों की यात्रा—भारत के बड़े उद्यम संस्थापकों से सीख’ विषय पर हुई परिचर्चा में इंश्योरेंसदेखो के अंकित अग्रवाल, रोटिक्स के आकाश आनंद, ड्रीम के संदीप अग्रवाल और एम.टी.के. कैपिटल की बिनिता दलाल ने अपने अनुभव सांझा किए। उन्होंने बताया कि उद्यमिता की राह हमेशा आसान नहीं होती। कई बार असफलता का सामना करना पड़ता है, कारोबार की दिशा बदलनी पड़ती है और नई परिस्थितियों के अनुसार दोबारा शुरुआत करनी पड़ती है। उद्यमियों ने कहा कि असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मानना चाहिए।

*एक करोड़ से 100 करोड़ तक पहुंचने में विस्तार की चुनौतियां भी सांझा कीं*

‘एक करोड़ से 100 करोड़—विस्तार की चुनौती’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में जुप इलेक्ट्रिक के आकाश गुप्ता, चायोस के राघव वर्मा, उजाला सिग्नस अस्पताल समूह के डॉ. शुचिन बजाज और प्लाननेक्स के युवराज भारद्वाज ने अपने अनुभव साझा किए। उद्यमियों ने बताया कि किसी व्यवसाय को शुरुआती सफलता से बड़े स्तर तक ले जाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। इस दौरान टीम का विस्तार, काम करने की व्यवस्था को मजबूत करना, गुणवत्ता बनाए रखना, तकनीक का प्रभावी उपयोग और ग्राहकों का विश्वास कायम रखना बेहद जरूरी होता है। परिचर्चा का संचालन युवराज सिंह सचर ने किया।

युवा उद्यमियों ने कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करने का नाम नहीं है, बल्कि समाज और बाजार की किसी समस्या का समाधान तलाशकर उसे बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने विचारों पर विश्वास रखें, बाजार की जरूरत को समझें, लगातार नई चीजें सीखते रहें और असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ें।

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Author: Bharat Sarathi

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