बड़ी मुश्किल से स्वीकृत होते हैं सरकारी पद, उन्हें समय पर न भरना सिस्टम की विफलता — पढ़े-लिखे युवाओं के रोजगार के प्रति सरकार की गंभीरता पर सवाल
चंडीगढ़, 21 अगस्त। 2026 – हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा राज्य विश्वविद्यालयों में वित्त विभाग से स्वीकृत नए पदों को चार साल तक न भरे जाने पर समाप्त मानने संबंधी निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजबीर सिंह भारतीय, रि. सुपरिंटेंडेंट, ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, हरियाणा, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ ने कहा कि सरकार को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि जो पद चार साल तक खाली रहे, उन्हें भरने की जिम्मेदारी किस अधिकारी और किस विभाग की थी?
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सरकारी विभागों और विश्वविद्यालयों में किसी पद का सृजन बड़ी प्रक्रिया और बड़ी मुश्किल के बाद होता है। वित्त विभाग की मंजूरी, प्रशासनिक प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं के बाद पद स्वीकृत किए जाते हैं। ऐसे में यदि स्वीकृत पदों पर चार साल तक भर्ती ही नहीं की जाती और बाद में उन्हीं पदों को समाप्त करने की स्थिति पैदा हो जाती है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि चार साल तक पद खाली रहने की जिम्मेदारी पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जो समय पर भर्ती प्रक्रिया शुरू और पूरी नहीं कर सकी। यदि पद स्वीकृत थे और विभागों को उनकी आवश्यकता थी, तो सरकार ने उन पदों पर भर्ती क्यों नहीं की? और यदि पदों की आवश्यकता नहीं थी तो उन्हें सृजित और स्वीकृत ही क्यों किया गया?
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सरकार को पहले से स्वीकृत और लंबे समय से खाली पड़े पदों की विभागवार समीक्षा कर यह तय करना चाहिए कि भर्ती में देरी क्यों हुई, किस स्तर पर फाइलें लंबित रहीं और इसके लिए जवाबदेही किसकी बनती है। केवल पद समाप्त कर देने से प्रशासनिक लापरवाही की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षित युवा रोजगार की तलाश में हैं। ऐसे समय में स्वीकृत सरकारी पदों को समय पर न भरना और बाद में उन्हें समाप्त करने की नीति सरकार की रोजगार नीति की गंभीरता पर सवाल खड़ा करती है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में रिक्तियों की समस्या पहले से ही सामने आती रही है; जनवरी 2026 की एक RTI-आधारित रिपोर्ट में हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में 4,902 नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर पद रिक्त बताए गए थे।
उन्होंने सरकार से मांग की कि चार वर्ष या उससे अधिक समय से खाली पड़े सभी स्वीकृत पदों का ऑडिट कराया जाए, भर्ती में देरी के कारण सार्वजनिक किए जाएं और जहां पद अभी भी आवश्यक हैं, वहां उन्हें समाप्त करने के बजाय तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “सरकार का उद्देश्य स्वीकृत पदों को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन पदों के माध्यम से योग्य युवाओं को रोजगार देना और सरकारी संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाना होना चाहिए। बड़ी मुश्किल से पद क्रिएट होते हैं; उन्हें भर्ती न करके समाप्त करना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि पिछले चार वर्षों में ऐसे कितने पद स्वीकृत हुए, कितने पदों पर भर्ती हुई और कितने पद केवल भर्ती प्रक्रिया शुरू न होने के कारण अब समाप्त होने की स्थिति में हैं। जनता और प्रदेश के पढ़े-लिखे युवाओं को इन सवालों का जवाब मिलना चाहिए।









