जिन उत्पादों के निर्यात पर 4 से 70 प्रतिशत तक शुल्क लगता था उन पर शून्य शुल्क लगने से हरियाणा के उद्योगों, एमएसएमई, किसानों, निर्यातकों तथा सेवा क्षेत्र को होगा सीधा लाभ
चंडीगढ़, 18 अगस्त – भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) हरियाणा के उद्योगों, एमएसएमई, किसानों, निर्यातकों तथा सेवा क्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के नए अवसर लेकर आया है। 15 जुलाई, 2026 से लागू इस समझौते के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूके के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है, जो लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करती है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दुनिया के बड़े व प्रभावशाली देशों के साथ व्यापार संबंध मजबूत बनाए जा रहे हैं। भारत व यूके के बीच हुआ समझौता (सीईटीए) भी प्रधानमंत्री की उसी सोच का परिणाम है जो व्यापार के क्षेत्र में भारत की अंतर्राष्ट्रीय छलांग साबित होगा। इससे देश के सभी राज्यों, विशेषकर हरियाणा के उद्योगों को काफी लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए इस समझौते के लागू होने से हरियाणा जैसे मजबूत विनिर्माण, कृषि, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और सेवा क्षेत्र वाले राज्य को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। समझौते के माध्यम से हरियाणा के उत्पादों को यूके के बड़े बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक कीमत पर पहुंचाने का अवसर मिलेगा तथा राज्य के निर्यातकों को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जुड़ने में मदद मिलेगी।
हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बड़ा अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि समझौते के तहत जिन प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है, उनमें टेक्सटाइल एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, रसायन, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो-पार्ट्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प एवं सिरेमिक उत्पाद प्रमुख हैं। इस समझौते से पहले इन उत्पादों पर 4 से 70 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। अब इन क्षेत्रों के उत्पादों को यूके में शून्य शुल्क पहुंच मिलने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी जिसका सीधा लाभ हरियाणा को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा में पानीपत का टेक्सटाइल एवं होम फर्निशिंग उद्योग, गुरुग्राम-मानेसर का ऑटोमोबाइल एवं ऑटो-पार्ट्स उद्योग, फरीदाबाद का इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण क्षेत्र तथा राज्य के विभिन्न जिलों में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
इंजीनियरिंग और ऑटो-पार्ट्स क्षेत्र को मिलेगी नई बढ़त
उन्होंने बताया कि हरियाणा के लिए इंजीनियरिंग उत्पाद और ऑटो-पार्ट्स विशेष महत्व रखते हैं। समझौते के तहत इन क्षेत्रों को यूके के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से हरियाणा के निर्माताओं और एमएसएमई की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 15 जुलाई, 2026 को देखने को मिला, जब समझौते के लागू होने के बाद हरियाणा से यूके के लिए फास्टनर्स की पहली निर्यात खेप रवाना हुई। इसे हरियाणा के विनिर्माण एवं निर्यात क्षेत्र के लिए एक नए अवसर की शुरुआत के रूप में देखा गया।
टेक्सटाइल और श्रम-प्रधान उद्योगों को बढ़ावा
श्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि हरियाणा के टेक्सटाइल, परिधान, होम फर्निशिंग तथा अन्य श्रम-प्रधान उद्योग बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराते हैं। भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के तहत इन उत्पादों को यूके के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से निर्यात ऑर्डर बढ़ने, उत्पादन क्षमता के विस्तार और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे विशेष रूप से एमएसएमई, कारीगरों, महिला उद्यमियों और छोटे निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए बाजार उभरेंगे
उन्होंने बताया कि हरियाणा की मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था को देखते हुए भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के तहत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए यूके का बाजार महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा है। यूके ने इस समझौते के तहत लगभग सभी भारतीय कृषि निर्यातों के लिए शुल्क-मुक्त बाजार उपलब्ध कराया है, जबकि कुछ संवेदनशील उत्पादों को अपवाद के रूप में रखा गया है।
इससे हरियाणा में फल-सब्जियों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, मसालों, अनाज से जुड़े मूल्यवर्धित उत्पादों तथा अन्य कृषि-आधारित उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे किसानों के साथ-साथ एफपीओ, कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों और एमएसएमई को भी लाभ पहुंचने की संभावना है।
आईटी और सेवा क्षेत्र के लिए भी व्यापक संभावनाएं
यह समझौता केवल वस्तुओं के निर्यात तक सीमित नहीं है बल्कि इसने यूके में भारतीय सेवाओं के लिए 137 उप-क्षेत्रों में व्यापक बाजार पहुंच प्रदान की है। इनमें आईटी/आईटीईएस, बिजनेस सर्विसेज, प्रोफेशनल सर्विसेज, वित्तीय सेवाएं, दूरसंचार और शिक्षा सेवाएं प्रमुख हैं। यह हरियाणा के गुरुग्राम सहित प्रमुख आईटी एवं सेवा केंद्रों के लिए विशेष महत्व रखता है। सॉफ्टवेयर, डिजिटल सेवाओं, बीपीओ, प्रबंधन परामर्श, वित्तीय सेवाओं, इंजीनियरिंग डिजाइन और तकनीकी परामर्श जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
कुशल पेशेवरों के लिए भी खुलेंगे नए अवसर
इस समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए यूके में सेवाएं प्रदान करने के संबंध में प्रवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने और विभिन्न श्रेणियों में सुविधा देने का प्रावधान है। आर्किटेक्ट, इंजीनियर, शेफ, योग प्रशिक्षक और संगीतकारों सहित विभिन्न पेशेवरों के लिए अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही भारतीय पेशेवरों और उनके नियोक्ताओं के लिए यूके में तीन वर्ष तक सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट का प्रावधान भी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है।
हरियाणा के लिए सीईटीए का व्यापक प्रभाव
भारत-यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ यह समझौता हरियाणा के लिए केवल निर्यात बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्पादन, निवेश, रोजगार, एमएसएमई विकास और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में राज्य की भागीदारी बढ़ाने का अवसर है। इस समझौते के साथ भारत के अन्य नए व्यापार समझौतों से भी भारतीय निर्यातकों के लिए विभिन्न वैश्विक बाजारों में पहुंच का विस्तार हो रहा है। ऐसे में हरियाणा के उद्योगों के सामने अब अपने उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करते हुए वैश्विक बाजार में विस्तार करने का व्यापक अवसर है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता हरियाणा को ग्लोबल मार्केट” से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे राज्य के उद्योग, किसान, कारीगर, एमएसएमई, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत कर सकेंगे तथा निर्यात आधारित विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।








