जांच पर ही आ गई आंच: अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच करेगा आरोपी ठेका कर्मचारी

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समाधान शिविर में दी शिकायत की जांच के नाम पर प्रशासन की लीपापोती का आरोप

विधायक के परिवार से जुड़ी कथित अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई से बचने के लिए नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

उपायुक्त ने जिला नगर आयुक्त को सौंपा था जांच का जिम्मा, शिकायत में नामजद प्लानिंग एक्सपर्ट को ही बनाया जांच अधिकारी

भिवानी, 18 अगस्त। आम जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित समाधान शिविर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। नगर परिषद और जिला नगर योजनाकार विभाग के अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच ऐसे ठेका कर्मचारी को सौंप दी गई है, जिसका नाम स्वयं शिकायत में शामिल बताया गया है।

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने 25 जून 2026 को लघु सचिवालय के डीआरडीए हॉल में आयोजित समाधान शिविर में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तोशाम रोड स्थित जागृति कॉलोनी मोड़ के निकट टीआईटी ग्राउंड में लगभग 4.2 एकड़ भूमि पर विधायक के परिवार से जुड़े लोगों ने कथित रूप से अवैध कॉलोनी काटी है।

एफआईआर में परिवार के सदस्यों के नाम होने का दावा

परमार के अनुसार, इस कथित अवैध कॉलोनी के संबंध में हरियाणा राज्य परिवर्तन ब्यूरो थाना भिवानी में प्राथमिकी भी दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि प्राथमिकी में भिवानी विधायक की पत्नी प्रेमलता सर्राफ, भांजे मोहित गोयल, बेटे अमन गर्ग तथा बेटियों श्वेता और मनीषा के नाम शामिल हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद नगर परिषद के अधिकारियों और चेयरपर्सन की कथित मिलीभगत से संबंधित कॉलोनी को वैध करने की अनुशंसा नियमों को ताक पर रखकर भेजी गई।

अधिकारियों और चेयरपर्सन पर लगाए थे आरोप

संगठन की शिकायत में जिला नगर आयुक्त, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता, नगर अभियंता और प्लानिंग एक्सपर्ट सहित नगर परिषद चेयरपर्सन तथा चेयरपर्सन प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जिला नगर योजनाकार और विभाग के कनिष्ठ अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।

उपायुक्त ने 16 जुलाई को शिकायत जांच के लिए जिला नगर आयुक्त को भेजी थी। आरोप है कि जिला नगर आयुक्त ने नगर परिषद अधिकारियों, चेयरपर्सन और उनके प्रतिनिधि से जुड़े आरोपों की जांच नगर परिषद के उसी प्लानिंग एक्सपर्ट को सौंप दी, जिसका नाम शिकायत में आरोपी के रूप में दर्ज है। संबंधित प्लानिंग एक्सपर्ट नगर परिषद में ठेका प्रथा के तहत कार्यरत बताया गया है।

निष्पक्ष जांच पर उठे गंभीर सवाल

बृजपाल सिंह परमार ने सवाल उठाया कि शिकायत में आरोपित कर्मचारी अपने ही विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कैसे कर सकता है। उन्होंने इसे उपायुक्त के आदेशों का मजाक और मामले को दबाने का प्रयास बताया।

परमार ने मांग की कि शिकायत की जांच नगर परिषद और जिला नगर योजनाकार विभाग से अलग किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। साथ ही कथित अवैध कॉलोनी को वैध करने संबंधी पूरी प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।

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Author: Bharat Sarathi

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