हरियाणा सरकार ने अधिकारियों को भेजी बैठकों के संचालन संबंधी मार्गदर्शिका
चंडीगढ़, 20 जुलाई-हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक कार्यकुशलता को सुदृढ़ करने तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा तैयार प्रभावी बैठकों के संचालन संबंधी मार्गदर्शिका (गाइड फॉर स्मार्टर ऑफिशियल मीटिंग्स) राज्य के सभी आईएएस अधिकारियों को प्रेषित की है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय से प्राप्त मार्गदर्शिका सभी आईएएस अधिकारियों को भेजते हुए इसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में केंद्रीय कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन के उस पत्र का उल्लेख किया गया है, जो उन्होंने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा है। अपने पत्र में कैबिनेट सचिव ने कहा है कि हालांकि सिविल सर्वेंट प्रायः बड़े नीतिगत विषयों पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन दैनिक प्रशासनिक कार्यप्रणाली में छोटे-छोटे सुधार भी सुशासन और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अनेक अधिकारी ऐसे व्यावहारिक मार्गदर्शन की आवश्यकता महसूस करते हैं, जो नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं होता, जबकि बेहतर जनसेवा सुनिश्चित करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मार्गदर्शिका में उल्लेख किया गया है कि अधिकारियों के कार्य समय का बड़ा हिस्सा नियमित बैठकों में व्यतीत होता है, लेकिन अनेक बैठकों की शुरुआत समय पर नहीं होती, उनके उद्देश्य स्पष्ट नहीं होते, अनावश्यक प्रतिभागियों को आमंत्रित किया जाता है तथा कई बार बैठकें बिना किसी ठोस निर्णय अथवा अनुवर्ती कार्रवाई के समाप्त हो जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह मार्गदर्शिका तैयार की गई है ताकि बैठकें सुव्यवस्थित, समयबद्ध, सहभागितापूर्ण तथा परिणामोन्मुखी बन सकें।
मार्गदर्शिका में अधिकारियों को सलाह दी गई है कि बैठक आयोजित करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि क्या वास्तव में बैठक आवश्यक है अथवा ई-मेल, टेलीफोन अथवा लिखित संवाद के माध्यम से भी उद्देश्य हासिल किया जा सकता है। यदि बैठक आवश्यक हो तो उसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए, एजेंडा एवं संबंधित पृष्ठभूमि सामग्री समय से पहले साझा की जाए, केवल आवश्यक प्रतिभागियों को आमंत्रित किया जाए तथा एजेंडा बिंदुओं को तार्किक क्रम में रखा जाए, ताकि चर्चा अधिक प्रभावी हो सके।
मार्गदर्शिका में यह भी सुझाव दिया गया है कि सभी बैठकें निर्धारित समय पर प्रारंभ एवं समाप्त हों, खुली चर्चा को प्रोत्साहित किया जाए, दो-तरफा संवाद सुनिश्चित किया जाए तथा प्रत्येक प्रतिभागी को अपने विचार रखने का अवसर मिले। बैठक संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए संचालक (फैसिलिटेटर), कार्यवृत्त लेखक (मिनट-टेकर) तथा समय-प्रबंधक (टाइमकीपर) जैसी जिम्मेदारियां निर्धारित करने की भी अनुशंसा की गई है। हाइब्रिड बैठकों में वर्चुअल माध्यम से जुड़े प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया गया है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मार्गदर्शिका में सुझाव दिया गया है कि बैठकों का कार्यवृत्त (मिनट्स ऑफ मीटिंग्स) यथासंभव दो से तीन दिनों के भीतर जारी किया जाए, जिसमें प्रत्येक निर्णय, संबंधित उत्तरदायी अधिकारी तथा कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा स्पष्ट रूप से अंकित हो। इसके अतिरिक्त बैठक सूचना, कार्यवृत्त, चयन समिति की कार्यवाही, वित्त समिति की बैठक तथा हितधारकों के साथ परामर्श संबंधी बैठकों के लिए मानक प्रारूप भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि सरकारी अभिलेखों में एकरूपता एवं व्यावसायिकता सुनिश्चित की जा सके।
कैबिनेट सचिव ने सभी मुख्य सचिवों से इस मार्गदर्शिका को अपने-अपने राज्यों के अधिकारियों तक पहुंचाने का अनुरोध किया है। साथ ही राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों से भी कहा गया है कि वे युवा राज्य सिविल सेवा अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इन व्यवहारगत एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली संबंधी सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल करें।








