महिला सशक्तिकरण में भाजपा-आरएसएस की सोच, कांग्रेस की सोच से आज भी 100 साल पीछे।
आरएसएस के गठन (1925) के समय कांग्रेस की अध्यक्ष थीं सरोजिनी नायडू”

फरीदाबाद। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती पर्ल चौधरी की पहल पर महिलाओं से जुड़े संवैधानिक, सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद की एक नई श्रृंखला की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं तक तथ्यों पर आधारित जानकारी पहुंचाना, उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा महिलाओं के मुद्दों पर फैलाए जा रहे भ्रम और दुष्प्रचार का तथ्यात्मक जवाब देना है।
इसी कड़ी में फरीदाबाद में सहायक प्रोफेसर विनीत वर्मा द्वारा “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में फरीदाबाद, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, सोनीपत और पानीपत सहित विभिन्न जिलों से महिला कांग्रेस की पदाधिकारी, वरिष्ठ महिला नेत्रियां तथा बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक प्रोफेसर विनीत वर्मा ने विश्व में महिलाओं के मताधिकार के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने दुनिया को “स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” का संदेश दिया, लेकिन जिस फ्रांस ने पूरी दुनिया को लोकतंत्र और समानता का मार्ग दिखाया, वहां भी महिलाओं को मतदान का अधिकार 1944 में मिला, जबकि पुरुषों को यह अधिकार 1848 में ही प्राप्त हो गया था। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान इस दृष्टि से अत्यंत प्रगतिशील रहा है क्योंकि आजादी के साथ ही महिलाओं और पुरुषों को समान मताधिकार प्रदान किया गया।
उन्होंने कहा कि इतिहास में जिस प्रकार प्रकृति को नियंत्रित करने के प्रयास हुए, उसी प्रकार महिलाओं को भी सामाजिक बंधनों में सीमित रखने की कोशिशें की गईं। लेकिन जैसे प्रकृति जब अपना स्वरूप बदलती है तो कोई उसे रोक नहीं सकता, उसी प्रकार देश की महिला शक्ति भी अब अपने अधिकारों और नेतृत्व की पहचान स्थापित करने के लिए आगे बढ़ रही है।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती पर्ल चौधरी ने स्वतंत्रता आंदोलन के महान नेताओं पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुचेता कृपलानी और सरोजिनी नायडू को स्मरण करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान रहा है।
उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को केवल दलित, आदिवासी और वंचित समाज का ही नहीं बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों का भी सबसे बड़ा संरक्षक बताते हुए कहा कि हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने की दिशा में उनका योगदान ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने महिलाओं को समान नागरिक अधिकार दिलाने की मजबूत नींव रखी।
पर्ल चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की, जिससे देश की करोड़ों युवतियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यदि 18 वर्ष की बेटी अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है तो वह देश का भविष्य तय करने का अधिकार भी रखती है। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को मिले आरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देशभर में 15 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में नेतृत्व कर सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बन चुकी हैं।
महिला नेतृत्व के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए पर्ल चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हरियाणा में महिला को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर महिला सशक्तिकरण का ढोल पीट रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि भाजपा और उसके वैचारिक पूर्ववर्ती संगठन के इतिहास में आज तक किसी भी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने महिलाओं को सर्वोच्च संगठनात्मक नेतृत्व देकर वास्तविक महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 1917 में श्रीमती एनी बेसेंट कांग्रेस की पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। वर्ष 1925 में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना हुई, उस समय कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भारत कोकिला सरोजिनी नायडू थीं। इसके बाद नेली सेनगुप्ता, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी सहित अब तक पांच महिलाओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को केवल मंच की शोभा नहीं बल्कि निर्णय लेने की सर्वोच्च जिम्मेदारी भी दी।
महिला आरक्षण कानून पर बोलते हुए पर्ल चौधरी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की नेता श्रीमती सोनिया गांधी ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कांग्रेस ने समर्थन किया, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद भाजपा सरकार ने इसे लागू नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण लागू करने से पहले परिसीमन की प्रक्रिया का बहाना बनाकर महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार देने में देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा महिलाओं को उनका अधिकार देने से पहले अपनी राजनीतिक सत्ता को मजबूत करने के लिए परिसीमन को प्राथमिकता देना चाहती है।
पर्ल चौधरी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि “महिला आरक्षण लागू करो—आज करो, अभी करो” तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं को भी महिला आरक्षण में पृथक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अलका लांबा के आह्वान पर 21 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर “चलो संसद” अभियान आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से देशभर की महिलाएं संसद से महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने तथा ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग करेंगी।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने भी एक स्वर में महिला आरक्षण कानून को बिना किसी देरी के लागू करने की मांग करते हुए कहा कि अब देश की आधी आबादी प्रतीक्षा नहीं, बल्कि समान राजनीतिक भागीदारी चाहती है।
कार्यक्रम में हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्रियों एवं पदाधिकारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। विशेष रूप से नीलम बालियान, सीमा हुड्डा कटारिया, गजना लांबा, डॉ. सिमरन यादव, सुनीता गुर्जर, तनु शर्मा, निशा चांडक, सविता गर्ग, डॉ. आरती फरमाना, बबीता शर्मा, मधु राठी तथा सुमनलता सहित विभिन्न जिलों से आई महिला कांग्रेस की पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता करते हुए महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने तथा ओबीसी महिलाओं को भी इसमें उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग का समर्थन किया।









