मानसून सत्र में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग, जनवादी महिला समिति का प्रतिनिधिमंडल भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिला

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महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र की बुनियादी शर्त, अब और देरी स्वीकार्य नहीं : प्रतिनिधिमंडल

गुरुग्राम, 11 जुलाई। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक को आगामी मानसून सत्र में लागू करवाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति का एक प्रतिनिधिमंडल विपक्ष के नेता एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपकर इस दिशा में प्रभावी पहल करने का आग्रह किया।

प्रतिनिधिमंडल में समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान, राज्य महासचिव उषा सरोहा, कोषाध्यक्ष अमिता मलिक, पूर्व महासचिव राजकुमारी दहिया, रोहतक जिला सह सचिव मुनमुन हजारिका तथा पूनम नेहरा शामिल थीं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी बेहद कम है। वर्तमान में संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत तथा राज्य विधानसभाओं में केवल 9 प्रतिशत है, जबकि क्यूबा, मैक्सिको, रवांडा, निकारागुआ, बोलीविया, अंडोरा और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50 प्रतिशत से अधिक है।

महिला नेताओं ने कहा कि नीतियों के निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण विधेयक का तत्काल क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनवादी महिला समिति और अनेक प्रगतिशील संगठनों ने दशकों तक 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के लिए संघर्ष किया, जिसके परिणामस्वरूप यह कानून अस्तित्व में आया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि महिला आरक्षण कानून को संसद द्वारा पारित हुए लगभग तीन वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार ने इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को अनिश्चितकाल तक टाल दिया है, जबकि इसके विपरीत यह प्रचारित किया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक दल इस कानून के लागू होने में बाधा बन रहे हैं।

जनवादी महिला समिति ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण को किसी अन्य राजनीतिक एजेंडे, परिसीमन अथवा सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी विवादित प्रक्रियाओं से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और समान प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है और इसमें और अधिक देरी स्वीकार्य नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मांग की कि उनकी पार्टी संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल लागू कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए। साथ ही जनगणना और परिसीमन से जुड़ी शर्तों को हटाने की मांग को प्रमुखता से उठाया जाए।

समिति ने यह भी आग्रह किया कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर संयुक्त पहल करते हुए संसद के भीतर और बाहर साझा अभियान चलाएं तथा आगामी चुनावों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और पर्याप्त संख्या में महिलाओं को टिकट देने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता व्यक्त करें।

इस अवसर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।

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Author: Bharat Sarathi

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