विश्व जनसंख्या दिवस पर वानप्रस्थ में जागरूकता संगोष्ठी आयोजित

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बढ़ती जनसंख्या, संसाधनों के संतुलन और सतत विकास पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

विशेषज्ञों ने बढ़ती जनसंख्या, वृद्धजन आबादी, संसाधनों के संतुलित उपयोग और युवाओं में निवेश को सतत विकास की कुंजी बताया।

हिसार, 11 जुलाई। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर वानप्रस्थ वरिष्ठ नागरिक क्लब में जागरूकता एवं संवादात्मक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों तथा सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनजागरूकता बढ़ाना था।

क्लब के महासचिव डॉ. जे. के. डांग ने सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्व जनसंख्या दिवस केवल बढ़ती जनसंख्या की ओर ध्यान आकर्षित करने का अवसर नहीं है, बल्कि जनसंख्या, संसाधनों और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है, इसलिए संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से अपने अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. पुष्पा खरब ने मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता श्योकंद का परिचय कराया और विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1804 में विश्व की जनसंख्या केवल एक अरब थी, जबकि पिछले दो सौ वर्षों में इसमें अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भारत आज युवा देश है, लेकिन अगले 20 से 25 वर्षों में वृद्धजन आबादी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में स्वास्थ्य, देखभाल और सामाजिक सुरक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।

मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता श्योकंद ने विश्व जनसंख्या दिवस के महत्व और बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी वैश्विक तथा राष्ट्रीय चुनौतियों पर तथ्यपरक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्व की जनसंख्या 8.2 अरब से अधिक है तथा शताब्दी के अंत तक इसके लगभग 10.2 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ती जनसंख्या के कारण प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, जल, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

भारत की जनसांख्यिकीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि देश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1.9 रह गई है, फिर भी वर्ष 2060 तक भारत की जनसंख्या लगभग 1.7 अरब होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2050 तक भारत की लगभग 20 प्रतिशत आबादी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की होगी, जिसके लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की समुचित व्यवस्था आवश्यक होगी।

उन्होंने विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम “आज और भविष्य के लिए युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना” पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि युवाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार और प्रजनन अधिकारों में निवेश ही सतत विकास और जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्त करने की कुंजी है।

व्याख्यान के बाद जनसंख्या, पर्यावरण, संसाधनों, वृद्धजन आबादी और सतत विकास से जुड़े विषयों पर सदस्यों ने अनेक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. श्योकंद ने विस्तार से उत्तर दिया। चर्चा में श्री अजीत सिंह, डॉ. रमेश हुड्डा, श्री नवीन महतानी, श्री डी.पी. ढुल्ल, डॉ. संतोष ढिल्लों, डॉ. नीलम परुथी और डॉ. शशि मदान ने भाग लिया।

कार्यक्रम का समापन विश्व जनसंख्या दिवस पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता से हुआ, जिसमें सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। क्लब के अध्यक्ष डॉ. एस. के. अग्रवाल ने कहा कि जनसंख्या से जुड़े विषयों पर विचार करते समय संसाधनों के संतुलित उपयोग, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, प्रजनन स्वास्थ्य और मानवाधिकार जैसे मुद्दों को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता श्योकंद और कार्यक्रम संचालिका डॉ. पुष्पा खरब का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों ने विषय को सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे सभी सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की।

इस अवसर पर रोटरी क्लब के सहयोग से बालसमंद की एक मेधावी छात्रा को शिक्षा प्रोत्साहन के लिए लैपटॉप भी भेंट किया गया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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