– श्रीमती पर्ल चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा महिला कांग्रेस
आज संत कबीर जयंती पर पूरा देश उस महान संत को नमन कर रहा है, जिन्होंने सदियों पहले मानवता, समानता, सत्य और आत्मचिंतन का संदेश दिया। उनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उस समय थी।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी ने 12 जून 2022 को चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास (हाउस नंबर-1, सेक्टर-3) का नाम “संत कबीर कुटीर” रखा था। आज भी हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी उसी कबीर कुटीर में निवास करते हैं।
इस अवसर पर हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती पर्ल चौधरी जी ने कहा, “किसी महापुरुष के नाम पर भवन का नाम रख देना आसान है, लेकिन उनके विचारों को शासन में उतारना ही उनका वास्तविक सम्मान है। यदि मुख्यमंत्री आवास का नाम ‘संत कबीर कुटीर’ है, तो वहां से निकलने वाले निर्णयों और राजनीति में भी संत कबीर के आदर्श दिखाई देने चाहिए।”
संत कबीर ने कहा था कि
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।।”
श्रीमती पर्ल चौधरी जी ने कहा, “यह दोहा आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार के लिए सबसे बड़ा संदेश है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को पारित हुए तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी महिलाओं को उसका लाभ नहीं मिल पाया है। यदि सरकार महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति गंभीर है, तो इस कानून को बिना किसी और देरी के लागू करना चाहिए। यही संत कबीर की शिक्षा का वास्तविक पालन होगा।”
उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस, अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अलका लांबा जी के मार्गदर्शन में पोस्टकार्ड अभियान, हस्ताक्षर अभियान और मिस्ड कॉल अभियान के माध्यम से देशभर की महिलाओं की आवाज़ प्रधानमंत्री तक पहुँचा रही है। “हमारी मांग स्पष्ट दो माँगे हैं पहला, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तुरंत लागू किया जाए और दूसरा दलित और आदिवासी समाज की तरह ही ओबीसी समाज की महिलाओं को भी भागीदारी दी जाए।
संत कबीर का एक और दोहा आज की राजनीति को आईना दिखाता है,
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।“
इस पर श्रीमती पर्ल चौधरी जी ने कहा, “संत कबीर आत्मचिंतन का संदेश देते हैं, लेकिन आज भाजपा के नेता अक्सर विपक्ष पर आरोप लगाने में अधिक समय लगाते हैं। लोकसभा में आज के विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी से लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू जी, श्रीमती इंदिरा गांधी जी, और चौधरी बंसीलाल जी जैसे दिवंगत नेताओं तक पर लगातार राजनीतिक टिप्पणियाँ की जाती हैं। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन आत्ममंथन के बिना राजनीति समाज को सही दिशा नहीं दे सकती।”
उन्होंने कहा, “यदि ‘कबीर कुटीर’ में रहने वाले लोग वास्तव में संत कबीर का सम्मान करना चाहते हैं, तो उन्हें कबीर की वाणी को अपने व्यवहार और शासन में उतारना होगा। महापुरुषों के नाम राजनीति का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा की प्रेरणा बनने चाहिए।”
अंत में श्रीमती पर्ल चौधरी जी ने कहा, “संत कबीर जी की जयंती पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि सरकार महिलाओं के अधिकारों को और प्रतीक्षा में न रखे। ‘काल करे सो आज कर’ की भावना के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम को तत्काल लागू किया जाए। यही संत कबीर जी की वाणी का सम्मान और लोकतंत्र के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता होगी।”
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या आज की मौजूदा सरकार ऐसा कर पाएगी क्या ??








