आईडीएफसी घोटाले की आड़ में और कितने विभागों की रकम नियमों को ताक पर रखकर जमा हुई? – राव नरेंद्र सिंह
सरकार सभी विभागों की जांच कर श्वेत पत्र जारी करे – राव नरेंद्र सिंह
चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े कथित 590 करोड़ रुपये के घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट में हुए नए खुलासों को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से पूरे सरकारी वित्तीय तंत्र की व्यापक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल एक मामले तक सीमित न रहे, बल्कि सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और स्वायत्त संस्थाओं द्वारा विभिन्न बैंकों में जमा कराए गए सरकारी धन की जांच कराकर इस पर श्वेत पत्र जारी करे।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार हरियाणा के सरकारी विभागों की करोड़ों रुपये की राशि कथित तौर पर दूसरे खातों में स्थानांतरित की गई और ऑडिट से बचने के लिए कई स्तरों पर वित्तीय प्रक्रियाओं में हेरफेर किया गया। यदि ऐसा संभव हुआ है तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अन्य विभागों द्वारा सरकारी धन जमा करते समय निर्धारित वित्तीय नियमों, आरबीआई के दिशा-निर्देशों और सरकारी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के टैक्स का पैसा सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार सार्वजनिक रूप से बताए कि किस विभाग ने किस बैंक में कितनी राशि जमा कराई, किन नियमों के तहत जमा की गई, किस स्तर पर उसकी मंजूरी दी गई और क्या सभी मामलों में वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास रखती है तो उसे बिना किसी देरी के विस्तृत श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। इसमें सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों की बैंक जमा राशि, स्वीकृति प्रक्रिया, नियमों के अनुपालन तथा जहां कहीं भी अनियमितता हुई है, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला केवल एक बैंक या एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी वित्तीय तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि जनता का विश्वास कायम रहे और भविष्य में सरकारी धन के साथ किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की पुनरावृत्ति न हो।








