हरित पट्टियों को बनाया जाएगा वर्षाजल के प्राकृतिक रिसाव का माध्यम; शहर के ग्रीन कवर और भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा
गुरुग्राम, 12 अगस्त। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) शहर में हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण को बेहतर बनाने और वर्षाजल के प्राकृतिक रूप से जमीन में रिसाव की व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सात प्रमुख सेक्टर डिवाइडिंग सड़कों के किनारे स्थित हरित क्षेत्रों का विकास, अपग्रेड और नियमित रखरखाव करेगा।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा ने बताया कि सेक्टर 47/49, 47/50, 43/53, 43/52ए, 44/52, 45/52 और 46/51 को विभाजित करने वाली सड़कों के किनारे जीएमडीए हरित क्षेत्र विकसित करेगा ।
यह पहल शहर के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने और वर्षाजल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि मानसून की तैयारियों के तहत जीएमडीए द्वारा इन सड़क मार्गों के किनारे कई हरित पट्टियों की पहले ही सफाई और लेवल नीचे करने का कार्य किया जा चुका है। हरित क्षेत्रों में जमा मलबे एवं अन्य सामग्री को हटाने के बाद इन स्थानों पर जमीन के स्तर को नीचे किया गया है, ताकि बारिश का पानी सुचारू रूप से इन हरित क्षेत्रों की ओर जा सके।
इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य बारिश के पानी को सड़कों पर जमा होने से रोकना है। हरित पट्टियों की ओर बेहतर ढलान तैयार होने से वर्षाजल को सड़क की सतह से दूर ले जाकर निर्धारित हरित क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकेगा। इससे भारी बारिश के दौरान आसपास की सड़कों पर जलभराव की संभावना कम होगी और वर्षाजल का प्राकृतिक रूप से प्रबंधन किया जा सकेगा।
सीईओ जीएमडीए ने कहा कि इन हरित क्षेत्रों का महत्व केवल जलनिकासी तक सीमित नहीं है। लैंडस्केपिंग और नियमित रखरखाव के बाद ये क्षेत्र आसपास के शहरी इलाकों के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में भी काम करेंगे। इससे शहर के पर्यावरण को बेहतर बनाने, वायु गुणवत्ता में सुधार लाने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच नागरिकों को अधिक हरित क्षेत्र उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इन हरित पट्टियों को भूजल रिचार्ज के लिए भी उपयोगी बनाया जाएगा। बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में एकत्रित पानी धीरे-धीरे मिट्टी में रिसेगा और भूजल स्तर को प्राकृतिक रूप से रिचार्ज करने में योगदान देगा। इससे वर्षाजल को तुरंत नालों के माध्यम से बाहर निकालने के बजाय उसका स्थानीय स्तर पर उपयोग संभव होगा। यह जल प्रबंधन का अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल तरीका साबित हो सकता है।
श्री मीणा ने कहा कि हरित क्षेत्रों का विकास सौंदर्यीकरण और उपयोगिता दोनों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। लैंडस्केपिंग एवं रखरखाव की ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे हरित पट्टियां आकर्षक दिखाई देने के साथ-साथ वर्षाजल के प्राकृतिक अवशोषण क्षेत्र के रूप में भी प्रभावी ढंग से कार्य करती रहें।
जीएमडीए द्वारा शहरी विकास के साथ हरित अवसंरचना को जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विशेष रूप से मानसून की तैयारियों के तहत प्राधिकरण द्वारा वर्षाजल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, पानी की निकासी के तंत्र में सुधार करने और जलभराव की समस्या वाले क्षेत्रों में प्रभावी उपाय करने पर काम किया जा रहा है। प्राकृतिक एवं इंजीनियर्ड दोनों प्रणालियों के बेहतर समन्वय से शहर में वर्षाजल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
सात प्रमुख सेक्टर डिवाइडिंग सड़कों के किनारे हरित क्षेत्रों के विकास और नियमित रखरखाव से इन प्रमुख सड़क मार्गों की क्षमता बढ़ने के साथ ये पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगी । साथ ही आसपास के सेक्टरों के निवासियों को बेहतर हरित वातावरण मिलेगा। जीएमडीए का यह कदम गुरुग्राम में हरियाली बढ़ाने, वर्षाजल के बेहतर प्रबंधन और भूजल संरक्षण की दिशा में दीर्घकालिक लाभ देने वाला साबित होगा तथा शहर को अधिक हरित और जलवायु-अनुकूल बनाने में योगदान देगा।








