· सरकार की गलत नीतियों ने देश में बेरोजगारों की फ़ौज खड़ी कर दी है – दीपेन्द्र हुड्डा
· विनिर्माण, सेवा क्षेत्र में रोजगार का हिस्सा 8 साल से जस का तस – दीपेन्द्र हुड्डा
· संसद में सरकार खुद नहीं बता पाई कि रोजगार सृजन पर्याप्त है या नहीं, सवाल ही टाल गई– दीपेन्द्र हुड्डा
· बीजेपी सरकार ने जो आंकड़े दिए वो खोखले “विकास” के दावों की पोल खोल रहे – दीपेन्द्र हुड्डा
· भाजपा ने 2014 चुनाव में हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था, 12 साल में 24 करोड़ रोजगार कहाँ मिले बताए सरकार – दीपेन्द्र हुड्डा
· अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए योवाओं के ये नहीं मालूम कि वो बेरोजगार है या बारोज़गार हैं – दीपेन्द्र हुड्डा
· जॉबलेस ग्रोथ वाले बीजेपी मॉडल की कीमत देश का हर बेरोजगार युवा चुका रहा – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़, 11 अगस्त। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा के सवाल के जवाब में सरकार ने माना कि पिछले 12 वर्षों में देश में रोज़गार घटे हैं बढ़े नहीं। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब से यह भी खुलासा हुआ कि बीजेपी सरकार पिछले एक दशक से भारत में “जॉबलेस ग्रोथ” यानी बेरोजगारी बढ़ाने वाले विकास के रास्ते पर चल रही है। दीपेन्द्र हुड्डा ने बताया कि संसद में सरकार बता ही नहीं पाई कि रोजगार सृजन पर्याप्त है या नहीं, स्पष्ट रूप से पूछे गए उनके इस सवाल को ही टाल गई। सरकार की गलत नीतियों ने देश में बेरोजगारों की फ़ौज खड़ी कर दी है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा के सवाल का केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जो जवाब दिया उसके मुताबिक कुल कार्यबल में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 2017-18 में 12.1% थी और 2025 में भी 12.1% ही है यानी आठ साल में शून्य विकास हुआ। हैरानी की बात तो ये है कि वर्ष 2020-21 में यह घटकर 10.9% तक पहुंच गया था। सेवा क्षेत्र में भी यही हाल है — 2017-18 में हिस्सेदारी 31.1% थी, 2025 में भी 31.8% — यानी लगभग स्थिर बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि 2014 में भाजपा ने नारा दिया था कि हर साल 2 करोड़ रोजगार पैदा करेंगे। 12 साल के 24 करोड़ रोजगार मिलने चाहिए थे। देश में करीब इतने ही घर हैं। लेकिन हकीकत ये है कि नये रोजगार मिलना तो दूर की बात है। रोजगार के बहुत सारे महकमों में रोजगार के रास्ते बंद कर दिये। अकेले केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में करीब 10 लाख पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा राज्यों में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। बीजेपी सरकार ने फौज की रेगुलर भर्ती बंद करके अग्निपथ योजना लागू कर दी और युवाओं के लिए पक्के रोजगार के इस रास्ते को भी बंद कर दिया। अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए योवाओं के ये नहीं मालूम कि वो बेरोजगार है या बारोज़गार हैं। पिछले एक दशक से “मेक इन इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत” जैसे भारी भरकम नारे लगाए जा रहे हैं लेकिन यह सब जमीन पर जुमला साबित हो रहे हैं। जॉबलेस ग्रोथ वाले इस मॉडल की कीमत देश का हर बेरोजगार युवा चुका रहा है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि कंपनियां हर महीने “उत्पादन बढ़ने” का दावा करने वाला पर्चेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ा दे रही हैं, तो देश के कुल कामगारों में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी आठ साल से क्यों नहीं बढ़ रही? लोकसभा में उनके प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने जो आंकड़े पेश किए हैं, को बीजेपी सरकार के “विकास” के दावों की पोल खोलते हैं। सरकारी आंकड़े साबित करते हैं कि नौकरियां नहीं बन रहीं। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार से यह भी सवाल किया था कि क्या सरकार रोजगार सृजन के स्तर को पर्याप्त मानती है? यदि नहीं, तो अपर्याप्त रोजगार सृजन के क्या कारण हैं? सरकार ने इस सीधे सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उलटे योजनाओं की एक लंबी सूची थमा दी, लेकिन ये नहीं बताया कि इन योजनाओं से कितना वास्तविक रोजगार सृजन हुआ।








