पहले दो दिन काले बिल्ले लगाकर करेंगे ड्यूटी; पांच से सात अक्टूबर तक दो-दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल
सीएमओ और पीएमओ को ज्ञापन सौंपकर पॉलिसी बिना शर्त वापस लेने की मांग
गुरुग्राम, 29 सितंबर। स्वास्थ्य विभाग में मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने के विरोध में नर्सिंग ऑफिसर्स बुधवार, 30 सितंबर से आंदोलन शुरू करेंगे। पहले चरण में 30 सितंबर और एक अक्टूबर को राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी की जाएगी। इसके बाद पांच, छह और सात अक्टूबर को प्रतिदिन सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल होगी।
नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के बैनर तले मंगलवार को सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) को ज्ञापन सौंपा गया। एसोसिएशन ने पॉलिसी को नर्सिंग कैडर की कार्य परिस्थितियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रतिकूल बताते हुए इसे बिना शर्त वापस लेने की मांग की।
रात्रि ड्यूटी और महिला सुरक्षा का उठाया मुद्दा
ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ सुबह, शाम और रात की तीन शिफ्टों में सेवाएं देता है। ऐसे में तबादला नीति तय करते समय उसकी ड्यूटी की प्रकृति और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश के कई स्वास्थ्य संस्थान गांवों और कस्बों से बाहर अपेक्षाकृत सुनसान स्थानों पर स्थित हैं। दूर तबादला होने पर महिला कर्मचारियों को विशेषकर रात्रि ड्यूटी के दौरान आवागमन और सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी विचार करने की मांग
एसोसिएशन ने कहा कि नर्सिंग कैडर में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं। ड्यूटी के साथ उन पर बच्चों की देखभाल, उनकी शिक्षा और बुजुर्ग माता-पिता की सेवा जैसी जिम्मेदारियां भी हैं। परिवार से दूर तबादला होने पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है, जिसका प्रभाव उनकी कार्यक्षमता पर भी पड़ने की आशंका है।
ज्ञापन में एसोसिएशन ने दावा किया कि देश के किसी अन्य राज्य में नर्सिंग कैडर पर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं है। संगठन ने तर्क दिया कि मुख्यतः दिन के समय काम करने वाले विभागों और चौबीसों घंटे सेवाएं देने वाले नर्सिंग कैडर की कार्य परिस्थितियां अलग हैं।
नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और मरीजों की देखभाल में उनकी अहम भूमिका है। सरकार को उनकी सेवा परिस्थितियों, सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी वापस लेनी चाहिए। एसोसिएशन के अनुसार, इसी मांग को लेकर प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया है।







