सेक्टर-72 का बूस्टिंग स्टेशन अक्टूबर में होगा चालू, न्यू गुरुग्राम में बढ़ेगी पानी की सप्लाई

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सेक्टर-72 का बूस्टिंग स्टेशन अक्टूबर में होगा चालू, न्यू गुरुग्राम में बढ़ेगी पानी की सप्लाई

सेक्टर 58 से 80 तक होगी 40 एमएलडी अतिरिक्त जल आपूर्ति

गुरुग्राम, 29 सितंबर। न्यू गुरुग्राम के तेजी से विकसित हो रहे सेक्टरों में पानी की किल्लत दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सेक्टर-72 में तैयार किया जा रहा नया वाटर सप्लाई बूस्टिंग स्टेशन अक्टूबर में चालू किया जाएगा। इसके बाद सेक्टर 58 से 80 तक करीब 40 एम एल डी ज़्यादा पेय जल की आपूर्ति हो पाएगी, जिससे इन सेक्टरों में 95 एमएलडी पानी की आपूर्ति की जा सकेगी। नए स्टेशन के शुरू होने से मौजूदा सेक्टर-51 बूस्टिंग स्टेशन का दबाव भी कम होगा और वहां से अन्य सेक्टरों 47 से 57 को भी अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

यह जानकारी मंगलवार को लघु सचिवालय में हरियाणा सरकार के प्रधान सलाहकार (शहरी विकास) श्री डीएस ढेसी की अध्यक्षता में हुई 13वीं जिला समन्वय समिति की बैठक में दी गई। बैठक में सेक्टर-72 बूस्टिंग स्टेशन को जल्द चालू करने सहित शहर से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा की गई।

जीएमडीए के मुख्य अभियंता आरएस जांगड़ा ने बताया कि सेक्टर-72 स्टेशन के जरिए सेक्टर 58 से 80 तक पानी की आपूर्ति की जाएगी। इससे सेक्टर-51 स्टेशन को मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था के दबाव से राहत मिलेगी और उसकी क्षमता का इस्तेमाल आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी पहुंचाने के लिए किया जा सकेगा।

फिलहाल चंदू बुढ़ेडा और बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से गुरुग्राम में करीब 720 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति हो रही है। सेक्टर-72 बूस्टिंग स्टेशन के संचालन के बाद शहर की आपूर्ति क्षमता बढ़कर करीब 770 एमएलडी हो जाएगी। जीएमडीए ने बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की यूनिट-4 का काम भी अलॉट कर दिया है, जिससे आने वाले वर्षों में पानी की उपलब्धता और बढ़ेगी।

बरसात में गुरुग्राम में जलभराव रोकने पर भी हुआ मंथन

बैठक में बारिश के दौरान जलभराव और शहरी बाढ़ की समस्या पर भी मंथन हुआ। जीएमडीए ने आईआईटी दिल्ली और निप्पॉन कोइ को व्यापक योजना तैयार करने का जिम्मा दिया हुआ है। वहीं नगर निगम गुरुग्राम ने आईआईटी गांधीनगर को जलभराव की समस्या के अध्ययन का काम सौंपा हुआ है।

प्रधान सलाहकार श्री डीएस ढेसी ने कहा कि केवल जलभराव के बाद पानी निकालने के बजाय बारिश के पानी को शहर में रोकने और जमीन में उतारने पर जोर देना होगा। इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, इंजेक्शन वेल, प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन और नए जलाशय विकसित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए।

गुरुग्राम नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि 32 वाटर बॉडी विकसित की जा चुकी हैं, जबकि 21 अन्य पर काम चल रहा है। जीएमडीए पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित कर रहा है। मानसून के दौरान इनके प्रदर्शन का आंकलन किया जाएगा । वहीं वजीराबाद झील को पानी के भंडारण और रिचार्ज सुविधा के रूप में विकसित किया जा रहा है।

श्री ढेसी ने जीएमडीए, एचएसवीपी तथा गुरुग्राम और मानेसर नगर निगमों को नए जलाशय विकसित करने के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शहर में जलभराव को रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई तैयार करने पर जोर दिया।

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Author: Bharat Sarathi

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