मसानी बैराज प्रदूषण पर सरकार दे जवाब: 10 साल तक जहरीला पानी भरता रहा, जिम्मेदार कौन? — वेदप्रकाश विद्रोही

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पर्यावरण मंत्री के बयान को बनाया सरकार की विफलता का प्रमाण, कहा— अब शोधन संयंत्र लगाकर ही निकले समाधान का रास्ता

रेवाड़ी, 28 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मसानी बैराज में वर्षों से जमा औद्योगिक अपशिष्ट एवं रसायनयुक्त प्रदूषित पानी को लेकर हरियाणा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को बताए कि आखिर मसानी बैराज में जहरीला पानी जमा होने की जिम्मेदारी किसकी है और इस लापरवाही के लिए अब तक किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

पर्यावरण मंत्री के बयान से सरकार की लापरवाही उजागर

विद्रोही ने कहा कि हरियाणा के उद्योग, वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने अपने पैतृक गांव बुढ़पुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वीकार किया है कि मसानी बैराज औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी-खुशखेड़ा से आए रसायनयुक्त अपशिष्ट जल से भरा हुआ है। मंत्री ने यह भी माना कि इस जहरीले पानी को निकालना इसलिए संभव नहीं हो पा रहा क्योंकि जहां भी इसे डालने की कोशिश होती है, वहां ग्रामीण और किसान विरोध करने लगते हैं।

विद्रोही ने कहा कि मंत्री का यह बयान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार और प्रशासन को वर्षों से इस गंभीर समस्या की जानकारी थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

दर्जनों गांवों का भूजल हुआ जहरीला, लोगों का जीवन संकट में

उन्होंने आरोप लगाया कि मसानी बैराज में जमा रसायनयुक्त पानी के कारण आसपास के दर्जनों गांवों का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। हालात इतने खराब हैं कि पानी न पीने योग्य बचा है, न खेती के लिए उपयोगी। यहां तक कि नहाने, कपड़े धोने और पशुओं को पिलाने के लिए भी यह पानी अनुपयोगी हो गया है।

विद्रोही ने कहा कि बैराज से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि सरकार तमाशबीन बनी हुई है।

10 वर्षों तक प्रदूषित पानी भरता रहा, सरकार करती रही अनदेखी

वेदप्रकाश विद्रोही ने सवाल किया कि यदि सरकार और प्रशासन को पहले से पता था कि भिवाड़ी, खुशखेड़ा, धारूहेड़ा, बावल और रेवाड़ी क्षेत्र का औद्योगिक एवं सीवरेज का प्रदूषित पानी मसानी बैराज में पहुंच रहा है, तो उसे रोकने के लिए पिछले दस वर्षों में क्या कदम उठाए गए?

उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के प्रति सरकार की गंभीर असंवेदनशीलता का उदाहरण है।

पहले रोकें प्रदूषित पानी का प्रवाह, फिर लगाएं ट्रीटमेंट प्लांट

विद्रोही ने मांग की कि सरकार सबसे पहले भिवाड़ी, खुशखेड़ा, धारूहेड़ा, बावल और रेवाड़ी क्षेत्रों से मसानी बैराज में आने वाले सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट जल के प्रवाह पर तत्काल रोक लगाए।

इसके साथ ही बैराज में जमा जहरीले पानी को वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध करने के लिए अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएं, ताकि पानी का सुरक्षित निस्तारण हो सके और क्षेत्र के लोगों को इस गंभीर पर्यावरणीय संकट से राहत मिल सके।

“यह केवल पर्यावरण नहीं, हजारों लोगों के जीवन का सवाल”

विद्रोही ने कहा कि मसानी बैराज का मामला केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों ग्रामीणों के स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि सरकार जिम्मेदारी तय करे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे और पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी कर जनता को बताए कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है।

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Author: Bharat Sarathi

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