पाखंडी ‘धर्मगुरुओं’ का जाल, भय और अंधविश्वास का खेल—शिक्षित महिलाएं भी बन रहीं शिकार
– सतवंती नेहरा, सामाजिक कार्यकर्ता

भारत जैसे देश में, जहां महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है और शक्ति स्वरूपा के रूप में पूजा जाता है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के यौन शोषण की घटनाएं लगातार सामने आना एक गहरी सामाजिक विडंबना को उजागर करता है। राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और निजी क्षेत्र—कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि महिलाओं का शोषण अक्सर उनकी अपनी आस्था और विश्वास के माध्यम से ही किया जाता है। अंधविश्वास और धर्मान्धता की आड़ में पनप रहे पाखंडी तत्व महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में सामने आया मामला इस कड़वी सच्चाई का एक और उदाहरण है, जहां एक स्वयंभू ज्योतिषी और तथाकथित आध्यात्मिक गुरु ने आस्था, भय और भविष्यवाणियों के जाल में फंसाकर महिलाओं का शारीरिक और मानसिक शोषण किया। हैरानी की बात यह है कि इस जाल में केवल अशिक्षित ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित और प्रभावशाली परिवारों की महिलाएं भी फंसीं।
यह स्थिति दर्शाती है कि समस्या केवल शिक्षा की कमी नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जागरूकता की कमी भी है।
हालांकि, यह कहना भी पूरी तरह उचित नहीं होगा कि केवल महिलाओं का अंधविश्वास ही उनके शोषण का कारण है। असली दोषी वे लोग हैं जो आस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि अंधविश्वास, भय और सामाजिक दबाव ऐसे अपराधियों को अवसर प्रदान करते हैं।
आज आवश्यकता है कि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाए, महिलाओं को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाया जाए, और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जब तक आस्था विवेक के साथ नहीं जुड़ती और समाज पाखंड के खिलाफ एकजुट नहीं होता, तब तक ऐसे अपराधों पर पूर्ण विराम लगाना कठिन रहेगा।
कैसे फंसाया जाता है जाल में?
- भविष्य और कुंडली के नाम पर डर पैदा करना
- परिवार या जीवन पर संकट की भविष्यवाणी
- “विशेष पूजा” या “शुद्धिकरण” का बहाना
- नशीले पदार्थ देकर बेहोश करना
- आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल
क्यों फंस जाती हैं महिलाएं?
- अंधविश्वास और धार्मिक भय
- सामाजिक बदनामी का डर
- परिवार को नुकसान होने की आशंका
- मानसिक तनाव या व्यक्तिगत समस्याएं
- “गुरु” के प्रति अंधभक्ति
क्या है समाधान?
- वैज्ञानिक सोच और जागरूकता का प्रसार
- महिलाओं को कानूनी अधिकारों की जानकारी
- संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत
- समाज में पाखंड के खिलाफ खुलकर आवाज
- प्रशासन की सख्त और त्वरित कार्रवाई








