स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को ज्ञापन सौंपकर की उच्च स्तरीय जांच, पीड़िता को त्वरित न्याय और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग

गुरुग्राम, 13 जून। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एआईडीडब्ल्यूए) और सीटू के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने कुरुक्षेत्र के नागरिक अस्पताल में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के चंडीगढ़ स्थित आवास पर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मामले में आरोपी डॉक्टर शैलेंद्र शर्मा को सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा नियुक्ति देने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल में जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष सविता, सीटू के राज्य महासचिव जयभगवान, राज्य उपाध्यक्ष सतवीर सिंह, रमा, रामकलां और वंदना सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे।
ज्ञापन में संगठनों ने कहा कि इस जघन्य घटना ने अस्पतालों में महिला मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना था कि जिस डॉक्टर पर समाज लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपता है, उसी पर एक नाबालिग मरीज के साथ ओपीडी के दौरान घिनौना कृत्य करने का आरोप लगा है, जिससे पूरे समाज में रोष और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
संगठनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर शैलेंद्र शर्मा के खिलाफ पूर्व में भी वर्ष 2008 और 2017 में बलात्कार एवं यौन हिंसा के मामलों में कार्रवाई हो चुकी थी। ऐसे व्यक्ति को सेवानिवृत्ति के बाद पुनः नियुक्ति दिए जाने की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा महिला आयोग की निवर्तमान अध्यक्ष रेणु भाटिया के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की। नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने नर्सिंग स्टाफ के प्रति अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी की, जिससे कामकाजी महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है। संगठनों का कहना था कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
संगठनों ने स्वास्थ्य सेवाओं में स्थायी नियुक्तियों की कमी और ठेका प्रथा को भी ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए अस्पतालों में नियमित, जवाबदेह और पर्याप्त स्टाफ की भर्ती की मांग की। साथ ही हरियाणा के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में महिला एवं बाल वार्डों का सुरक्षा ऑडिट कराने, सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा महिला डॉक्टरों और महिला स्टाफ की अनिवार्य तैनाती सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में पीड़िता के मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन आधार पर कराने, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करने तथा उसे कठोरतम सजा दिलाने की मांग की गई। इसके अलावा पीड़िता और उसके परिवार के पुनर्वास, काउंसिलिंग, कानूनी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।
प्रमुख मांगें:
- आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कठोरतम सजा।
- पुनर्नियुक्ति की जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
- रेणु भाटिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग।
- सभी अस्पतालों में सुरक्षा ऑडिट और सीसीटीवी व्यवस्था।
- महिला एवं बाल वार्डों में महिला स्टाफ की अनिवार्य तैनाती।
- पीड़िता को कानूनी सहायता, काउंसिलिंग और सुरक्षा उपलब्ध कराना।
- मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन कराना।
प्रतिनिधिमंडल ने इन सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए स्वास्थ्य मंत्री से समय देने का आग्रह किया। मंत्री के निजी सहायक ने प्रतिनिधिमंडल को शीघ्र मुलाकात कराने का आश्वासन दिया।








