मिडल ईस्ट संकट की मार: उद्योगों को राहत देने के लिए लोन मोरेटोरियम पर विचार

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एमएसएमई सेक्टर के लिए ‘आर्थिक सुरक्षा कवच’ की जरूरत— विनोद बापना

गुरुग्राम (जतिन/राजा): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल, लॉजिस्टिक्स बाधाओं और वैश्विक अनिश्चितता के चलते देश के औद्योगिक गलियारों में चिंता गहराती जा रही है। इस बीच वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक उद्योगों, खासकर एमएसएमई और निर्यातकों को राहत देने के लिए 3 से 6 महीने के लोन मोरेटोरियम प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) हरियाणा काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य एवं कैपेरो मारुति के सीईओ विनोद बापना ने मौजूदा हालात को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में सबसे ज्यादा मार छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि मिडल ईस्ट में जारी तनाव के कारण ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में तेजी आई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। वहीं कच्चे माल की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप एमएसएमई सेक्टर में कैश-फ्लो का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

विनोद बापना के अनुसार, लाल सागर क्षेत्र में संकट और समुद्री मार्गों में बाधाओं के चलते निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ चुकी है और समय पर डिलीवरी न होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि:

  • एमएसएमई और निर्यातकों के लिए 3 से 6 महीने तक ईएमआई पर अस्थायी रोक (लोन मोरेटोरियम) लागू किया जाए
  • वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज दर में 2-3% तक अतिरिक्त छूट दी जाए
  • एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) नियमों में अस्थायी ढील दी जाए
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट या प्रत्यक्ष सब्सिडी के जरिए बढ़ी लागत का बोझ कम किया जाए
  • निर्यातकों के लिए शिपिंग लागत में सरकारी सहायता बढ़ाई जाए

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो बड़ी संख्या में छोटी और मध्यम इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।

विनोद बापना ने कहा कि “भारतीय अर्थव्यवस्था के इंजन को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच की तत्काल आवश्यकता है,” ताकि उद्योग इस वैश्विक संकट के दौर से उबर सकें और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बरकरार रह सके।

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Author: Bharat Sarathi

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