मानेसर मजदूर आंदोलन मामले में जमानत से पुलिस की साजिश का भंडाफोड़ : सीटू

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मजदूरों व ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पूंजीपति मालिकों के हित में उठाया गया गैरकानूनी कदम

गुड़गांव, 18 मई। सीटू ने मानेसर मजदूर आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में गिरफ्तार बालसोनिका यूनियन के महासचिव अजीत कुमार को मिली जमानत को न्याय की जीत बताते हुए कहा है कि इससे मानेसर पुलिस की कथित साजिश और झूठे आरोपों की पोल खुल गई है। इससे पहले 12 मई को इसी मामले में अंकित कुमार को भी जमानत मिल चुकी है।

सीटू ने कहा कि महीने भर से अधिक समय तक मजदूरों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को जेल में रखना केवल पूंजीपति मालिकों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया गैरकानूनी कदम था। संगठन ने मांग की कि सभी गिरफ्तार मजदूरों को बिना शर्त रिहा किया जाए, मानेसर मजदूर आंदोलन के दौरान दर्ज दोनों प्राथमिकी रद्द की जाएं तथा मजदूरों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर गिरफ्तारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

गौरतलब है कि मानेसर मजदूर आंदोलन के दौरान 9 अप्रैल को दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। पहली प्राथमिकी संख्या 95/2026 में 20 महिला मजदूरों सहित 45 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया था, जिन सभी को जमानत मिल चुकी है। दूसरी प्राथमिकी संख्या 94/2026 में आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारी पर हमला, गैरकानूनी रूप से एकत्र होने और दंगा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। इस मामले में 9 अप्रैल को 11 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 12 और 13 मई की रात छह ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर मुख्य आरोपी बनाया गया। इनमें अजीत कुमार और अंकित कुमार को जिला सत्र न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत में दलील दी कि आरोपी घटना वाले दिन मौके पर मौजूद ही नहीं था और न ही हिंसा भड़काने में उसकी कोई भूमिका थी। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया गया तथा उसके परिवार या किसी करीबी व्यक्ति को भी सूचना नहीं दी गई, जबकि यह कानूनी रूप से आवश्यक है।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगन गीत कौर ने जमानत देते हुए टिप्पणी की कि यदि “अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है, इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाना अपराध माना जाएगा तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते प्रतिबंधों को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि आरोपी को हिरासत में रखने को उचित ठहराने वाला कोई ठोस प्रमाण पुलिस प्रस्तुत नहीं कर सकी।

सीटू ने आरोप लगाया कि संगठन के प्रदेश महासचिव जय भगवान और उपाध्यक्ष विनोद कुमार के खिलाफ भी मजदूरों को भड़काने के आरोप लगाकर नोटिस जारी किए गए। संगठन का कहना है कि 4 और 5 मई की रात सीआईए मानेसर शाखा ने दोनों नेताओं के घरों की घेराबंदी की थी, जिसके विरोध में 9 मई को रोहतक में हजारों मजदूरों और नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया।

सीटू ने कहा कि 9 अप्रैल को मजदूरों पर की गई पुलिस कार्रवाई का उद्देश्य मजदूरों को उनकी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने से रोकना था। संगठन ने कहा कि सरकार और पुलिस को पूंजीपतियों के हित साधने के बजाय मजदूरों के कानूनी अधिकारों, आठ घंटे की ड्यूटी, अतिरिक्त समय के दोहरे वेतन, भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और न्यूनतम वेतन लागू कराने के लिए मालिकों को जवाबदेह बनाना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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