इन नई उद्योग नीतियों से 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 10 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर मिलेंगे
निवेश, रोजगार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्यात और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में हरियाणा का बड़ा कदम
चंडीगढ़, 18 मई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 10 प्रमुख औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी गई। इन नीतियों का उद्देश्य संकल्प पत्र तथा बजट घोषणाओं को प्रभावी रूप से लागू करते हुए विनिर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित उद्योगों तथा कृषि आधारित आर्थिक विकास को व्यापक बढ़ावा देना है।
उल्लेखनीय है कि इन नीतियों को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं दो दिनों तक उद्योगपतियों एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसके अलावा, उक्त नीतियां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ के विजन के अनुरूप तैयार की गई हैं।
1. मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति एचईईपी 2020 का स्थान लेगी और यह प्रदेश की मुख्य औद्योगिक नीति होगी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश, 10 लाख नए रोजगार और प्रदेश के निर्यात को बढ़ाने के लक्ष्य पर फोकस किया गया है।
नई नीति में पुरानी ए, बी, सी और डी ब्लॉक आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को समाप्त कर कोर, इंटरमीडिएट, सब-प्राइम और प्राइम/फोकस क्षेत्र आधारित नई व्यवस्था लागू की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सभी ब्लॉकों में औद्योगिक निवेश के लिए वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से अब औद्योगिक प्रोत्साहन प्रदेश के हर ब्लॉक तक पहुंचेंगे और जिन क्षेत्रों में उद्योगों की अधिक आवश्यकता है, उन्हें अधिक लाभ मिलेगा।
नीति में नए औद्योगिक निवेश के लिए पूंजीगत सब्सिडी, हरियाणा कौशल रोजगार निगम पर पंजीकृत युवाओं में से औद्योगिक इकाइयों द्वारा भर्ती और अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन देने के प्रावधान किए गए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के अपने बजट अभिभाषण में मुख्यमंत्री ने नए निवेश, स्थानीय युवाओं की भर्ती और अनुसंधान एवं विकास को नीति के माध्यम से प्रोत्साहित करने की बात कही थी, जिसे इस नीति में शामिल किया गया है।
इस नीति में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक शुद्ध एसजीएसटी प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। बड़ी इकाइयों को यह लाभ7 वर्ष, मेगा इकाइयों को 10 वर्ष और अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को विशेष पैकेज के तहत 12 वर्ष तक लाभ मिलेगा। बड़ी इकाइयों के लिए 5 से 20 प्रतिशत और प्राइम/फोकस क्षेत्रों में मेगा तथा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए पात्र पूंजीगत व्यय पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। स्टाम्प ड्यूटी में भी 30 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के स्थानीय कर्मचारियों हेतु रोजगार सृजन सब्सिडी को 48,000 रुपये से बढ़ाकर 10 वर्षों तक प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक कर दिया गया है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता 1.20 लाख रुपये तक होगी। वित्त वर्ष 2026- 27 के बजट में स्थानीय युवाओं को उद्योगों में रोजगार दिलाने के लिए रोजगार सब्सिडी बढ़ाने की बात कही गई थी। संकल्प पत्र की प्रतिबद्धता के अनुरूप, हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति करने वाली इकाइयों को नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के ईपीएफ अंशदान की प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा।
निवेशकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल 2026 से देरी होने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान किया गया है। बजट और संकल्प पत्र में सरकारी संस्थाओं द्वारा समय पर भुगतान न करने पर ब्याज देने की बात कही गई थी। इसी तरह प्रोत्साहन राशि के भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए पात्र प्रोत्साहन की 50 प्रतिशत राशि 7 कार्य दिवसों में और शेष राशि 45 दिनों में जारी की जाएगी।
भूमि व्यवहार्यता प्रमाण पत्र के माध्यम से 45 कार्य दिवसों में भूमि स्वामित्व, भू-उपयोग, भार और संबंधित अनुमतियों की स्थिति पर स्पष्टता दी जाएगी। यह निवेशकों को जमीन से जुड़ी प्रारंभिक अनिश्चितताओं से राहत देने वाला एक बड़ा सुधार है। निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रखने हेतु निर्यात प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नीति में कार्बन क्रेडिट, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित भवन और शून्य द्रव अपशिष्ट प्रणाली जैसे हरित उद्योग प्रावधान भी किए गए हैं।
2. हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों की नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा निर्माण और सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगी।
इसका उद्देश्य हरियाणा को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। यह नीति भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप है।
आईएमटी सोहना में 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। नीति के तहत 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी। 50 से 80 प्रतिशत तक परिचालन सहायता भी दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये होगी। हरियाणा में बने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग से नीति तैयार की जा रही है।
3. हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइसेज क्षेत्र के लिए नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार फार्मा, चिकित्सा उपकरणों, क्लीनिकल ट्रायल, जैव-समतुल्यता अध्ययन और स्वास्थ्य विनिर्माण से जुड़े निवेश को बढ़ावा देगी।
कोविड महामारी के बाद दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई है। यह नीति आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और आयात निर्भरता कम करने की राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा का महत्वपूर्ण योगदान है।
नीति में महिलाओं को रात्रि पाली में कार्य करने की अनुमति, पात्र इकाइयों को आवश्यक सेवा का दर्जा और पहले से स्वीकृत दवा फॉर्मूलेशन के लिए त्वरित मंजूरी जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।
4. हरियाणा टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार खिलौना और खेल उपकरण क्षेत्र में विनिर्माण, निर्यात, डिजाइन, नवाचार और एमएसएमई भागीदारी को बढ़ावा देगी।
भारत ने खिलौना क्षेत्र में आयात निर्भरता घटाकर निर्यात बढ़ाया है। इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित आधारित खिलौनों, स्मार्ट खिलौनों, पर्यावरण अनुकूल खिलौनों और उच्च मूल्य वाले खेल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति के तहत 30 प्रतिशत पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 50 करोड़ रुपये होगी। पांच वर्षों तक 70 प्रतिशत परिचालन सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति वर्ष 3 करोड़ रुपये होगी। इस नीति का लक्ष्य 5,000 करोड़ रुपये का निवेश और 25,000 रोजगार सृजित करना है।
5. हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में रीसाइक्लिंग सुविधा प्रोत्साहन नीति तैयार करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार ई-वेस्ट संग्रहण, अलगाव, पुनर्चक्रण, प्रमाणन और औपचारिक रीसाइक्लिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करेगी, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया जा सके।
यह नीति भारत सरकार के चक्रीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों, ई-वेस्ट प्रबंधन नियम 2022 और सतत औद्योगिक विकास की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ई-वेस्ट भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में हर वर्ष लगभग 17.5 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट उत्पन्न होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में चला जाता है। इस नीति के माध्यम से हरियाणा इस चुनौती को अवसर में बदलना चाहता है।
नीति का उद्देश्य ई-वेस्ट क्षेत्र को संगठित करना, हरित रोजगार सृजित करना और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नवीनतम उपकरणों के लिए कच्चे माल में बदलना है। नीति के तहत 30 प्रतिशत पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 25 करोड़ रुपये होगी। पांच वर्षों तक 70 प्रतिशत परिचालन सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी। हरियाणा में पंजीकृत रीसाइक्लर इकाइयों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी।
6. हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति सितंबर 2025 में स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें गुरुग्राम और हरियाणा को विश्व की वैश्विक क्षमता केंद्र राजधानी बनाने के लिए समर्पित नीति तैयार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी।
भारत में लगभग 1,700 वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें करीब 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा में पहले से 270 से अधिक ऐसे केंद्र मौजूद हैं। नई नीति के माध्यम से अगले 100 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों को हरियाणा में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए समर्पित वैश्विक क्षमता केंद्र मिशन, गुरुग्राम में एकल खिड़की डेस्क, निवेशक मिलान मंच और सलाहकार परिषद बनाई जाएगी। नीति के तहत गुरुग्राम और अन्य जिलों के लिए अलग-अलग सहायता प्रावधान किए गए हैं। परिचालन सहायता 5 से 9 वर्षों तक दी जाएगी, जिसकी सीमा 15 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी। डीएसआईआर/सीएसआईआर से मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता दी जाएगी।
7. हरियाणा आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकी नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौद्योगिकी नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय एआई मिशन और राज्य में उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इसके माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी सक्षम सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और बैंडविड्थ आधारित सेवाओं में निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित किया जाएगा।
हरियाणा में पहले से 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक आकार का सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी सक्षम सेवा क्षेत्र है। नई नीति का उद्देश्य हरियाणा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों का प्रमुख केंद्र बनाना है। गुरुग्राम में वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र और पंचकूला में हरियाणा उन्नत कंप्यूटिंग सुविधा स्थापित की जाएगी। 50,000 से अधिक पेशेवरों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे क्षेत्रों में तीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र को 10 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सहायता और 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक परिचालन सहायता दी जाएगी। नीति के तहत 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता और पांच वर्षों तक 50 से 70 प्रतिशत तक परिचालन सहायता दी जाएगी।
8. हरियाणा एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में एवीजीसी-एक्सआर नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों में स्टूडियो, सामग्री निर्माण, बौद्धिक संपदा और कौशल विकास को बढ़ावा देगी।
केंद्रीय बजट में रचनात्मक अर्थव्यवस्था को अंरिंज इकॉनमी के रूप में महत्व दिया गया है। हरियाणा इस क्षेत्र में शुरुआती बढ़त लेना चाहता है। भारत के एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में 2030 तक 20 लाख रोजगार सृजित करने की क्षमता है।
नीति के तहत 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 50 करोड़ रुपये होगी। राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के सहयोग से तीन उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे। इनमें एक गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया के लिए तथा दो एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, कॉमिक्स और एक्सआर के लिए होंगे।
9. न्यू हरियाणा डेटा सेंटर नीति 2026
मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट न्यू हरियाणा डेटा सेंटर नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में डेटा सेंटर नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, 5जी सेवाओं और डिजिटल शासन के लिए जरूरी डेटा अवसंरचना को मजबूत करेगी।
आज हर डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमता मॉडल और सरकारी डिजिटल सेवा डेटा अवसंरचना पर निर्भर है। हरियाणा राष्ट्रीय राजधानी से निकटता, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, 500 प्रतिशत तक फ्लोर एरिया रेश्यो में छूट, दोहरी ग्रिड आपूर्ति और आवश्यक सेवा का दर्जा देकर डेटा सेंटर निवेशकों को आकर्षित करेगा।
10 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले हाइपर डेटा सेंटर को 20 प्रतिशत पूंजीगत सहायता, जिसकी सीमा 25 करोड़ रुपये होगी, और 50 प्रतिशत परिचालन सहायता, जिसकी सीमा 8 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी, दी जाएगी। 1 से 10 मेगावाट क्षमता वाले कौर डेटा सेंटर को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता मिलेगी। 20 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले डेटा सेंटर पार्कों को अतिरिक्त सहायता और ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सहायता दी जाएगी।
10. हरियाणा एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति 2026
मंत्रिमंडल ने हरियाणा एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति 2026 को भी मंजूरी दी। यह नीति किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है। हरियाणा के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़े।
नीति के तहत राज्य में फूड प्रोसेसिंग इकाइयों, कोल्ड चेन अवसंरचना, फूड पार्क, पैकेजिंग इकाइयों, फूड टेस्टिंग लैब और इन्क्यूबेशन सेंटरों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों, एफपीओ, प्रोसेसिंग इकाइयों और बाजारों के बीच मजबूत संपर्क बनेगा। फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
इस नीति के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने और लगभग 30,000 रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति वर्ग, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिकों, निर्यात उन्मुख इकाइयों और विदेशी निवेशकों के साथ संयुक्त उपक्रमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। फूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा।
11. पहली 9 नीतियों में साझा प्रोत्साहन व्यवस्था
एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति को छोड़कर अन्य 9 नीतियों में साझा प्रोत्साहन व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली इकाइयों को 10 वर्षों तक प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक रोजगार सृजन सब्सिडी मिलेगी। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता 1.20 लाख रुपये तक होगी।
हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति करने वाली इकाइयों को पांच वर्षों तक नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों के ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी जाएगी। घरेलू इकाइयों के स्थानांतरण के लिए 5 करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय इकाइयों के स्थानांतरण के लिए 10 करोड़ रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है।
निर्यात, हरित ऊर्जा, शून्य द्रव अपशिष्ट प्रणाली और पेटेंट व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। घरेलू पेटेंट के व्यावसायीकरण पर 50 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर 1 करोड़ रुपये तक सहायता मिलेगी। भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना या अन्य प्रमुख योजनाओं का लाभ लेने वाली इकाइयां राज्य के सामान्य प्रोत्साहन पैकेज के बजाय भारत सरकार से प्राप्त राशि पर 50 प्रतिशत राज्य टॉप-अप का विकल्प चुन सकेंगी।
निजी औद्योगिक पार्क विकसित करने वाले डेवेलपर्स को पूंजीगत सब्सिडी या शुद्ध एसजीएसटी प्रतिपूर्ति में से विकल्प चुनने की सुविधा दी जाएगी। ऐसे पार्कों को 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति भी मिलेगी, जिसकी सीमा प्रति पार्क 45 करोड़ रुपये होगी। विस्तार परियोजनाओं के लिए पात्रता सीमा को सरल कर मौजूदा अचल पूंजी निवेश के 25 प्रतिशत तक कर दिया गया है और रोजगार तैयारी कार्यक्रम को छह माह तक बढ़ाया गया है।
इन नीतियों की विशेषता केवल प्रोत्साहनों में नहीं, बल्कि इनके पीछे की समग्र सोच में है। सेमीकंडक्टर से लेकर रचनात्मक उद्योगों तक, जीवनरक्षक दवाओं से लेकर हरित रीसाइक्लिंग तक, डिजिटल अवसंरचना से लेकर कृषि आधारित उद्योगों तक, ये नीतियां आधुनिक हरियाणा की नई औद्योगिक दिशा तय करेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा निवेश, रोजगार, निर्यात, नवाचार और ग्रामीण समृद्धि के अगले चरण में देश का अग्रणी राज्य बने और प्रधानमंत्री के विकसित भारत- 2047 का सिरमौर बने।






