हरियाणा मंत्रिमंडल ने नगर पालिका सीमा के भीतर पुनर्वास योजना में स्थित औद्योगिक भूखंडों के नए उप-विभाजन तथा पहले से अवैध रूप से उप-विभाजित औद्योगिक भूखंडों के नियमितीकरण के लिए नीति को मंजूरी दी
चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसमें इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के नए सब-डिवीजन और नगर निगम सीमा के अंदर पुनर्वास योजना में मौजूद गैर-कानूनी सब-डिवाइडेड इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को रेगुलर करने के लिए एक पॉलिसी बनाने का प्रस्ताव है।
यह नीति उन औद्योगिक भूखंड मालिकों पर लागू होगी, जो नए उप-विभाजन की अनुमति प्राप्त करना चाहते हैं तथा उन औद्योगिक भूखंडों को नियमित करवाना चाहते हैं, जिन्हें पहले ही अवैध रूप से उप-विभाजित किया जा चुका है। ये भूखंड नगर पालिका सीमा के भीतर भारत सरकार के पुनर्वास मंत्रालय द्वारा विकसित पुनर्वास योजना क्षेत्रों में स्थित हैं।
नीति के अनुसार, मूल औद्योगिक भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ होना चाहिए तथा उसका संपर्क कम से कम 12 मीटर चौड़ी मौजूदा सड़क से होना आवश्यक है। प्रत्येक उप-विभाजित अथवा नए उप-विभाजित भूखंड का न्यूनतम आकार 500 वर्ग गज से कम नहीं होगा।
इसके अतिरिक्त, सभी उप-विभाजित भूखंडों में हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के प्रावधानों के अनुरूप परिसर के भीतर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
नए उप-विभाजन अथवा पहले से अवैध रूप से उप-विभाजित भूखंडों के नियमितीकरण के इच्छुक आवेदकों को अपना आवेदन संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त, नगर निगम तथा नगर परिषद या नगर समिति क्षेत्रों में जिला नगर आयुक्त को प्रस्तुत करना होगा।
आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी निर्धारित नीति मानकों के अनुसार मामले की जांच करेगा और आवेदन प्राप्ति की तिथि से 60 दिनों के भीतर निर्णय लेगा।
आवेदक को समय-समय पर जारी नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तथा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सभी निर्देशों, मानकों और दिशानिर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।
सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने की तिथि से 60 दिनों के भीतर शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक के समक्ष अपील दायर कर सकेगा।
हरियाणा मंत्रिमंडल ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (ग्रुप-बी) राज्य सेवा विनियम, 1999 में संशोधन को दी मंजूरी
एचपीएससी के लिए सुपरिंटेंडेंट के दो तथा अकाउंट्स ऑफिसर के एक पद को स्वीकृति दी
अब दसवीं कक्षा तक हिंदी या संस्कृत में से किसी एक विषय का होना पर्याप्त होगा
चंडीगढ़, 18 मई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग (ग्रुप-बी) राज्य सेवा विनियम, 1999 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। यह बदलाव मौजूदा नियमों को नई स्वीकृत पद संख्या और वर्तमान सरकारी नियमों के अनुसार अपडेट करने के लिए किया गया है।
यह निर्णय हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में परीक्षाओं तथा अन्य संबंधित कार्यों की संख्या में वृद्धि के कारण आयोग पर बढ़ते कार्यभार को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
संशोधन के तहत एचपीएससी में सुपरिंटेंडेंट के दो नए पद और अकाउंट्स ऑफिसर का एक नया पद जोड़ा जाएगा। इसके बाद सुपरिंटेंडेंट पदों की संख्या 5 से बढ़कर 7 हो जाएगी, जबकि अकाउंट्स ऑफिसर के एक पद को भी शामिल किया गया है।
मंत्रिमंडल ने सेवा नियमों में भी कुछ बदलावों को मंजूरी दी है, ताकि वे वर्तमान सरकारी नीतियों और नियमों के अनुरूप हो सकें। पात्रता, अनुशासन और सजा से जुड़े प्रावधानों को हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के अनुरूप किया गया है।
इसके अलावा हिंदी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा नियम भी बदला गया है। पहले दसवीं कक्षा तक हिंदी विषय में पढ़ाई अनिवार्य थी लेकिन अब दसवीं कक्षा में हिंदी या संस्कृत में से कोई एक विषय होना या उच्च शिक्षा में हिंदी विषय होना पर्याप्त माना जाएगा।
इन बदलावों से एचपीएससी का प्रशासनिक कामकाज और मजबूत होगा तथा राज्य में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी पदों की भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज बनेगी।
2988 एकड़ भूमि के हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 23(ए) के तहत देय स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 78 एवं 79 के तहत देय पंजीकरण शुल्क को माफ करने की मंजूरी दी गई।
चंडीगढ़, 18 मई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के विकास हेतु हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में 2988 एकड़ भूमि के हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 23(ए) के तहत देय स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 78 एवं 79 के तहत देय पंजीकरण शुल्क को माफ करने की मंजूरी दी गई।
अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) विकसित करने के उद्देश्य से कुल 2988 एकड़ भूमि, जिसमें प्रथम चरण में 1605 एकड़ तथा द्वितीय चरण में 1383 एकड़ भूमि शामिल है, हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) अर्थात नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव है। इस हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के तहत स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में छूट/माफी प्रदान की जाएगी।
हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसमें अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) के विकास के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) अर्थात नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में 2988 एकड़ भूमि — जिसमें प्रथम चरण में 1605 एकड़ तथा द्वितीय चरण में 1383 एकड़ भूमि शामिल है — के हस्तांतरण पर स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में छूट/माफी प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क को माफ करने से लगभग 132.41 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ेगा, जिसमें लगभग 131.91 करोड़ रुपये स्टाम्प शुल्क तथा 50 हजार रुपये पंजीकरण शुल्क शामिल हैं, जिन्हें माफ किया जाना है।
हिसार एयरपोर्ट पर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को एक बड़े औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किए जाने की परिकल्पना की गई है, जिससे योजनाबद्ध औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित होंगे, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्र एवं राज्य के आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।
यह परियोजना हरियाणा में कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तथा व्यापार सुगमता को भी बढ़ावा देने की संभावना रखती है। चूंकि भूमि का हस्तांतरण एक सरकारी विभाग द्वारा विशेष रूप से AKIC परियोजना के क्रियान्वयन हेतु एक सरकारी समर्थित विशेष प्रयोजन वाहन के पक्ष में किया जाना प्रस्तावित है, इसलिए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क लगाए जाने से परियोजना पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जबकि व्यावहारिक रूप से राज्य को इससे कोई अतिरिक्त राजस्व लाभ प्राप्त नहीं होगा। ऐसे में शुल्क में छूट/माफी प्रदान करने से परियोजना का सुचारु एवं किफायती क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा तथा औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना के समयबद्ध कार्यान्वयन को समर्थन मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 9 के अंतर्गत राज्य सरकार को ऐसे शुल्कों में आंशिक अथवा पूर्ण माफी प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है। यह प्रावधान सरकार को भविष्य अथवा पूर्व प्रभाव से देय शुल्क को कम करने अथवा माफ करने की शक्ति प्रदान करता है।
एफडीए विभाग में अतिरिक्त पद सृजित करने संबंधी रेशनलाइजेशन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी
एफडीए विभाग में वर्तमान 582 स्वीकृत पदों की संख्या को बढ़ाकर 1,424 किया गया
प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार के लिए मुख्यालय को तीन विंग में विभाजित किया
चंडीगढ़, 18 मई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) विभाग में अतिरिक्त पद सृजित करने संबंधी रेशनलाइजेशन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी प्रदान की गई।
रेशनलाइजेशन आयोग ने विभाग के बढ़ते कार्यभार और नियामकीय जिम्मेदारियों का आकलन करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए एफडीए विभाग को व्यापक रूप से मजबूत करने की सिफारिश की है। इसके अंतर्गत आयोग ने एफडीए विभाग में वर्तमान 582 स्वीकृत पदों की संख्या को बढ़ाकर 1424 करने की सिफारिश की है ताकि विभाग की कार्यक्षमता और प्रवर्तन क्षमता को बढ़ाया जा सके।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में, एफडीए विभाग प्रदेश में लगभग 756 दवा निर्माण इकाइयों, 40565 थोक एवं खुदरा दवा दुकानों, 27139 फूड लाइसेंस तथा 84095 पंजीकृत फूड बिजनेस ऑपरेटर्स की निगरानी एवं विनियमन कर रहा है।
इसके साथ ही आयोग ने एफडीए में विशेषज्ञता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक बेहतर बनाने के लिए मुख्यालय स्तर के कार्यालय का पुनर्गठन करते हुए इसे तीन अलग-अलग विंग- ड्रग विंग, फूड विंग और एडमिनिस्ट्रेटिव विंग में विभाजित करने की भी सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त गुणवत्तापूर्ण परीक्षण और नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्ण रूप से कार्यशील दो ड्रग टेस्टिंग तथा फूड टेस्टिंग प्रयोगशालाएं स्थापित करने का भी प्रस्ताव किया गया है।
एफडीए विभाग मुख्य रूप से दो प्रमुख केंद्रीय कानूनों, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 को लागू करने के लिए जिम्मेदार है। इन कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को उपलब्ध करवाए जाने वाले खाद्य पदार्थ और दवाइयां निर्धारित गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों, क्योंकि घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद आमजन के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।
हरियाणा मंत्रिमंडल ने गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की संशोधित परियोजना लागत, पूरक रिपोर्टों और विश्व बैंक से ऋण के प्रस्ताव को दी मंजूरी
कुल परियोजना लागत को 5,452.72 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,266.54 करोड़ रुपये करने के संशोधन को भी दी है मंजूरी
गुरुग्राम में शहरी गतिशीलता (अर्बन मोबिलिटी) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक बहुप्रतीक्षित मेट्रो कनेक्टिविटी परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने की दिशा में है एक बड़ा कदम
गुरुग्राम सेक्टर-5 स्टेशन से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित मेट्रो स्पर के संबंध में पूरक रिपोर्ट को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 18 मई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की संशोधित लागत, रैपिड मेट्रो और गुरुग्राम रेलवे स्टेशन स्पर (लिंक) के साथ जुड़ाव से संबंधित पूरक रिपोर्ट और गुरुग्राम मेट्रो रेल परियोजना के पूरे सॉफ्ट लोन (सस्ते ऋण) के हिस्से को विश्व बैंक के माध्यम से वित्तपोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
यह निर्णय गुरुग्राम में शहरी गतिशीलता (अर्बन मोबिलिटी) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक बहुप्रतीक्षित मेट्रो कनेक्टिविटी परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी गुरुग्राम तक 28.50 किलोमीटर लंबी मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मैसर्स राइट्स द्वारा तैयार की गई थी, जिसमें 27 स्टेशन शामिल हैं। इसे 13 अगस्त 2020 को हरियाणा मंत्रिपरिषद द्वारा और बाद में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था।
मंत्रिमंडल ने कुल परियोजना लागत को 5,452.72 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10,266.54 करोड़ रुपये करने के संशोधन को मंजूरी दे दी है। लागत में इस वृद्धि का मुख्य कारण 2019 और 2023 के बीच कीमतों में बढ़ोतरी, जीएसटी दरों में संशोधन, मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी कॉरिडोर के लिए स्वतंत्र नियोजन आवश्यकताएं, एक पूर्ण डिपो और अतिरिक्त रोलिंग स्टॉक की आवश्यकता, आरआरटीएस एलाइनमेंट में बदलाव और गुरुग्राम रेलवे स्टेशन के लिए एक मेट्रो स्पर का प्रावधान है।
संशोधित लागत संरचना में कीमतों में बढ़ोतरी और जीएसटी बदलावों से उत्पन्न संशोधित परियोजना लागत के लिए 7,098.70 करोड़ रुपये, अतिरिक्त स्वतंत्र कॉरिडोर आवश्यकताओं के लिए 947.06 करोड़ रुपये और सेक्टर-5 से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक मेट्रो स्पर के निर्माण के लिए 454.32 करोड़ रुपये शामिल हैं।
रैपिड मेट्रो के साथ जुड़ाव से संबंधित पूरक रिपोर्ट को भी मंजूरी दी गई। यह रिपोर्ट रैपिड मेट्रो के साथ जुड़ाव के परिदृश्य में आए बदलावों के बाद गुरुग्राम मेट्रो को एक स्वतंत्र परियोजना के रूप में विकसित करने के लागत प्रभावों को रेखांकित करती है। इसमें सेक्टर-33, गुरुग्राम में 22.86 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर फैले एक डिपो और संबंधित सुविधाओं के विकास के प्रावधान शामिल है।
इसके अलावा मंत्रिमंडल ने सेक्टर-5 स्टेशन से गुरुग्राम रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित मेट्रो स्पर के संबंध में पूरक रिपोर्ट को मंजूरी दी। लगभग 1.80 किलोमीटर की लंबाई वाले इस प्रस्तावित स्पर का उद्देश्य मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी में सुधार करना और गुरुग्राम में मेट्रो व रेलवे सेवाओं के बीच निर्बाध यात्रा जुड़ाव की सुविधा प्रदान करना है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में मंत्रिमंडल ने परियोजना के पूरे सॉफ्ट लोन घटक को विश्व बैंक के माध्यम से वित्त पोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। 5,452.72 करोड़ रुपये की मूल स्वीकृत परियोजना लागत में 2,688.57 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन घटक शामिल था, जिसमें से 1,075.428 करोड़ रुपये विश्व बैंक से और 1,613.14 करोड़ रुपये यूरोपीय निवेश बैंक (ईआईबी) से प्रस्तावित थे।
मंत्रिमंडल को अवगत कराया गया कि ईआईबी से पुष्टि मिलने में लगातार हो रही देरी के कारण गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड के बोर्ड ने 13 अक्टूबर, 2025 को आयोजित अपनी बैठक में निर्णय लिया था कि और अधिक देरी होने की स्थिति में, परियोजना की समय-सीमा पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए ईआईबी द्वारा वित्तपोषित किए जाने वाले हिस्से को भी विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को बाद में 12 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री से मंजूरी मिल गई थी।
मंत्रिमंडल ने परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक समझौतों और अन्य संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रशासनिक सचिव नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग और हरियाणा को नोडल अधिकारी के रूप में नामित करने को भी मंजूरी दी।
इसके अलावा मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी को केंद्र सरकार के साथ परामर्श के दौरान यदि आवश्यकता हो तो किसी भी बदलाव या संशोधन को मंजूरी देने, या परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने के लिए अधिकृत किया है।
कैबिनेट ने बाबा श्री खाटू श्याम श्राइन बोर्ड, चुलकाना धाम की स्थापना और मसौदा अध्यादेश को मंजूरी दी
चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में बाबा श्री खाटू श्याम श्राइन बोर्ड, चुलकाना धाम, समालखा, जिला पानीपत की स्थापना से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही “हरियाणा बाबा श्री खाटू श्याम चुलकाना धाम श्राइन अध्यादेश, 2026” नामक मसौदा अध्यादेश को भी मंजूरी दी गई है।
यह निर्णय चुलकाना धाम स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के बेहतर प्रबंधन, प्रशासन, विकास और रखरखाव को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। यह स्थल हरियाणा और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का एक प्रमुख केंद्र है।
गौरतलब है कि श्राइन बोर्ड की स्थापना और “द हरियाणा बाबा श्री खाटू श्याम चुलकाना धाम श्राइन विधेयक, 2025” से संबंधित एक प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने अपनी 23 जनवरी, 2025 को हुई बैठक में मंज़ूरी दी थी। हालांकि, बाद में यह मामला एक सिविल रिट याचिका के माध्यम से पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष विचारार्थ आया।
कैबिनेट को सूचित किया गया कि 14 मई, 2026 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उक्त रिट याचिका का निपटारा कर दिया। यह निपटारा तब हुआ जब हरियाणा के महाधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष यह प्रस्तुत किया कि प्रस्तावित श्राइन बोर्ड में श्री श्याम मंदिर सेवा समिति (पंजीकृत), चुलकाना धाम के एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा।
उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, हरियाणा सरकार ने मसौदा कानून में एक संशोधन को मंज़ूरी दी है, जिसमें प्रस्तावित श्राइन बोर्ड के सदस्यों में से श्री श्याम मंदिर सेवा समिति (पंजीकृत), चुलकाना धाम के एक प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में नामित करने का प्रावधान शामिल किया गया है।
कैबिनेट ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 7 मई, 2025 के फैसले के अनुपालन में मसौदा विधेयक में एक और संशोधन को भी मंजूरी दे दी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और शहरी स्थानीय निकाय विभाग से संबंधित विभिन्न अधिनियमों में पहले से किए गए संशोधनों के अनुसार, मसौदा कानून के संबंधित खंड से भेदभावपूर्ण शब्द “या यदि वह बहरा, गूंगा है या संक्रामक कुष्ठ रोग या किसी उग्र संक्रामक रोग से पीड़ित है” हटा दिए गए हैं।
कैबिनेट को आगे जानकारी दी गई कि फ़िलहाल राज्य विधानसभा का सेशन नहीं चल रहा है और मामले की तात्कालिकता, इस मुद्दे से जुड़ी धार्मिक भावनाएं और श्राइन बोर्ड के शीघ्र गठन के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत एक अध्यादेश जारी करना आवश्यक हो गया है।
बाबा श्री खाटू श्याम श्राइन बोर्ड की स्थापना से चुलकाना धाम के व्यवस्थित प्रबंधन और विकास को सुनिश्चित करने, भक्तों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने और इस तीर्थ स्थल के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के संरक्षण को मजबूत करने की उम्मीद है।
हरियाणा कैबिनेट ने ‘मेवात कैडर’ में पीजीटी पदों पर भर्ती के लिए विशेष प्रावधान को मंजूरी दी
‘मेवात कैडर’ के रिक्त पदों पर ‘शेष हरियाणा कैडर’ के योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का मिलेगा अवसर
चंडीगढ़, 18 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित हरियाणा कैबिनेट की बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण एजेंडा को मंजूरी प्रदान की गई। यह एजेंडा ‘मेवात कैडर’ में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) के पदों पर भर्ती से संबंधित है। यह निर्णय मेवात क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग में दो अलग-अलग कैडरों का गठन किया गया था, जिनमें ‘मेवात कैडर’ और ‘शेष हरियाणा कैडर’ शामिल हैं। वर्ष 2024 में हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा दोनों कैडरों में 20 विषयों के कुल 3069 पीजीटी पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे। इनमें 282 पद मेवात कैडर के लिए तथा 2787 पद शेष हरियाणा कैडर के लिए निर्धारित किए गए थे।
भर्ती प्रक्रिया के दौरान दोनों कैडरों के लिए एक समान परीक्षा आयोजित की गई। अधिकतर मेधावी अभ्यर्थियों द्वारा अपनी प्राथमिकता ‘शेष हरियाणा कैडर’ को दिए जाने के कारण ‘मेवात कैडर’ के लिए चयनित उम्मीदवारों की संख्या कम हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप ‘मेवात कैडर’ के अनेक पद रिक्त रहने की संभावना उत्पन्न हो गई थी।
इसी स्थिति के समाधान हेतु कैबिनेट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग को सलाह दी है कि ‘शेष हरियाणा कैडर’ के चयनित अभ्यर्थियों के बाद मेरिट सूची में आने वाले पात्र उम्मीदवारों को ‘मेवात कैडर’ के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विचार एवं अनुशंसा की जाए। यह निर्णय मेवात क्षेत्र में शिक्षकों की कमी को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा तथा वहां के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।








