मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हुए निर्णय -2

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कैबिनेट ने पिछली अधिसूचना के तहत 2024-25 में जारी BC-A/BC-B नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता को मंजूरी दी

एचपीएससी  भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को होगा लाभ

चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में गत 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान जारी BC-A और BC-B नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता देने के संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट द्वारा लिया गया यह निर्णय हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2024 में विभिन्न विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) के 3069 पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापनों के मद्देनज़र लिया गया है। गत 23 जुलाई, 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के अनुसार, BC-A और BC-B श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को नवीनतम सरकारी निर्देशों और 16 जुलाई, 2024 की अधिसूचना के अनुरूप नए प्रमाणपत्र जमा करने की आवश्यकता थी।

16 जुलाई, 2024 की नई अधिसूचना जारी होने के बाद, 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत पहले जारी किए गए प्रमाण पत्रों को एचपीएससी द्वारा वैध नहीं माना जा रहा था, जिसके परिणामस्वरूप कई आवेदकों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। इसके बाद, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष कई रिट याचिकाएँ दायर की गईं।

कैबिनेट को सूचित किया गया कि 16 जुलाई, 2024 की अधिसूचना में किया गया मुख्य बदलाव केवल क्रीमी लेयर की स्थिति निर्धारित करने के लिए वार्षिक आय सीमा को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने से संबंधित है। इसलिए, जो उम्मीदवार 2021 की अधिसूचना के अनुसार नॉन-क्रीमी लेयर के अंतर्गत वर्गीकृत थे, वे संशोधित मानदंडों के तहत भी नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी में ही बने रहेंगे।

इसे ध्यान में रखते हुए, कैबिनेट ने मंजूरी दी कि 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान, 23 जुलाई, 2024 से पहले जारी किए गए BC-A/BC-B (नॉन-क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्रों को सभी प्रयोजनों के लिए वैध माना जाएगा। इस निर्णय से प्रभावित उम्मीदवारों को काफी राहत मिलने और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

हरियाणा कैबिनेट ने एनसीआर में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एग्रीगेटर और/ या डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नए नियमों को मंज़ूरी दी

1 जनवरी, 2026 से एनसीआर  बेड़े में सिर्फ़ सीएनजीईवी और स्वछ्तम ईंधन वाली गाड़ियां ही शामिल होंगी

चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के तहत मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज़ द्वारा जारी दिशानिर्देश और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निर्देशों के अनुसार एग्रीगेटर लाइसेंस देने के लिए नियमों को मंज़ूरी दी गई। यह फैसला राज्य के एनसीआर जिलों में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और वायु गुणवता को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है।

संशोधित नियमों के तहत 1 जनवरी, 2026 से राष्ट्रीय राजधानी इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल  नयी   गाड़ियां आवश्यक तौर पर सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां या किसी दूसरे स्वछ्तम ईंधन पर आधारित होंगी। इसके अलावा,  एनसीआर इलाकों में मौजूदा बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी या इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर, ऑटो-रिक्शा को ही शामिल करने की अनुमति होगी।

कैबिनेट ने राज्य में चल रहे ऐप-बेस्ड पैसेंजर एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के लिए हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के रूल 86 ए में बदलाव की भी मंज़ूरी दी।

नए नियमों में एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए आवश्यक लाइसेंसिंग, ड्राइवरों और गाड़ियों के लिए ऑनबोर्डिंग नियम, पैसेंजर सुरक्षा के उपाय, शिकायत सुलझाने के तरीके, प्रेरणा और पुनरावलोकन प्रशिक्षण कार्यक्रम, ड्राइवरों और पैसेंजर के लिए इंश्योरेंस कवरेज, ऐप्स के लिए साइबर सिक्योरिटी का पालन और किराए का रेगुलेशन शामिल हैं।

नियमों अनुसार एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और ऑनबोर्डेड ड्राइवरों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य होगा।

इन नियमों के तहत गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना भी ज़रूरी है। एग्रीगेटर्स को पैसेंजर की मदद और शिकायत दूर करने के लिए 24×7 घण्टे कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी बनाने होंगे।

पारदर्षी और जिम्मेवारी को मज़बूत करने के लिए नियमों में वाहन और सारथी पोर्टल के ज़रिए गाड़ी और ड्राइवर की डिटेल्स के वाहन का डिजिटल प्रमाणीकरण का प्रबंध करना है। एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को ऑनबोर्डेड ड्राइवरों और गाड़ियों का डिटेल्ड डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा।

बैठक में मंत्रिपरिषद को अवगत करवाया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रोसेस निर्धारित पोर्टल cleanmobility.haryanatransport.gov.in. के ज़रिए संचालन किया जाएगा। नए फ्रेमवर्क में ड्राइवर वेलफेयर, किराया शेयरिंग, सेफ्टी स्टैंडर्ड, दिव्यांगजन-फ्रेंडली गाड़ियों को शामिल करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने से जुड़े नियम भी शामिल किए हैं।

हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग के नए सेवा नियमों 2026 को दी मंत्रिमंडल ने मंजूरी

चंडीगढ़, 18 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अधीक्षक (फील्ड कैडर) के पद के लिए नए सेवा नियमों, यानी ‘हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग, उप-कार्यालय कॉलेज कैडर (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 2026’ को मंजूरी दी गई। ये नियम आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में उनके प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।

नए नियमों के अनुसार नियुक्ति के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता और अनुभव (यदि कोई हो), पदोन्नति (प्रमोशन) और स्थानांतरण (ट्रांसफर) या प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से तय किया जाएगा।

 उप-अधीक्षक (डिप्टी सुपरिटेंडेंट) के रूप में एक वर्ष का अनुभव या सहायक (असिस्टेंट) के रूप में 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है।

अधीक्षक (सुपरिंटेंडेंट) के रूप में एक वर्ष का अनुभव, मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री, और मैट्रिक (दसवीं) में एक विषय के रूप में हिंदी या संस्कृत, या उच्च शिक्षा में एक विषय के रूप में हिंदी विषय होना अनिवार्य है।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत वन-टाइम, वन-वे स्विच सुविधा को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के संबंध में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत वन-टाइम, वन-वे स्विच सुविधा (One-time, One-way Switch Facility) को मंजूरी प्रदान की गई।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 24 जनवरी, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत एक विकल्प के रूप में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की थी, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी हुई। इसी प्रकार, भारत सरकार के अनुरूप हरियाणा सरकार ने भी 2 जुलाई, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की थी, जो 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी हुई।

इसके उपरांत, भारत सरकार ने 25 अगस्त, 2025 के कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में वन-टाइम, वन-वे स्विच सुविधा प्रदान की।

इसके मद्देनजर  उक्त निर्णय को राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के संबंध में 2 जुलाई, 2025 को अधिसूचित सूचना का भी संदर्भ लिया जाएगा कि एक साथ एक ही प्रकार से यूनिफाइड पेंशन स्कीम को हरियाणा नई पेंशन स्कीम की उपलब्धता सभी राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए होगी जिन्होंने यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प चुना है।

यह स्विच सुविधा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प चुनने वाले कर्मचारी किसी भी समय प्रयोग कर सकेंगे, किन्तु अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) की तिथि से एक वर्ष पूर्व तक ही इसका लाभ लिया जा सकेगा। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्विच सुविधा का उपयोग नहीं किया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी डिफॉल्ट रूप से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के अंतर्गत ही बना रहेगा।

इसके अतिरिक्त, जिन मामलों में कर्मचारी को दंडस्वरूप सेवा से हटाया गया हो, बर्खास्त किया गया हो या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई हो अथवा जिन मामलों में भारी जुर्माना हो, विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित या प्रस्तावित हो, उनमें यह स्विच सुविधा अनुमन्य नहीं होगी।

हरियाणा कैबिनेट ने अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों के नियमितीकरण हेतु नीति संशोधनों को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 18 मई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा प्रबंधन नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना की कमी वाले क्षेत्र (विशेष प्रावधान) संशोधन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को लागू करने हेतु संशोधनों को मंजूरी दी गई। इस निर्णय का उद्देश्य राज्यभर में अनधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण को सुगम बनाना तथा ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है।

कैबिनेट को अवगत कराया गया कि राज्य सरकार ने नगरपालिकाओं की सीमा से बाहर स्थित आधारभूत संरचना एवं नागरिक सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में हरियाणा प्रबंधन नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना अभावग्रस्त क्षेत्र (विशेष प्रावधान) अधिनियम लागू किया था। इसके बाद 19 जुलाई 2022 को नीति अधिसूचित की गई तथा 6 अप्रैल 2023 को राहत संबंधी निर्देश जारी किए गए। हालांकि, वर्तमान व्यवस्था औद्योगिक कॉलोनियों पर लागू नहीं होती थी।

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य बजट 2025 के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप सरकार ने यह निर्णय लिया कि अनधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी इसी प्रकार का लाभ दिया जाए ताकि ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा एवं नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी उद्देश्य से अधिनियम में संशोधन किए गए, जिन्हें 3 अक्टूबर 2025 को हरियाणा अधिनियम संख्या 22, 2025 के माध्यम से अधिसूचित किया गया।

स्वीकृत संशोधनों के तहत, कम से कम 10 एकड़ के निरंतर क्षेत्र में फैली, न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयों वाली तथा 3 अक्टूबर 2025 से पूर्व निर्मित औद्योगिक कॉलोनियां इस नीति के अंतर्गत पात्र होंगी।

कैबिनेट ने एक ऑनलाइन पोर्टल के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जिसके माध्यम से उद्यमी या उनके अधिकृत प्रतिनिधि आधारभूत संरचना से वंचित औद्योगिक क्षेत्रों की घोषणा तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण हेतु आवेदन कर सकेंगे।

संशोधित नीति में “अधिकृत व्यक्ति” की अवधारणा भी जोड़ी गई है, जो औद्योगिक कॉलोनी में स्थित उद्यमियों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ओर से आवेदन कर सकेगा। कैबिनेट को बताया गया कि आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए विस्तृत दस्तावेजी आवश्यकताएं, जांच प्रणाली तथा जिला स्तरीय स्वीकृति प्रक्रियाएं भी शामिल की गई हैं।

इस निर्णय से राज्य में अनधिकृत औद्योगिक क्लस्टरों में संचालित हजारों औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही इससे योजनाबद्ध आधारभूत संरचना विकास, पर्यावरणीय अनुपालन तथा हरियाणा में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

कैबिनेट ने डेयरी फार्मिंग के लिए स्वयं सहायता समूहों को ‘शामलात देह’ भूमि पट्टे पर देने को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 18 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में विकास एवं पंचायत विभाग के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (HSRLM) के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को डेयरी फार्मिंग के उद्देश्य से ‘शामलात देह’ (सामुदायिक) भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

इस उद्देश्य के लिए कैबिनेट ने ‘हरियाणा ग्राम सांझी भूमि (विनियमन) नियम, 1964’ के नियम 6 में संशोधन को संबंधित नियमों और शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है।

संशोधित प्रावधानों के बाद, ग्राम पंचायतों को हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों और स्वयं सहायता समूहों की सहकारी समितियों को डेयरी स्थापित करने के लिए 500 वर्ग गज तक की ‘शामलात देह’ भूमि पट्टे पर देने की अनुमति होगी। यह पट्टा  शुरू में पांच साल की अवधि के लिए दिया जाएगा, और डेयरी के संतोषजनक संचालन के आधार पर (जैसा कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्रमाणित किया जाएगा), इसे और तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

इस नीति को स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि वे डेयरी इकाइयों का सफलतापूर्वक संचालन करने के बाद अंततः स्वतंत्र रूप से अपनी भूमि खरीद सकें।

पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए, संबंधित उपायुक्त (Deputy Commissioner) की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी। उपायुक्त ही ग्राम पंचायतों को ऐसी भूमि पट्टे पर देने के लिए मंजूरी प्रदान करने हेतु सक्षम प्राधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

संशोधित नीति में आगे यह भी निर्धारित किया गया है कि स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उसी गाँव या ग्राम पंचायत के निवासी होने चाहिए। इसके अलावा, कोई भी स्वयं सहायता समूह भूमि आवंटन के लिए तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक कि उसके किसी सदस्य या उनके परिवार के सदस्यों (जैसा कि ‘परिवार पहचान पत्र’ – PPP के माध्यम से पहचाना गया हो) के पास 500 वर्ग गज या उससे अधिक की अपनी निजी भूमि न हो।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने अभिलेखागार विभाग सेवा नियमों में संशोधन को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 18 मई –हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा अभिलेखागार विभाग (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 1992 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई।

संशोधित नियमों के तहत “डिप्लोमा इन आर्काइव्स कीपिंग” की योग्यता के स्थान पर “डिप्लोमा इन आर्काइव्स कीपिंग अथवा डिप्लोमा इन आर्काइवल स्टडीज़ अथवा डिप्लोमा इन आर्काइव्स एंड रिकॉर्ड मैनेजमेंट अथवा उसके समकक्ष मान्यता प्राप्त डिप्लोमा” को शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थियों के लिए मैट्रिक स्तर तक हिंदी या संस्कृत का ज्ञान होना अथवा उच्च शिक्षा में हिंदी विषय का अध्ययन किया होना अनिवार्य होगा।

यह संशोधन विभाग को वर्तमान रिक्त पदों को भरने में सहायता करेगा तथा समकक्ष डिप्लोमा योग्यताओं को मान्यता देकर सहायक निदेशक के पद के लिए पात्र अभ्यर्थियों के दायरे का विस्तार करेगा।

संशोधित प्रावधान हरियाणा सरकार के राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में प्रकाशित होने के तुरंत बाद प्रभावी हो जाएंगे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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