गुरुग्राम में शिक्षा माफिया बेलगाम: गैर-मान्यता स्कूलों पर कार्रवाई में विभाग फेल

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हाई कोर्ट के आदेश ठंडे बस्ते में, अफसर गायब—अवैध स्कूलों का खेल जारी

15 अप्रैल से पहले लूट, बाद में औपचारिकता: किताब माफिया पर क्यों चुप है शिक्षा विभाग?

मान्यता की आड़ में धोखा: छोटे लाइसेंस पर बड़ी कक्षाएं, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

सूची तक नहीं दे पा रहा विभाग, कार्रवाई क्या करेगा? गुरुग्राम में शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल

गुरुग्राम। शहर में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों और महंगी किताबों की बिक्री को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह पिछले एक सप्ताह से शिक्षा विभाग के दफ्तरों—कभी ब्लॉक ऑफिस तो कभी डीईओ ऑफिस—के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।

गुरिंदरजीत सिंह का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों से मान्यता प्राप्त (अफिलिएटेड) स्कूलों की सूची सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, ताकि अभिभावकों को सही जानकारी मिल सके और वे अपने बच्चों का दाखिला सही स्कूलों में करा सकें। लेकिन विभाग के कर्मचारी हर बार यही कहकर टाल देते हैं कि यह जानकारी केवल अधिकारी ही दे सकते हैं, जो अक्सर “फील्ड में” होने का हवाला देकर उपलब्ध नहीं होते।

उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में कई स्कूल धड़ल्ले से किताबें और स्टेशनरी मनमाने दामों पर बेच रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका कहना है कि “अगर 15 अप्रैल के बाद छापेमारी होती है, तब तक सभी दाखिले हो चुके होते हैं और बच्चे महंगी किताबें खरीद चुके होते हैं। ऐसे में कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है।”

गुरिंदरजीत सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2025 में माननीय हाई कोर्ट और शिक्षा निदेशालय पंचकूला द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई और उनकी सूची सार्वजनिक करने के आदेश दिए जाने के बावजूद अब तक उन पर अमल क्यों नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सेक्टर-9 स्थित “एजुकार्स्ट इंटरनेशनल स्कूल” जैसे हालात फिर बन सकते हैं, जहां बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ था।

इस मुद्दे पर स्वयं शासन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक दिनेश पटेल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सभी निजी स्कूलों को अपनी मान्यता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी चाहिए। “यदि किसी स्कूल को केवल आठवीं तक मान्यता है तो वह केवल आठवीं तक ही पढ़ाए, दसवीं या बारहवीं तक की कक्षाएं चलाना सीधा धोखा है,” उन्होंने कहा।

दिनेश पटेल ने मांग की कि:

  • गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को तुरंत बंद किया जाए,
  • मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची सार्वजनिक कर आम जनता तक पहुंचाई जाए,
  • शिक्षा विभाग के अधिकारियों—चाहे ब्लॉक स्तर के हों या खंड स्तर के—की जिम्मेदारी तय की जाए,
  • और महंगी किताबें बेचने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

उन्होंने कहा कि “ऐसा न हो कि एडमिशन के बाद अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस करें। कार्रवाई समय पर होनी चाहिए, बाद की कार्रवाई का कोई मतलब नहीं रहता।”

गुरिंदरजीत सिंह ने अंत में कहा कि वे यह लड़ाई आम जनता और बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर तुरंत कार्रवाई कर उन्हें बंद किया जाए और “एजुकार्स्ट इंटरनेशनल स्कूल” जैसे मामलों में भी सख्ती दिखाई जाए।

अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इन गंभीर आरोपों और मांगों पर कब तक कार्रवाई करता है, या फिर अभिभावकों को इसी तरह अनिश्चितता और शोषण का सामना करना पड़ेगा।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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