बिना मान्यता चल रहे स्कूल, 11 बच्चों का भविष्य दांव पर — आखिर कब जागेगा शिक्षा विभाग? गुरिंदरजीत सिंह का सवाल
कुंभकर्णी नींद में शिक्षा विभाग! गैर-मान्यता स्कूलों पर कार्रवाई क्यों नहीं? गुरिंदरजीत सिंह ने उठाए तीखे सवाल
लिस्ट में नहीं नाम, फिर भी चल रहे बड़े स्कूल — क्या शिक्षा विभाग और स्कूलों की मिलीभगत? गुरिंदरजीत सिंह का आरोप
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद ढिलाई क्यों? फर्जी स्कूल बंद करो, बच्चों को बचाओ — इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह
गुरुग्राम: गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने जिले में चल रहे गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कड़ी चिंता जताते हुए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में सेक्टर-9 स्थित एडूक्रेस्ट इंटरनेशनल स्कूल का मामला सामने आया, जहां बिना CBSE मान्यता के 9वीं और 10वीं कक्षाओं में एडमिशन लेकर पढ़ाई कराई जा रही थी, लेकिन 11 बच्चों को बोर्ड परीक्षा दिलाने में स्कूल पूरी तरह विफल रहा। इससे साफ हो गया कि स्कूल के पास आवश्यक मान्यता ही नहीं थी और बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया गया।
इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम जैसे हाई-टेक शहर में ऐसे कई स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनके पास या तो मान्यता नहीं है या छोटी कक्षाओं की मान्यता लेकर बड़ी कक्षाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षा विभाग इन पर कार्रवाई क्यों नहीं करता? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है?
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष हरियाणा में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की स्थिति पर जब जानकारी मांगी गई, तो गुरुग्राम शिक्षा विभाग एक भी ऐसा स्कूल चिन्हित नहीं कर पाया जो बिना मान्यता के चल रहा हो। उन्होंने कहा कि या तो विभाग ने राज्य शिक्षा विभाग को सूची भेजी ही नहीं या उसे सार्वजनिक नहीं किया। आखिर ऐसा क्यों?
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि अन्य जिलों में कार्रवाई हुई, लेकिन गुरुग्राम में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सवाल किया कि बच्चों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है? शिक्षा विभाग साल भर कुंभकर्णी नींद में क्यों रहता है और केवल विवाद सामने आने के बाद ही कार्रवाई क्यों होती है?
उन्होंने कहा कि एडूक्रेस्ट इंटरनेशनल स्कूल के मामले में भी विभाग के पास लगभग एक महीने का समय था, फिर भी न तो स्कूल को बंद किया गया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। इससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
गुरिंदरजीत सिंह ने चिराग योजना और आरटीई के तहत जारी स्कूलों की सूची का भी हवाला देते हुए कहा कि कई बड़े निजी स्कूलों के नाम इन सूचियों में नहीं होते। इससे संकेत मिलता है कि वे मान्यता प्राप्त नहीं हैं, फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि अधूरी सूचियां, बच्चों की परेशानियां और विभाग की ढिलाई शिक्षा विभाग और कुछ स्कूलों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग चाहे तो एडमिशन सीजन के दौरान ही जिले में छापेमारी कर सकता है और मान्यता प्राप्त स्कूलों की पूरी सूची सार्वजनिक कर सकता है। साथ ही गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करवाकर अभिभावकों को गुमराह होने से बचाया जा सकता है। लेकिन ऐसा न करके बच्चों के भविष्य को अधर में लटकाया जा रहा है।
गुरिंदरजीत सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जब माननीय हाई कोर्ट ने गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर रोक लगाने की बात कही है, तो शिक्षा विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे फर्जी स्कूलों पर तत्काल कार्रवाई कर शिक्षा के नाम पर हो रही ठगी को बंद किया जाए, ताकि किसी भी बच्चे का भविष्य दांव पर न लगे और अभिभावकों को गुमराह कर लूटने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।








