हनुमान जी की रामभक्ति से राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती है: मोहन लाल बड़ौली

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सिर्फ शक्ति नहीं, भक्ति और समर्पण के प्रतीक हैं हनुमान जी

चंडीगढ़, 1 अप्रैल। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि हनुमान जयंती का पावन पर्व भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, प्रेरणा और संकल्प का भी अवसर है।

उन्होंने कहा कि हनुमान का जीवन केवल शक्ति और पराक्रम का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, अनुशासन और विनम्रता के सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि जब व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर किसी महान उद्देश्य के लिए समर्पित होता है, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है।

बड़ौली ने कहा कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक बल में नहीं, बल्कि सेवा भाव, आत्मसंयम और कर्तव्यनिष्ठा में निहित होती है। हनुमान ने कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहा, उनका हर कार्य राम की सेवा और उनके उद्देश्य की पूर्ति के लिए था। यही निष्काम भाव उन्हें विशिष्ट बनाता है।

उन्होंने कहा कि लंका में जाकर माता सीता का पता लगाना और संजीवनी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाना, यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने सामर्थ्य का उपयोग केवल धर्म और कर्तव्य के लिए किया। यह भावना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आज जब पार्टी कार्यकर्ता समाज और राष्ट्र सेवा में लगे हैं, तब हनुमान का जीवन उनके लिए मार्गदर्शक बनता है। एक सच्चा कार्यकर्ता निस्वार्थ सेवा, संगठन के प्रति समर्पण और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है।

उन्होंने कहा कि हनुमान को “संकटमोचन” कहा जाता है, जो हर संकट को दूर करने वाले हैं। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि एक जीवन दृष्टि है कि समस्याओं से भागने के बजाय उनका समाधान बनना चाहिए। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इसी भावना के साथ समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करता है।

बड़ौली ने अनुशासन और नेतृत्व के प्रति आस्था को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हनुमान ने सदैव राम के आदेश को सर्वोपरि माना। संगठन में भी जब कार्यकर्ता अनुशासन और एकजुटता के साथ काम करते हैं, तो सफलता सुनिश्चित होती है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में, जब व्यक्तिगत स्वार्थ बढ़ रहा है, तब हनुमान का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची सफलता सामूहिक कल्याण में निहित है। जब हम अपने कार्यों को समाज और राष्ट्रहित से जोड़ते हैं, तभी एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

अंत में मोहन लाल बड़ौली ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर सेवा, समर्पण, अनुशासन और विनम्रता के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लें और एक मजबूत, समृद्ध व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को हनुमान जयंती की शुभकामनाएं भी दीं।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

error: Content is protected !!