दोषियों पर हत्या का केस दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग, मृतकों के परिजनों को ₹50-50 लाख मुआवजा देने की मांग
“मजदूर देश का निर्माता है, कोई लावारिस वस्तु नहीं। अगर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो यूनियन पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी।” — हेमराज, जिला सचिव, (AIUTUC)
गुरुग्राम, 11 मार्च। भवन निर्माण कारीगर मजदूर यूनियन (एआईयूटीयूसी) ने गुरुग्राम में निर्माणाधीन सोसाइटी में 7 मजदूरों की मौत और जींद के सफीदों में अवैध रंग फैक्टरी में आग लगने से 9 महिला मजदूरों की मौत पर कड़ा रोष जताया है। यूनियन ने दोनों घटनाओं को प्रशासनिक लापरवाही और “सरकारी संरक्षण में की गई हत्या” बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यूनियन के जिला सचिव हेमराज ने जारी बयान में कहा कि गुरुग्राम में बिल्डर और प्रबंधन ने मुनाफे के लिए सुरक्षा मानकों की अनदेखी की। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद शवों को चुपचाप भिवाड़ी (राजस्थान) भेजना और सोसाइटी में बाउंसर तैनात करना साक्ष्य मिटाने की कोशिश को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि जींद के सफीदों में रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही रंग बनाने की फैक्टरी में आग लगने से पूजा, पिंकी, गुड्डी, ऊषा, सरिता, धनपति, ममता, कमलेश और राजबाला नाम की 9 महिला मजदूरों की मौत हो गई। यह घटना प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
हेमराज ने कहा कि श्रम विभाग और जिला प्रशासन मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यूनियन पूरे प्रदेश में निर्माण कार्य ठप कर जिला मुख्यालयों पर बड़े प्रदर्शन करेगी।
यूनियन की प्रमुख मांगें
• गुरुग्राम के बिल्डर-ठेकेदार और सफीदों फैक्टरी मालिक पर हत्या व साक्ष्य मिटाने का केस दर्ज कर गिरफ्तारी।
• मृत मजदूरों के परिवारों को ₹50-50 लाख मुआवजा और एक आश्रित को सरकारी नौकरी।
• गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों के मुफ्त इलाज और आर्थिक सहायता की व्यवस्था।
• दोनों घटनाओं की पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की निगरानी में न्यायिक जांच।
• हरियाणा में निर्माण स्थलों और फैक्ट्रियों का प्रदेशव्यापी सेफ्टी ऑडिट कर अवैध इकाइयों को तुरंत सील किया जाए।








