केयू के ब्रह्मसरोवर स्थित श्रीगुलजारी लाल नंदा केन्द्र में पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह आयोजित
कुरुक्षेत्र (प्रमोद कौशिक), 15 जनवरी। पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि भारत रत्न श्रीगुलजारी लाल नंदा भारतीय ज्ञान परम्परा के महान संत, निष्काम कर्मयोगी और उच्च नैतिक मूल्यों के प्रतीक थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, वैदिक चिंतन और आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा दी।
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज गुरुवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में ब्रह्मसरोवर स्थित श्रीगुलजारी लाल नंदा सदाचार स्थल पर उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने नंदा जी को पुष्पांजलि अर्पित की।
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब भारत की भूमि से श्रीमद्भगवद्गीता, वैदिक संस्कृति और आध्यात्मिकता की दिव्य परम्परा विश्व के हर कोने में प्रकाशमान होगी। उन्होंने कहा कि जैसे घना कोहरा सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए ढक सकता है, पर उसकी दिव्यता को स्थायी रूप से दबा नहीं सकता, उसी प्रकार भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परम्परा के बल पर देश विश्व पटल पर पुनः नेतृत्व करेगा।
उन्होंने 1966 का प्रसंग याद करते हुए कहा कि जब श्रीगुलजारी लाल नंदा देश के गृहमंत्री थे, तब गौ-हत्या बंदी की मांग को लेकर संतों, ऋषियों और मुनियों ने लाखों की संख्या में दिल्ली कूच किया था। तत्कालीन परिस्थितियों में गोली चलाने के आदेश दिए गए, जिससे आहत होकर नंदा जी ने नैतिक आधार पर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। यह उनके निष्काम कर्म और उच्च चरित्र का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि श्रीगुलजारी लाल नंदा भारतीय इतिहास में संत, योगी और ईमानदार राजनेता के रूप में स्थापित हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेना आज के समय की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने नंदा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अरुण पराशर ने नंदा जी के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि श्रीगुलजारी लाल नंदा एक दिव्य आत्मा के रूप में ऐसे नेता थे, जिनसे आज की राजनीति को सीख लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि नंदा जी भारतीय संतों एवं गुरुओं को विशेष सम्मान देते थे और राजनीतिक जीवन में अद्वितीय ईमानदारी व व्यवहार कुशलता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन मूल्यों को भी स्मरण किया।
जिला उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने नंदा जी के सरल स्वभाव, व्यक्तित्व और राष्ट्र के लिए दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, केडीबी के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार विजय सभ्रवाल, कृष्ण धमीजा, अशोक रोशा, संदीप छाबड़ा, केन्द्र की निदेशिका प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. विवेक चावला, डॉ. कुलदीप आर्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में केडीबी के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल ने अतिथियों का स्वागत किया तथा केन्द्र की निदेशिका प्रो. शुचिस्मिता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन केयू आईआईएचएस के डॉ. रामचंद्र ने किया।









