-सीईओ, जीएमडीए की अध्यक्षता में 18वीं समन्वय बैठक आयोजित
-जलभराव संभावित क्षेत्रों में संयुक्त निरीक्षण कर त्वरित समाधान के निर्देश
-एमसीजी, एमसीएम एवं एचएसआईआईडीसी को आंतरिक सीवरेज नेटवर्क को जीएमडीए के मास्टर नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश
-स्टॉर्म वाटर ड्रेन में अवैध सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट के डिस्चार्ज पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
-आंतरिक ड्रेन, सीवर लाइनों एवं उनके आउटफॉल का मास्टर ड्रेन से मैपिंग हेतु ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अनधिकृत क्षेत्रों में सीईटीपी की आवश्यकता चिन्हित कर 10 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
-एसटीपी की सघन निगरानी, नियम उल्लंघन पर जुर्माना एवं आईसीसीसी-जीएमडीए से जुड़े ऑनलाइन एनालाइज़र की संभावना
-मानसून में जलभराव से बचाव हेतु सतही ड्रेनों एवं हाईवे की डी-सिल्टिंग एवं सफाई को प्राथमिकता
-बारसाती जल निकासी व्यवस्था, बुनियादी ढांचे के कार्यों एवं नागरिक सेवाओं के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर
गुरुग्राम, 15 जनवरी: गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा की अध्यक्षता में आज जीएमडीए कार्यालय में 18वीं समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अंतर-विभागीय समन्वय एवं संयुक्त कार्रवाई से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया, एचएसवीपी की प्रशासक वैशाली सिंह, नगर निगम मानेसर के आयुक्त प्रदीप सिंह, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एचएसआईआईडीसी, जीएमडीए सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सीईओ, जीएमडीए श्री पी.सी. मीणा ने कहा, “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपसी समन्वय से कार्य करें और समयबद्ध तरीके से कार्यों को पूरा करें, ताकि नागरिक अवसंरचना सुचारू रूप से कार्य करे और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। विशेष रूप से ड्रेनेज एवं सीवरेज प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है, ताकि जलभराव और स्टॉर्म वाटर ड्रेन में सीवेज एवं अपशिष्ट के अवैध डिस्चार्ज को रोका जा सके।”
मानसून तैयारी एवं स्टॉर्म वाटर प्रबंधन
सीईओ जीएमडीए ने सभी विभागों को मानसून से पहले जलभराव संभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। समयबद्ध समाधान, संयुक्त निरीक्षण एवं समन्वित फील्ड प्रयासों के माध्यम से शीघ्र जलनिकासी और वर्षों से लंबित जलभराव समस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि मास्टर सड़कों का वर्षा जल सतही नालियों में सही ढंग से प्रवाहित हो। जीएमडीए एवं एमसीजी को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाली सभी सतही ड्रेनों को 100 प्रतिशत गाद एवं मलबा मुक्त रखने तथा उन्हें मास्टर ड्रेनों से जोड़ने के निर्देश दिए गए। मानसून से पहले संयुक्त निरीक्षण एवं प्रमाणन किया जाएगा ताकि स्टॉर्म वाटर का उचित आउटफॉल सुनिश्चित हो सके।
सीईओ जीएमडीए ने यह भी निर्देश दिए कि सभी चल रहे कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। इसके अतिरिक्त, सर्विस रोड्स के साथ हरित पट्टियों को नीचे करने एवं चिन्हित क्षेत्रों में पॉन्डेज विकसित करने जैसे उपायों पर भी चर्चा की गई, जिससे वर्षा जल का बेहतर अवशोषण हो सके।
सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट के अवैध डिस्चार्ज पर सख्ती
बैठक में एचएसआईआईडीसी के साथ बारसाती नालों में अनुपचारित सीवेज एवं रासायनिक औद्योगिक अपशिष्ट के डिस्चार्ज के मुद्दे की समीक्षा की गई। सीईओ जीएमडीए ने जीएमडीए, एमसीजी एवं एचएसआईआईडीसी के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में सख्त निगरानी के निर्देश दिए।
ईटीपी/एटीपी के नियमित परीक्षण, सैंपलिंग एवं निरीक्षण सुनिश्चित करने तथा यह जांचने के निर्देश दिए गए कि सीवरेज आउटफॉल स्टॉर्म वाटर ड्रेनों में न जाकर मास्टर सीवर नेटवर्क से जुड़े हों।
बैठक में बताया गया कि मानेसर में एचएसआईआईडीसी द्वारा 55 एमएलडी सीईटीपी पहले से संचालित है तथा सेक्टर-34 में 20 एमएलडी सीईटीपी की योजना प्रगति पर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए कि वे अनधिकृत क्षेत्रों में आवश्यक सीईटीपी की पहचान कर 10 दिनों के भीतर एमसीजी को रिपोर्ट सौंपें। इसके आधार पर एमसीजी एवं एचएसआईआईडीसी समन्वय से आगे की कार्रवाई करेंगे।
एसटीपी की निगरानी एवं अनुपालन
सेक्टर 81 से 115 के बीच स्थित एसटीपी की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। सीईओ जीएमडीए ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए कि डेवलपर्स एवं आरडब्ल्यूए द्वारा स्थापित एसटीपी की जांच की जाए कि वे मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या नहीं। गैर-कार्यशील एसटीपी पर जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी वसूली नगर निगम द्वारा संपत्ति कर के माध्यम से की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, एसटीपी पर ऑनलाइन एनालाइज़र लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिन्हें जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जाएगा, ताकि एसटीपी डेटा की सतत निगरानी की जा सके और ड्रेनेज नेटवर्क में अनुपचारित सीवेज के डिस्चार्ज को रोका जा सके।
जीएमडीए सड़कों पर ठोस एवं सीएंडडी कचरा प्रबंधन
बैठक में जीएमडीए सड़कों पर नगर निगम ठोस कचरा एवं निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे की समस्या पर भी चर्चा की गई। सीईओ जीएमडीए ने एमसीजी को कहा कि मास्टर सेक्टर सड़कों को मलबा, कचरा एवं सीएंडडी अपशिष्ट से मुक्त रखने हेतु प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए।
संयुक्त सफाई अभियान, बेहतर स्वच्छता हेतु मशीनरी की तैनाती तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए जीपीएस-सक्षम एंटी-स्मॉग गन के उपयोग पर भी चर्चा की गई।
अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर
बैठक के अंत में सीईओ जीएमडीए ने कहा कि प्रभावी नागरिक सेवा वितरण के लिए जीएमडीए, एमसीजी, एमसीएम, एचएसआईआईडीसी एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी विभागों के बीच निर्बाध समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त निरीक्षण, समन्वित योजना और नियमित अंतर-विभागीय समीक्षा को मानक प्रक्रिया बनाया जाए, ताकि कमियों की समय रहते पहचान हो सके और जमीनी स्तर पर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।








