डॉ. उषा लाल को ‘भारत–श्रीलंका हिन्दी गौरव सम्मान’ से किया गया सम्मानित

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कुरुक्षेत्र (संजीव कुमारी), 15 जनवरी। कुरुक्षेत्र निवासी एवं हरियाणा की वरिष्ठ साहित्यकार, शोधक, समीक्षक, प्रख्यात हिन्दी सेवी तथा विश्वयात्री डॉ. उषा लाल को विश्व हिन्दी दिवस–2026 के अवसर पर आयोजित द्वितीय भारत–श्रीलंका हिन्दी सम्मेलन में ‘भारत–श्रीलंका हिन्दी गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 9 से 13 जनवरी तक भारतीय उच्चायोग कोलंबो (श्रीलंका) के तत्वावधान में आयोजित हुआ। डॉ. उषा लाल को यह सम्मान हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक अवदान तथा भारत–श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संवाद को सशक्त बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

सम्मेलन की इसी श्रृंखला में 12 जनवरी को डॉ. उषा लाल ने केलनीय विश्वविद्यालय कोलंबो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया और “हिन्दी : वैश्विक संवाद की भाषा” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसे विद्वानों ने विशेष सराहना दी।

उल्लेखनीय है कि डॉ. उषा लाल अब तक सम्पूर्ण भारतवर्ष के साथ-साथ नेपाल, दुबई, अबूधाबी, हांगकांग सहित अनेक देशों की सांस्कृतिक व साहित्यिक यात्राएं सम्पन्न कर चुकी हैं। उनके अब तक आठ प्रकाशित ग्रंथ, सौ से अधिक आलेख एवं शोध पत्र साहित्य जगत को समृद्ध कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त देश के दो दर्जन से अधिक राज्यों एवं राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित एवं अभिनंदित किया जा चुका है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से साहित्य जगत में हर्ष की लहर है। उन्हें मिल रही निरंतर बधाइयाँ इस बात का प्रमाण हैं कि डॉ. उषा लाल का योगदान हिन्दी भाषा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है।

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Author: Bharat Sarathi

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