गुरुग्राम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का राज्य स्तरीय समारोह आयोजित
मनोहर लाल ने इतिहास और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में त्रासदी को समुचित स्थान देने की उठाई मांग
विस्थापित परिवारों ने हरियाणा के विकास और संस्कृति को समृद्ध किया : राव इंद्रजीत सिंह

गुरुग्राम, 14 अगस्त। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करना किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने तथा देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम है। वे गुरुग्राम में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे।
नितिन नबीन ने वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ा, विस्थापन और अपनों को खोने का दंश झेलने वाले लाखों लोगों को नमन करते हुए कहा कि जो राष्ट्र अपने इतिहास को समझता और उससे सीखता है, वही अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का निर्णय नई पीढ़ी को उस दौर की वास्तविकता और आम लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा से परिचित कराने की महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। अनेक परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और अमानवीय परिस्थितियों का सामना किया। ऐसे कठिन समय में समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों ने आगे बढ़कर विस्थापित परिवारों की सहायता की। यह त्रासदी हमें मानवता, सेवा और सामाजिक एकजुटता का महत्व सिखाती है।
सत्ता के लिए स्वीकार किया गया विभाजन : नबीन

नितिन नबीन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन नेतृत्व ने सत्ता के लिए देश का विभाजन स्वीकार कर करोड़ों लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों से कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी और लंबे समय तक त्रासदी के सच को सामने नहीं आने दिया।
उन्होंने युवाओं से विभाजनकारी राजनीति से दूर रहकर राष्ट्रहित और विकसित भारत के निर्माण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में एकता है। देश का युवा आज स्टार्टअप, खेल, नवाचार और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा से भारत का नाम रोशन कर रहा है।
हरियाणा का उल्लेख करते हुए नबीन ने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी व्यवस्था और बिना पर्ची-बिना खर्ची रोजगार देने की नीति से युवाओं का विश्वास मजबूत हुआ है। हरियाणा की बेटियां भी खेलों में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के योगदान की सराहना की।
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल हो विभाजन का इतिहास : मनोहर लाल

केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विभाजन विभीषिका से जुड़ी घटनाओं को इतिहास में संजोकर रखा जाना चाहिए। नई पीढ़ी को उस त्रासदी की जानकारी देने के लिए इसे राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में समुचित स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में शामिल होने से देशभर के युवा विभाजन की वास्तविकता को समझेंगे और उनमें राष्ट्रीय एकता तथा देशभक्ति की भावना मजबूत होगी। विभाजन केवल भूभाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि इससे लाखों परिवारों का जीवन, संबंध और भविष्य प्रभावित हुआ।
मनोहर लाल ने कहा कि विभाजन के समय पंजाब और बंगाल के हिस्से कर भारत माता की दो भुजाएं काट दी गईं। देश के नक्शे पर ऐसी लकीरें खींची गईं, जिन्होंने असंख्य लोगों के दिलों को चीर दिया। लोगों को मालूम नहीं था कि आजादी की उन्हें इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को अंबाला, कुरुक्षेत्र सहित अनेक स्थानों पर बनाए गए शिविरों में रखा गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आर्य समाज, सेवा दल और अन्य सामाजिक संगठनों ने सेवा भाव से कार्य करते हुए पीड़ितों को त्रासदी से बाहर निकालने में सहायता की। विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में भी पुरुषार्थ का रास्ता अपनाया और व्यापार, स्वरोजगार तथा उद्योग स्थापित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
विस्थापित परिवारों ने हरियाणा को दी नई मजबूती : राव इंद्रजीत
केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विभाजन की त्रासदी झेलकर हरियाणा आए परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों में अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। उन्होंने प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विशेष रूप से पंजाबी समाज ने अपनी मेहनत, संघर्ष, उद्यमशीलता और संस्कारों से हरियाणा की विकास यात्रा को नई मजबूती प्रदान की। इन परिवारों ने कृषि, व्यापार, उद्योग, शिक्षा और सामाजिक जीवन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के मूल निवासियों ने विस्थापित परिवारों का खुले मन से स्वागत किया और उन्हें समाज का अभिन्न हिस्सा बनाया। दूसरी ओर, विस्थापित परिवारों ने भी हरियाणा को अपनी कर्मभूमि मानकर प्रदेश की प्रगति में भागीदारी निभाई। पंजाबी समाज की भाषा, खान-पान, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों ने हरियाणा की विरासत को और अधिक व्यापक एवं समृद्ध बनाया है।
स्मृति न्यास का उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना : बोधराज सीकरी
विभाजन विभीषिका स्मृति न्यास एवं आयोजन के संयोजक बोधराज सीकरी ने कहा कि विभाजन की पीड़ा और विस्थापित परिवारों के संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना ही ऐसे आयोजनों का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की स्मृतियों और संघर्ष की कहानियों को सहेजना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
प्रदर्शनी और नाट्य प्रस्तुति ने किया भावुक
समारोह में विभाजन की त्रासदी पर आधारित वृत्तचित्र और मार्मिक नाट्य प्रस्तुति दिखाई गई। कलाकारों ने उस दौर के विस्थापन, पीड़ा और संघर्ष को जीवंत किया, जिससे पूरा पंडाल भावुक हो उठा।
केंद्र सरकार तथा सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें विभाजन के समय की दुर्लभ तस्वीरें, पुराने समाचार पत्रों के पन्ने और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शित किए गए।
कार्यक्रम के समापन पर नितिन नबीन और मनोहर लाल ने ‘स्मृति की दीवार’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उपस्थित जनसमूह ने भी मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को नमन किया। देशभक्ति गीतों के बीच लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय के नारे लगाए।
संत स्वामी धर्मदेव ने विभाजन विभीषिका की स्मृति में राष्ट्रीय स्मारक बनाने और इसके इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की।
समारोह में हरियाणा सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, संत-महात्मा, भाजपा पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और प्रदेशभर से आए बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।








