राव नरेंद्र सिंह का एक वर्ष: संगठन विस्तार और जनसंघर्ष पर जोर

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हरियाणा कांग्रेस ने गिनाईं उपलब्धियां; 151 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति और 400 से अधिक प्रदर्शनों का दावा

चंडीगढ़, 29 सितंबर। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर पार्टी ने संगठन विस्तार, कार्यकर्ता संवाद और जनहित के मुद्दों पर किए गए आंदोलनों को प्रमुख उपलब्धियां बताया है। प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि इस दौरान बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, जिला एवं ब्लॉक इकाइयों को सक्रिय बनाने और सामूहिक नेतृत्व की भावना बढ़ाने पर ध्यान दिया गया।

पार्टी के अनुसार, राव नरेंद्र सिंह ने वरिष्ठ नेताओं से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक नियमित संवाद और सभी को साथ लेकर चलने की कार्यशैली अपनाई। कार्यकर्ताओं को सम्मान देने, उनकी बात सुनने और संगठन में जिम्मेदारी सौंपने को प्राथमिकता दी गई।

151 ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्त, बूथों पर जिम्मेदारियां तय

प्रेस नोट के मुताबिक, प्रदेश के 180 में से 151 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही 33 जिला अध्यक्षों की संगठनात्मक व्यवस्था को मजबूत करने पर काम हुआ। कुल 20,864 बूथों के संदर्भ में पार्टी ने 19,280 बूथ स्तरीय एजेंट-दो (बीएलए-2) और 90 बीएलए-1 को जिम्मेदारी देने की जानकारी दी है।

पार्टी का कहना है कि संगठन को केवल पदाधिकारियों तक सीमित रखने के बजाय कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी पर आधारित बनाने का प्रयास किया गया। ब्लॉक और जिला इकाइयों के माध्यम से वरिष्ठ नेताओं, युवाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को साझा संगठनात्मक लक्ष्य से जोड़ने पर जोर रहा।

जनहित के मुद्दों पर 400 से अधिक प्रदर्शन का दावा

प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में विभिन्न मुद्दों पर 400 से अधिक धरने, प्रदर्शन, घेराव, सत्याग्रह और अन्य विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें महंगाई, बेरोजगारी, किसान-मजदूरों की समस्याएं, मनरेगा, नीट एवं पेपर लीक, रसोई गैस की कीमतें, हरियाणा कौशल रोजगार निगम, बुजुर्ग पेंशन, महिला सुरक्षा और मतदाता अधिकार प्रमुख रहे।

प्रेस नोट में कहा गया कि इन कार्यक्रमों के जरिए जनता की समस्याओं को उठाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विषयों को भी पार्टी ने अपने अभियान का हिस्सा बनाया।

कार्यकर्ता सम्मान और प्रत्यक्ष संवाद को प्राथमिकता

पार्टी ने राव नरेंद्र सिंह की सहज उपलब्धता और संवाद की शैली को उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषता बताया। प्रेस नोट के अनुसार, लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ नए युवाओं को भी अपनी बात रखने और जिम्मेदारी निभाने का अवसर देने पर जोर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस का दावा है कि एक वर्ष के दौरान राव नरेंद्र सिंह ने एक लाख से अधिक लोगों से व्यक्तिगत संवाद किया। इनमें पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न वर्गों के लोग शामिल रहे। इस दौरान उनकी समस्याएं और सुझाव सुने गए।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान

प्रेस नोट में महिलाओं को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने की बात कही गई। पार्टी ने नगर निगम चुनावों में पांच में से चार टिकट महिलाओं को देने का उल्लेख करते हुए इसे महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया। हालांकि, प्रेस नोट में संबंधित नगर निगमों और पदों का विवरण नहीं दिया गया है।

पार्टी के अनुसार, महिला कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और उन्हें संगठन में जिम्मेदारियां देने पर आगे भी ध्यान दिया जाएगा।

दूसरे वर्ष में एक लाख डिजिटल स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण का लक्ष्य

प्रदेश कांग्रेस ने दूसरे वर्ष के लिए मंडल और बूथ स्तर तक संगठन विस्तार, जिला एवं ब्लॉक इकाइयों की जवाबदेही तथा अग्रिम संगठनों को मजबूत करने की प्राथमिकताएं तय की हैं। सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने, एक लाख डिजिटल स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने और हरियाणा के जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों का डिजिटल डैशबोर्ड तैयार करने की योजना भी रखी गई है।

पार्टी ने कहा कि आने वाले वर्ष में हर बूथ तक संगठन पहुंचाने, कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने पर जोर रहेगा। इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश कांग्रेस ने संकल्प रखा है—“मजबूत हरियाणा का संकल्प—हर बूथ पर कांग्रेस, हर आवाज में न्याय, हर दिल में भरोसा।”

जिला इकाइयों से तालमेल की चुनौती भी

इन उपलब्धियों के बीच प्रदेश नेतृत्व और जिला इकाइयों के तालमेल का सवाल भी बना हुआ है। जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां राव नरेंद्र सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले हो चुकी थीं, इसलिए उनकी नियुक्ति को मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष की उपलब्धि से अलग करके देखना जरूरी है। गुरुग्राम में इस संवाददाता के प्रत्यक्ष अनुभव में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जब प्रदेश अध्यक्ष की ओर से कार्य करने को कहे जाने के बावजूद जिला स्तर पर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी।

इससे यह सवाल उठता है कि संगठन के औपचारिक निर्देशों के मुकाबले प्रभावशाली नेताओं के प्रति व्यक्तिगत निष्ठाएं कितनी असरदार हैं। स्थानीय स्तर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक प्रभाव के बीच प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशों को अपेक्षित प्राथमिकता मिल रही है या नहीं, यह भी संगठनात्मक समीक्षा का विषय है। हालांकि, किसी निर्देश पर अमल नहीं होने की वजह को केवल गुटीय निष्ठा से जोड़ने से पहले संबंधित जिला अध्यक्षों का पक्ष जानना जरूरी होगा। दूसरे वर्ष में राव नरेंद्र सिंह की कसौटी संगठन विस्तार के साथ जिला इकाइयों की जवाबदेही और प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों पर प्रभावी अमल सुनिश्चित करना भी होगी।

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Author: Bharat Sarathi

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