खाली पदों और लंबित भर्तियों पर सरकार से मांगा जवाब, समयबद्ध भर्ती कैलेंडर जारी करने की मांग
चंडीगढ़, 29 सितंबर। सिरसा की सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा में सरकारी भर्तियों में देरी और पद खाली रहने को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों पढ़े-लिखे युवा वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बदलाव के कारण उनका इंतजार लंबा होता जा रहा है। सरकार बताए कि आयु सीमा के करीब पहुंच रहे युवाओं को रोजगार के अवसर कब मिलेंगे।
सैलजा ने कहा कि उच्च शिक्षा और पात्रता परीक्षाएं पास करने के बावजूद अनेक युवाओं को परिवार चलाने के लिए मजदूरी, ड्राइविंग, दुकानदारी और अन्य काम करने पड़ रहे हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित करने के लिए उसकी ठोस कार्ययोजना क्या है।
खाली पदों पर नियमों की समीक्षा हो
मीडिया में प्रकाशित आंकड़ों का हवाला देते हुए सैलजा ने कहा कि पिछले 21 महीनों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी की 55 भर्तियों में 6,222 पदों के मुकाबले 4,317 पद ही भरे जाने की बात सामने आई है। इसके अनुसार करीब 31 प्रतिशत पद खाली रह गए।
उन्होंने कहा कि निर्धारित कटऑफ या भर्ती नियमों के कारण बड़ी संख्या में स्वीकृत पद खाली रह जाते हैं तो सरकार को नियमों और परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। योग्यता और न्यूनतम मानकों से समझौता किए बिना पात्र युवाओं को उचित अवसर मिलना चाहिए। युवाओं की योग्यता पर सवाल उठाने के बजाय सरकार यह जांचे कि उपलब्ध पद खाली क्यों रह जाते हैं।
भर्ती वापस लेने से बढ़ता है इंतजार
सैलजा ने कहा कि जुलाई 2025 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 15 श्रेणियों के कुल 8,653 पदों की भर्ती प्रक्रिया वापस लेने की अधिसूचना जारी की थी। इनमें पुलिस कांस्टेबल के 5,600 पद भी शामिल थे। उनके अनुसार, आयोग ने इन रिक्तियों को नई पात्रता परीक्षा के बाद पुनः विज्ञापित करने और पहले से पात्र उम्मीदवारों की पात्रता बनाए रखने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रियाओं में देरी का सबसे अधिक असर वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ता है। उनकी आयु बढ़ती जाती है और आर्थिक व पारिवारिक परेशानियां भी गहराने लगती हैं।
घोषणा से आगे बढ़कर नियुक्ति दे सरकार
सैलजा ने कहा कि युवाओं की मांग राजनीतिक घोषणाओं की नहीं, बल्कि नियमित, पारदर्शी और तय समय में पूरी होने वाली भर्ती प्रक्रिया की है। नेट, एचटेट तथा अन्य पात्रता परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद भी नियुक्ति के लिए वर्षों का इंतजार उनके भविष्य को प्रभावित करता है।
उन्होंने मांग की कि सरकार विभागवार रिक्त पदों और लंबित भर्तियों की स्थिति सार्वजनिक करे। साथ ही विज्ञापन जारी करने, चयन प्रक्रिया पूरी करने और नियुक्ति देने की समय-सीमा घोषित की जाए।
सरकार के स्पष्टीकरण का भी किया उल्लेख
सैलजा ने फरवरी 2026 में विधानसभा में हुई बहस का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 8,653 पदों का विज्ञापन वापस लेने के पीछे पात्रता परीक्षा कराने और नए उम्मीदवारों को अवसर देने का तर्क दिया था। मुख्यमंत्री ने बाद में पदों की संख्या बढ़ाकर दोबारा विज्ञापन जारी करने की बात भी कही थी।
सैलजा ने कहा कि सरकार का पक्ष अपनी जगह है, लेकिन युवाओं के लिए असली कसौटी यह है कि चयन प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और उन्हें नियुक्ति कब मिलती है।
आश्वासन नहीं, रोजगार के अवसर मिलें
कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा के युवा मेहनती और योग्य हैं। उन्हें बार-बार आश्वासन देने के बजाय रोजगार के वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल किया कि वर्षों से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे और आयु सीमा के करीब पहुंच चुके अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी? लंबित रिक्तियां कब भरी जाएंगी और निश्चित भर्ती कैलेंडर कब जारी होगा?
उन्होंने मांग की कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे प्रशासनिक देरी के कारण किसी पात्र युवा के रोजगार के अवसर समाप्त न हों।








